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    Home»झारखंड»‘फर्जी डिग्री’ पर नौकरी कर रहे झारखंड में 4 हजार से ज्यादा सहायक शिक्षक होंगे बर्खास्त!
    झारखंड

    ‘फर्जी डिग्री’ पर नौकरी कर रहे झारखंड में 4 हजार से ज्यादा सहायक शिक्षक होंगे बर्खास्त!

    Muskan ChoudharyBy Muskan ChoudharyMay 25, 2025Updated:May 25, 2025No Comments3 Mins Read0
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    फर्जी डिग्री
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    Ranchi : झारखंड के सरकारी स्कूलों में लगभग चार हजार सहायक शिक्षकों (पारा टीचर) को नौकरी से बर्खास्त करने की तैयारी चल रही है. इन शिक्षकों पर (फर्जी डिग्री) फर्जी और गैर-मान्यता प्राप्त संस्थानों की ओर से निर्गत शैक्षणिक प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी करने का आरोप है. झारखंड के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग और राज्य शिक्षा परियोजना की ओर से अप्रैल महीने में जारी एक निर्देश के अनुसार, राज्य के सभी 24 जिलों में सहायक शिक्षकों (पारा टीचर) के प्रमाण पत्रों और डिग्रियों की जांच चल रही है.

    विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, विभिन्न जिलों में अब तक हुई जांच में 1,136 ऐसे शिक्षकों को चिन्हित किया गया है, जिन्होंने गैर मान्यता प्राप्त संस्थाओं के शैक्षणिक प्रमाण पत्र जमा किए हैं. दुमका जिले में ऐसे 153, गिरिडीह में 269 और देवघर में 98 सहायक शिक्षकों का वेतन अप्रैल 2025 से रोक दिया गया है. अनुमान है कि पूरे राज्य में ऐसे सहायक शिक्षकों की कुल संख्या चार हजार के आसपास है. झारखंड राज्य शिक्षा परियोजना के निदेशक शशि रंजन ने कहा कि सभी जिलों के शिक्षा अधीक्षकों से फर्जी प्रमाण पत्र जमा करने वाले पारा शिक्षकों की जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है. जांच पूरी होने के बाद विभाग के स्तर से नीतिगत तौर पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा.

    उल्लेखनीय है कि पूरे राज्य में 62 हजार से अधिक सहायक शिक्षक (पारा टीचर) कार्यरत हैं. सर्व शिक्षा अभियान के तहत ग्रामीण स्कूलों में इनकी नियुक्तियां वर्ष 2001 से 2003 के बीच ग्राम शिक्षा समितियों की अनुशंसा पर की गई थीं. उस वक्त इनके लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता मैट्रिक तय की गई थी और इन्हें प्रतिमाह मात्र एक हजार रुपए का मानदेय दिया जाता था. बाद में वर्ष 2005 में विभाग ने एक सर्कुलर जारी किया, जिसमें ऐसे शिक्षकों के लिए न्यूनतम योग्यता इंटरमीडिएट निर्धारित की गई. बताया जाता है कि इसी सर्कुलर के बाद, हजारों शिक्षकों ने उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड के कई ऐसे संस्थानों से इंटर पास होने का प्रमाण पत्र जमा किया, जो गैर मान्यता प्राप्त हैं. इन्हीं प्रमाण पत्रों के आधार पर वे दो दशक से भी अधिक समय से कार्यरत हैं.

    जांच में जिन गैर मान्यता प्राप्त संस्थानों से जारी प्रमाण पत्रों को फर्जी करार दिया गया है, उनमें अधिकतर उत्तर प्रदेश के हैं. इन संस्थानों में हिंदी साहित्य सम्मेलन इलाहाबाद, हिंदी साहित्य सम्मेलन प्रयाग, प्रयाग महिला विद्यापीठ इलाहाबाद, भारतीय शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश, राजकीय मुक्त विद्यालय शिक्षण संस्थान, नवभारत शिक्षा परिषद इंडिया, हिंदी विद्यापीठ देवघर, बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड, हिंदी साहित्य सम्मेलन बहादुरगंज आदि शामिल हैं. दूसरी ओर, सहायक शिक्षकों ने विभाग की इस कार्रवाई को दोषपूर्ण करार दिया है. इसे लेकर राज्य के शिक्षा विभाग के अधिकारियों और मंत्री का सहायक शिक्षकों के संगठन ने लिखित तौर पर आपत्ति दर्ज कराई है.

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