Ranchi : झारखंड में लंबे समय से अटके नगर निकाय चुनाव को लेकर अब लगभग तस्वीर साफ हो गई है। राज्य के 48 नगर निकाय क्षेत्रों में चुनाव फरवरी 2026 में कराए जाएंगे। मतदान 24 से 27 फरवरी के बीच किसी एक दिन कराया जा सकता है, जबकि मतगणना 28 फरवरी या 1 मार्च को होने की संभावना है। राज्य चुनाव आयोग के प्रस्ताव को राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने मंजूरी दे दी है। यह प्रस्ताव राज्य चुनाव आयोग की ओर से 9 जनवरी को भेजा गया था। स्वीकृति के बाद इसे मुख्य सचिव के माध्यम से आयोग को भेजा जाएगा। इसके बाद राज्य चुनाव आयुक्त अलका तिवारी औपचारिक रूप से चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करेंगी।
20 जनवरी के बाद जारी हो सकती है अधिसूचना
राज्य निर्वाचन आयोग 20 जनवरी के बाद किसी भी दिन नगर निकाय चुनाव की अधिसूचना जारी कर सकता है। अधिसूचना जारी होने के साथ ही नामांकन की प्रक्रिया शुरू होगी, जो सात दिनों तक चलेगी। नामांकन पत्रों की जांच के बाद दो दिन का समय नामांकन वापसी के लिए दिया जाएगा। नामांकन वापसी की अंतिम तिथि के बाद ही प्रत्याशियों को चुनाव चिन्ह आवंटित किए जाएंगे।
हाईकोर्ट के निर्देशों में होगा चुनाव
नगर निकाय चुनाव समय पर कराने को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि 31 मार्च से पहले चुनाव कराकर उसकी रिपोर्ट सौंपी जाए। इसी निर्देश के तहत चुनाव आयोग ने फरवरी में मतदान और मार्च की शुरुआत में मतगणना कराने की योजना बनाई है।
डिप्टी मेयर और उपाध्यक्ष का भी होगा चुनाव
नगर निकाय चुनाव के बाद नगर निगमों में डिप्टी मेयर तथा नगर परिषद और नगर पंचायतों में उपाध्यक्ष का चुनाव कराया जाएगा। इसमें नवनिर्वाचित वार्ड पार्षद भाग लेंगे। डिप्टी मेयर या उपाध्यक्ष का चयन वार्ड पार्षदों के बीच मतदान के जरिए किया जाएगा।
नगर निकायों को मिलेगा स्थायी नेतृत्व
फरवरी-मार्च में होने वाले चुनाव से नगर निकायों को नया और स्थायी नेतृत्व मिलेगा। लंबे समय से बिना जनप्रतिनिधियों के चल रहे नगर निकायों में अब वार्ड पार्षदों के साथ स्थानीय शहरी सरकार का पूरा ढांचा सक्रिय हो सकेगा।
ट्रिपल टेस्ट के बाद पहला चुनाव
यह नगर निकाय चुनाव कई मायनों में खास है। ट्रिपल टेस्ट पूरा होने के बाद राज्य में पहली बार नगर निकाय चुनाव कराए जा रहे हैं। इन 48 निकायों में 9 नगर निगम, 20 नगर परिषद और 19 नगर पंचायत शामिल हैं। यहां वर्ष 2020 से चुनाव लंबित थे। कोरोना महामारी, ओबीसी आरक्षण और ट्रिपल टेस्ट को लेकर निर्णय में देरी के कारण चुनाव टलते रहे।
हाईकोर्ट के हस्तक्षेप और समय सीमा तय होने के बाद अब चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ी है। इसी बीच राज्यपाल ने विधानसभा के बजट सत्र के कार्यक्रम को भी मंजूरी दे दी है, जिससे सरकार और चुनाव आयोग दोनों के लिए आगे की कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है।
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