जोहार लाइव ब्यूरो
ऑनलाइन गेमिंग की लत ने एक कम उम्र के लड़के की जिंदगी पूरी तरह बदल दी. गेम खेलने की लत के चलते वह गंभीर रूप से दिव्यांग हो गया, वहीं बेटे की जान बचाने और इलाज कराने में माता-पिता की पूरी जमा-पूंजी खत्म हो गई. यह दर्दनाक मामला ओडिशा के भद्रक जिले के बंट ब्लॉक के अधीन आदिया ग्राम पंचायत के ओल्डांग गांव से सामने आया है.
ऑनलाइन गेमिंग की लत ने बदली जिंदगी
जानकारी के मुताबिक, आलेख दास के छोटे बेटे को वर्ष 2022 में मुख्य रूप से ऑनलाइन पढ़ाई के लिए मोबाइल फोन दिया गया था. लेकिन पढ़ाई के लिए दिए गए इस मोबाइल का इस्तेमाल करते-करते वह धीरे-धीरे ऑनलाइन गेम खेलने का आदी हो गया. समय के साथ उसकी गेमिंग की लत बढ़ती गई और वह ऑनलाइन गेमिंग चैलेंज में भी काफी अधिक उलझ गया.
बताया जा रहा है कि ऑनलाइन गेमिंग की यह लत आखिरकार बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गई. कथित तौर पर लड़के ने अपनी जान देने की कोशिश की. हालांकि वह इस घटना में बच गया, लेकिन उसकी सेहत पर गंभीर असर पड़ा. परिवार के मुताबिक, अब वह चलने में असमर्थ है और ठीक से बोल भी नहीं पाता है.
इलाज में खत्म हुई परिवार की जमा-पूंजी
लंबे समय से चल रहे इलाज ने परिवार पर भारी आर्थिक बोझ डाल दिया है. परिजनों के मुताबिक, बेटे के इलाज में उनकी पूरी जमा-पूंजी खर्च हो चुकी है. अब पैसों की कमी के कारण उसके इलाज को आगे जारी रखना भी मुश्किल हो गया है.
परिवार ने सरकार के साथ-साथ निजी लोगों और सामाजिक संगठनों से आर्थिक मदद की अपील की है, ताकि लड़के का इलाज और पुनर्वास जारी रखा जा सके.
परिवार की अपील के बाद भद्रक विधायक ने कथित तौर पर उनसे बातचीत की और मदद का भरोसा दिया. वहीं, अपर जिलाधिकारी ने भी कहा है कि प्रशासन की ओर से परिवार को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी.
बच्चे तो बच्चे, बुजुर्ग भी इस लत के शिकार हो रहे हैं. ऐसा ही एक मामला बीते 5 सितंबर को छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के करतला थाना क्षेत्र के ग्राम केराकछार में इंटरनेट मीडिया पर रील देखने की लत से जुड़ी एक घटना ने परिवार ही नहीं, बल्कि आसपास के लोगों को भी झकझोर दिया. 52 वर्षीय मंगलो बाई सारथी की मोबाइल का नेटवर्क चले जाने के बाद नाराजगी इतनी बढ़ गई कि उन्होंने मोबाइल जमीन पर पटककर तोड़ दिया.
मिली जानकारी के मुताबिक, मंगलो बाई अपने घर में मोबाइल पर रील देख रही थीं. इसी दौरान मोबाइल का नेटवर्क बार-बार गायब होने लगा. इंटरनेट कनेक्टिविटी बाधित होने से रील रुक-रुककर चल रही थी. इससे नाराज होकर उन्होंने मोबाइल जमीन पर पटक दिया. मोबाइल क्षतिग्रस्त होने के बाद भी उनका गुस्सा शांत नहीं हुआ. कुछ समय बाद उन्होंने घर में रखा कीटनाशक पी लिया. फिलहाल महिला सुरक्षित है और अस्पताल में इलाजरत है.
इन उपायों से बच्चों में ऑनलाइन गेम खेलने की आदत को बदल सकते हैः-
• बच्चों के लिए दिनभर में गेम खेलने का एक निश्चित समय (जैसे दिन में सिर्फ 30 से 45 मिनट) तय करें.
• इस नियम को पढ़ाई या होमवर्क पूरा होने के साथ जोड़ें, ताकि यह एक रिवॉर्ड (इनाम) की तरह लगे.
• सोने से कम से कम 1 घंटा पहले बच्चे के हाथ से फोन या गैजेट्स ले लें ताकि नींद प्रभावित न हो.
• बच्चों को घर से बाहर जाकर दोस्तों के साथ खेलने, साइकिल चलाने या पार्क में टहलने के लिए प्रेरित करें.
• अगर मुमकिन हो, तो शाम को बच्चे के साथ खुद पार्क जाएं और उनके साथ खेलें.
• बच्चे की रुचि पेंटिंग, संगीत, क्राफ्ट या किसी नई हॉबी (शौक) में बढ़ाएं ताकि उनका ध्यान गेम से हटे.
• कंप्यूटर, लैपटॉप या फोन को बच्चे के कमरे या एकांत में न रखें.
• बच्चे अपने माता-पिता को देखकर सीखते हैं. परिवार के साथ बैठते या खाना खाते समय खुद मोबाइल का इस्तेमाल न करें.

