किसलय शानू : रांची
झारखंड जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा विवाद में नई जांच के दौरान सामने आ रहे तथ्यों ने पूर्व डीजीपी सह सीआईडी
प्रमुख अनुराग गुप्ता की भूमिका को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. हालांकि, यह अभी जांच का विषय है कि तत्कालीन जांच में मुख्यमंत्री को जानबूझकर गलत जानकारी दी गई थी या उस समय उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निष्कर्ष निकाला गया था. वर्तमान में अनुराग गुप्ता की पूरे मामले में भूमिका की एसआईटी जांच के बाद इसका खुलासा हो सकता है.
जानकारी के अनुसार, तत्कालीन सीआईडी जांच में जेएसएससी – सीजीएल में बड़े स्तर पर पेपर लीक की पुष्टि नहीं हुई थी. रिपोर्टों के मुताबिक, उस समय जांच का निष्कर्ष यह था कि पेपर लीक के नाम पर अभ्यर्थियों से अवैध वसूली की गई थी. क्या यह थ्योरी सिर्फ अनुराग गुप्ता के दिमाग की उपज थी, या इसके पीछे की कहानी दूसरी थी. क्योंकि तब सिर्फ इसी थ्योरी को आधार मानकर पेपर लीक के आरोपों को खारिज किया गया था.
लेकिन वर्ष 2026 में तेज हुई नई एसआईटी जांच में गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ के दौरान कथित पेपर लीक और अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले उत्तर रटाए जाने से जुड़े नए तथ्य सामने आने की बात सामने आई है. सीआईडी की रिपोर्ट के अनुसार, आरोपितों ने 12 से 20 लाख रुपये लेकर प्रश्नों के उत्तर रटाने की बात स्वीकार की है.
सरकार की ओर से हाईकोर्ट में दाखिल हलफनामे में भी जांच के आधार पर परीक्षा प्रक्रिया में व्यापक अनियमितताओं का दावा किया गया है. इसमें नेपाल, बिहार, आसनसोल, कोलकाता, झरिया और बोकारो में अभ्यर्थियों को उत्तर रटाने के कथित कैंप, OMR और डिजिटल सिस्टम में संभावित छेड़छाड़ तथा परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े अन्य गंभीर आरोपों का उल्लेख है.
सरकार के अनुसार, मामले में 28 लोगों की गिरफ्तारी और 265 सफल अभ्यर्थियों को नोटिस दिए जाने की बात कही गई है.
इसी विरोधाभास ने सबसे बड़ा सवाल खड़ा किया है—अगर बाद की जांच में पेपर लीक और संगठित अनियमितताओं के प्रमाण मिल रहे हैं, तो तत्कालीन CID जांच उस निष्कर्ष तक क्यों नहीं पहुंची?
विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया है कि तत्कालीन सीआईडी जांच को प्रभावित किया गया, उसे गलत दिशा में ले जाया गया और डिजिटल साक्ष्यों को नष्ट कराने की कोशिश हुई। उन्होंने पूर्व डीजीपी अनुराग गुप्ता की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग की है. ये आरोप राजनीतिक पक्ष द्वारा लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि का सवाल अभी जांच के दायरे में है.
ये भी पढ़ें : JSSC-CGL पर बाबूलाल का सवाल : पूरी परीक्षा दूषित थी तो पहले की जांच में क्या छिपा रह गया?
इस पूरे घटनाक्रम में मुख्यमंत्री को कथित तौर पर गलत तथ्य बताए जाने का सवाल भी महत्वपूर्ण हो जाता है. यदि जांच एजेंसियों के पुराने और नए निष्कर्षों में इतना बड़ा अंतर है, तो यह पता लगाना जरूरी होगा कि तत्कालीन सरकार को कौन-सी रिपोर्ट दी गई थी, उसमें कौन-कौन से तथ्य शामिल थे और बाद की जांच में सामने आए साक्ष्य उस रिपोर्ट से क्यों अलग हैं.
हालांकि, इस पूरे मामले में अनुराग गुप्ता का बयान सामने आना बाकी है. मामले में उनका पक्ष आने के बाद इसे भी प्रकाशित किया जायेगा.


