रांची: झारखंड सामान्य स्नातक योग्यताधारी संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा (JSSC CGL) 2023 को रद्द किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर राज्य सरकार ने झारखंड हाईकोर्ट में अपना जवाबी हलफनामा दाखिल कर दिया है. सरकार ने परीक्षा की पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा है कि जब परीक्षा संचालन की व्यवस्था ही ‘स्रोत स्तर’ पर दूषित हो जाए, तो ईमानदार और कथित तौर पर धांधली में शामिल अभ्यर्थियों को अलग-अलग करना संभव नहीं रह जाता.
सरकार ने अदालत से चयनित अभ्यर्थियों की ओर से दायर रिट याचिका खारिज करने और 21 अगस्त 2026 को दिए गए अंतरिम स्थगन आदेश को हटाने की मांग की है.
नेपाल से बंगाल तक कथित गुप्त कैंपों का जिक्र
कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग के संयुक्त सचिव अमर कुमार की ओर से दाखिल हलफनामे में सीआईडी और एसआईटी जांच के आधार पर परीक्षा में कथित अनियमितताओं का जिक्र किया गया है. जिसमें बताया गया है.
आउटसोर्स एजेंसी के CEO की गिरफ्तारी : सरकार के मुताबिक, परीक्षा संचालन से जुड़े गोपनीय काम की जिम्मेदारी संभाल रही आउटसोर्स एजेंसी ICN Technology Ltd. के CEO सोमांश प्रकाश को गिरफ्तार किया जा चुका है.
नेपाल और कई राज्यों में कैंप : हलफनामे के मुताबिक, जांच में सामने आया है कि परीक्षा से पहले कुछ अभ्यर्थियों को नेपाल के बीरगंज के अलावा कोलकाता, आसनसोल, बिहार, झरिया और बोकारो ले जाया गया, जहां कथित तौर पर गुप्त कैंपों में उन्हें उत्तर रटवाए गए. सरकार के अनुसार, बीरगंज ले जाए गए 28 अभ्यर्थियों में से 10 अंतिम चयन सूची में भी शामिल हुए.
28 गिरफ्तारियां, 265 चयनित अभ्यर्थी जांच के दायरे में : सरकार ने बताया है कि सीआईडी थाना कांड संख्या 01/2025 और 16/2026 के तहत अब तक 28 लोगों की गिरफ्तारी हुई है. इनमें कुछ सफल अभ्यर्थी भी शामिल हैं. इसके अलावा 265 सफल चयनित अभ्यर्थियों को नोटिस जारी कर जांच के दायरे में रखा गया है.
सरकार का तर्क- दागी और बेदाग को अलग करना संभव नहीं
राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के वंशिका यादव और सचिन कुमार से जुड़े फैसलों का हवाला देते हुए कहा है कि अगर परीक्षा कराने वाली व्यवस्था की निष्पक्षता ही प्रभावित हो गई हो, तो पूरी चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा होता है.
सरकार का कहना है कि ऐसी स्थिति में कथित रूप से प्रभावित और अप्रभावित अभ्यर्थियों को अलग-अलग करना संभव नहीं है. इसलिए पूरी चयन प्रक्रिया रद्द कर नए सिरे से पारदर्शी परीक्षा कराना ही विकल्प है.
व्यक्तिगत नोटिस जरूरी नहीं होने का तर्क
चयनित अभ्यर्थियों की ओर से यह दलील दी गई है कि उन्हें बिना कारण बताओ नोटिस दिए चयन से बाहर नहीं किया जा सकता. इसके जवाब में सरकार ने कहा है कि यह किसी एक अभ्यर्थी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का मामला नहीं है.
सरकार के मुताबिक, कथित सामूहिक अनियमितताओं के कारण पूरी चयन प्रक्रिया को निरस्त करने का फैसला लिया गया है. ऐसे में हर अभ्यर्थी को अलग-अलग शो-कॉज नोटिस देना जरूरी नहीं है.
नियुक्तियां पहले दिन से ही सशर्त थीं
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के 5 जनवरी 2026 के आदेश का भी हवाला दिया है. हलफनामे के मुताबिक, उस आदेश में नियुक्तियों को आपराधिक जांच और मुकदमों के अंतिम परिणाम के अधीन रखा गया था.
राज्य सरकार का तर्क है कि ऐसे में कुछ महीनों तक सेवा दे चुके अभ्यर्थियों को सिर्फ इस आधार पर स्थायी कानूनी संरक्षण नहीं मिल जाता.
2,025 पदों की भर्ती रद्द करने के फैसले का बचाव
राज्य सरकार ने 18 अगस्त 2026 को जारी अधिसूचना संख्या 5408 का भी बचाव किया है. इसी अधिसूचना के जरिए कैबिनेट की मंजूरी के बाद 2,025 पदों वाली JSSC CGL भर्ती को रद्द किया गया था.
सरकार ने हाईकोर्ट से कहा है कि लोकहित, संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 की भावना और बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के भरोसे को ध्यान में रखते हुए चयनित अभ्यर्थियों की रिट याचिका खारिज की जानी चाहिए. सरकार ने याचिका को ‘सव्यय’ खारिज करने की भी मांग की है.
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