Ranchi : झारखंड सरकार ने इस बार के बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र को लेकर बड़ा दांव खेला है। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों को राहत देने के लिए सरकार ने 200 करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान किया है। साथ ही सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में PET-Scan मशीन लगाने की घोषणा की है। इस फैसले से सबसे ज्यादा फायदा राज्य के सबसे बड़े अस्पताल राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) को होने की उम्मीद है।
रिम्स में हर महीने पहुंचते हैं 600 नए मरीज
रिम्स में हर महीने करीब 600 नए कैंसर मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। सिर्फ झारखंड ही नहीं, बल्कि बिहार, ओड़िशा और पश्चिम बंगाल से भी बड़ी संख्या में मरीज यहां आते हैं। हालांकि कैंसर विभाग अलग से चल रहा है, लेकिन PET-Scan जैसी उन्नत जांच सुविधा अस्पताल में उपलब्ध नहीं है। ऐसे में मरीजों को मजबूरी में निजी जांच केंद्रों का रुख करना पड़ता है।
25 से 30 हजार रुपये तक खर्च, गरीब मरीजों पर भारी बोझ
एक PET-Scan जांच पर औसतन 25 से 30 हजार रुपये तक का खर्च आता है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह रकम काफी बड़ी होती है। कई बार मरीज सिर्फ पैसों की कमी की वजह से समय पर जांच नहीं करा पाते। रिम्स की पिछली गवर्निंग बॉडी की बैठक में PET-Scan को पीपीपी मोड पर शुरू करने का फैसला हुआ था, लेकिन वह योजना अब तक जमीन पर नहीं उतर सकी।
क्यों जरूरी है PET-Scan जांच?
आंकोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ डॉ. रोहित झा बताते हैं कि PET-Scan जांच कैंसर की सही स्टेजिंग बताने में बेहद अहम है। इससे पता चलता है कि कैंसर शरीर में कितना फैला है और इलाज कितना असरदार हो रहा है। अगर यह सुविधा अस्पताल में ही मिल जाए तो इलाज ज्यादा सटीक, समय पर और असरदार हो सकता है। फिलहाल संसाधनों की कमी के कारण हर मरीज को यह जांच लिख पाना संभव नहीं हो पाता।
पूर्वी भारत में तेजी से बढ़ रहे कैंसर के मामले
देश में हर साल लाखों नए कैंसर मरीज सामने आ रहे हैं। खासकर पूर्वी भारत के राज्यों में तंबाकू से जुड़े कैंसर के मामले ज्यादा देखे जा रहे हैं। ऐसे में क्षेत्रीय स्तर पर बेहतर जांच और इलाज की सुविधा बेहद जरूरी हो गई है। सरकार द्वारा 200 करोड़ रुपये के प्रावधान से न सिर्फ मशीनें लगेंगी, बल्कि प्रशिक्षित स्टाफ, रेडियोफार्मास्यूटिकल आपूर्ति और रखरखाव जैसी जरूरी व्यवस्थाएं भी मजबूत होने की उम्मीद है।
रिम्स बन सकता है बड़ा कैंसर सेंटर
अगर सरकार की घोषणा समय पर लागू होती है, तो रिम्स पूर्वी भारत का एक प्रमुख कैंसर उपचार केंद्र बन सकता है। मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में PET-Scan की सुविधा शुरू होने से आर्थिक बोझ कम होगा और इलाज के लिए दूसरे राज्यों में भटकना नहीं पड़ेगा। कुल मिलाकर, बजट में लिया गया यह फैसला झारखंड में कैंसर इलाज की व्यवस्था को नई दिशा दे सकता है।
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