रांची/वाराणसी: प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन टीपीसी के सुप्रीमो ब्रजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता को उत्तर प्रदेश एटीएस ने वाराणसी में मुठभेड़ के दौरान मार गिराया. रामनगर थाना क्षेत्र के लंका मैदान के पास रविवार सुबह हुई मुठभेड़ में ब्रजेश को गोली लगी. उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया. पुलिस के मुताबिक, मुठभेड़ के दौरान एटीएस के दो जवानों की बुलेटप्रूफ जैकेट पर भी गोलियां लगीं, हालांकि दोनों सुरक्षित हैं.
एनआईए की मोस्ट वांटेड लिस्ट में था ब्रजेश गंझू
ब्रजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता का नाम राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए की मोस्ट वांटेड सूची में दर्ज था. एनआईए के रिकॉर्ड में उसका नाम गोपाल सिंह भोक्ता उर्फ ब्रिजेश गंझू के तौर पर दर्ज है. वह आरसी-06/2018/एनआईए/डीएलआई और आरसी-22/2018/एनआईए/डीएलआई मामलों में वांछित था.
एनआईए की मोस्ट वांटेड फोटो सूची में ब्रजेश गंझू को सरदार जी उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता के नाम से भी दर्ज किया गया है. एनआईए के रिकॉर्ड के अनुसार, उसके खिलाफ आरसी-22/2018/एनआईए/डीएलआई मामला दर्ज था और अगस्त 2022 के एनआईए मुख्यालय कार्यालय आदेश के आधार पर उस पर 5 लाख रुपये का इनाम घोषित था. उसका पता चतरा जिले के लावालोंग थाना क्षेत्र के लट्टू सुहवान गांव के रूप में दर्ज है.
30 लाख का इनामी था ब्रजेश, पूर्व विधायक गणेश गंझू का भाई
ब्रजेश गंझू पर कुल 30 लाख रुपये का इनाम घोषित था. झारखंड सरकार ने उस पर 25 लाख रुपये और राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए ने पांच लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था. 2022 में ही एनआईए के इनाम की घोषणा के बाद ब्रजेश पर कुल इनाम की राशि 30 लाख रुपये हो गई थी.
ब्रजेश गंझू का राजनीतिक कनेक्शन भी रहा है. वह सिमरिया के पूर्व विधायक गणेश गंझू का भाई था. गणेश गंझू ने 2014 का विधानसभा चुनाव झारखंड विकास मोर्चा के टिकट पर जीता था और बाद में भाजपा में शामिल हुए थे.
टंडवा टेरर फंडिंग केस में भी आया था नाम
ब्रजेश गंझू का नाम चतरा के टंडवा इलाके से जुड़े चर्चित टेरर फंडिंग केस में भी सामने आया था. जोहार लाइव की 22 अप्रैल 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में एनआईए ने 17 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी. आरोपियों की सूची में ब्रजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता का नाम भी शामिल था.
यह मामला टंडवा थाना क्षेत्र के मगध और आम्रपाली कोल परियोजनाओं से जुड़ा है. एनआईए ने फरवरी 2018 में टंडवा थाना कांड संख्या 2/2016 को टेकओवर किया था. जांच में टीपीसी को कथित अवैध फंडिंग का मामला सामने आया था. जोहार लाइव की रिपोर्ट के मुताबिक, कोयला ढुलाई के ठेकों और लेवी के जरिए टीपीसी तक रकम पहुंचाने के आरोपों की जांच हुई थी.
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टीपीसी से जुड़े मामले में नाम सामने आता रहा
ब्रजेश गंझू का नाम टीपीसी के अन्य कमांडरों के साथ भी सामने आता रहा है. टंडवा टेरर फंडिंग मामले में जोहार लाइव की रिपोर्ट के अनुसार, टीपीसी के जोनल कमांडर आक्रमण उर्फ रवींद्र गंझू उर्फ नेताजी समेत कई आरोपियों के साथ ब्रजेश गंझू भी नामजद था.
अब वाराणसी में यूपी एटीएस की मुठभेड़ में उसके मारे जाने की सूचना सामने आई है. इस कार्रवाई के बाद झारखंड के टीपीसी/टीएसपीसी नेटवर्क से जुड़े पुराने मामलों में भी ब्रजेश गंझू की भूमिका और उसके खिलाफ दर्ज मामलों का रिकॉर्ड अहम हो गया है.

