जोहार लाइव ब्यूरो
झारखंड के लातेहार जिले में बकरी चराने गई एक आदिवासी महिला के साथ कथित मारपीट, यौन दुर्व्यवहार और हिरासत में प्रताड़ना का मामला सामने आने के बाद राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग भी हरकत में आ गया है. आयोग की सदस्य डॉ आशा लकड़ा ने जोहार लाइव से बातचीत करते हुए कहा कि बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण घटना है. जोहार लाइव और सोशल मीडिया के माध्यम से हमें इसकी खबर मिली है. आयोग पूरे मामले पर बहुत जल्द संज्ञान लेने जा रहा है.
उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में आयोग बहुत ही संवेदनशीलता के साथ काम करती है. आयोग यह सुनिश्चित करेगा कि पीड़ित महिला को हर हाल में न्याय मिले.
इधर पूरे मामले पर सीएम हेमंत सोरेन ने भी लातेहार पुलिस को फटकार लगाते हुए निर्देश दिया था कि मामले की जांच कर उचित्त कार्रवाई करते हुए सूचित करें. सीएम के संज्ञान में मामला आते ही लातेहार पुलिस हरकत में आई. इसके बाद थाना प्रभारी प्रभात कुमार दास और आरक्षी-338 मनीष कुमार राम को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. दोनों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है.
क्या है पूरा मामला
बता दें, लातेहार जिले के बारियातू थाना प्रभारी प्रभात कुमार दास और उनके साथ आए तीन अन्य लोगों पर बेरहमी से पीटने, जातिसूचक गालियां देने और यौन दुर्व्यवहार करने का आरोप लगा है.
आरोप लगाने वाली महिला के मुताबिक, 5 अक्टूबर को बकरी चराने के दौरान उन्हें पोस्ता के कारोबार से जुड़े होने का आरोप लगाकर पकड़ा गया और थाने ले जाया गया. वहां उनके साथ मारपीट की गई. महिला ने यह भी आरोप लगाया है कि पुलिस ने दबाव डालकर उनका वीडियो बनवाया और छोड़ने के लिए परिवार से 80 हजार रुपये लिए गए.
लातेहार पुलिस के इस रवैये से नाराज सीएम ने पुरे मामले पर संज्ञान लिया है. अपनी मां की अंत्येष्ठी ठीक अगले दिन एक्स पर उन्होंने साफ लहजे में लिखा कि यह स्थिति स्वीकार्य नहीं है. उन्होंने लातेहार पुलिस से जांच करने और उचित कार्रवाई करने और इसकी सूचना देने का निर्देश दिया है. मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह स्थिति स्वीकार्य नहीं है.
उल्टा लटका कर पीटा, गुप्तांगों में मिर्ची डालने की धमकी, बर्बरता की पूरी कहानी
पीड़िता ने 8 अक्टूबर 2026 को लातेहार के पुलिस अधीक्षक कुमार गौरव के समक्ष लिखित शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की है. अपने आवेदन में उन्होंने बताया कि 5 अक्टूबर को दोपहर करीब दो बजे वह बकरी चरा रही थीं. इसी दौरान बगनदी गहवा के पास सिविल ड्रेस में आए लोगों ने उन्हें पकड़ा. महिला ने शिकायत में बारियातू थाना प्रभारी प्रभात कुमार दास, ड्राइवर चंद्रदेव ठाकुर, मुंशी मनीष सहित अन्य लोगों का उल्लेख किया है.
बकौल पीड़िता, बीते 5 अक्टूबर को मारपीट के दौरान मुझे पकड़ कर बरियातू थाना ले जाया गया. यहां पहले मेरे दोनों पैरों को बांध दिया गया. इसके बाद मुझे उल्टा लटका कर बेरहमी से पीटा गया. पिटाई के दौरान भद्दी-भद्दी गालियां भी दी गई. वो कह रहे थे कि भोक्ता, गंझू …(जातिसूचक गाली) आदिवासी…पोस्ता का खेती करती है. गुप्तांगों में मिर्ची डाल देंगे. यही नहीं, थाने ले जाने के क्रम में मेरे स्तनों को वो लगातार दबाते रहे. मेरी पिटाई करते रहे.
अगले दिन यानी 6 अक्टूबर को देर शाम 9 बजे छोड़ने के क्रम में जबरदस्ती वीडियो बनवाया गया. जिसमें मुझसे कहलवाया गया कि मैं पोस्ता का खेती करती हूं. मुझसे कहा गया कि अगर मैं ऐसा नहीं बोलूंगी तो मेरा मोबाइल और मोटरसाइकिल जिसे पुलिस ने जब्त किया था, वो नहीं दिया जाएगा.
लातेहार पुलिस की हवस यहीं नहीं रुकी. वो मेरे घर आई और घर में रखे 80 हजार रुपए भी ले गई.
परिवार की ओर से यह भी आरोप लगाया गया है कि पुनिया देवी को छोड़ने के लिए 80 हजार रुपये लिए गए.

