जोहार लाइव ब्यूरो
रांची की विशेष CBI अदालत ने कोयला परिवहन और कथित भ्रष्टाचार से जुड़े CBI जांच मामले में अहम आदेश देते हुए आरोपी संतोष करमाली को अग्रिम जमानत दे दी है. यह आदेश ए.जे.सी.-1 सह विशेष CBI न्यायाधीश योगेश कुमार की अदालत ने एबीपी संख्या 1843/2026 में पारित किया. अदालत ने आरोपी को चार सप्ताह के भीतर निचली अदालत में आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है. सरेंडर या गिरफ्तारी की स्थिति में 20 हजार रुपये के निजी मुचलके और समान राशि के दो जमानतदार प्रस्तुत करने पर उसे जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया गया है.
यह मामला RC Case No. 06(A)/2025-R से जुड़ा है, जिसमें CBI ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 61(2) तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी. मामले में CBI पहले ही 22 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है और अदालत संज्ञान भी ले चुकी है.
क्या है पूरा मामला?
CBI के अनुसार 6 मार्च 2025 को CCL की गिद्दी-ए कोलियरी परियोजना में CBI और CCL विजिलेंस की संयुक्त टीम ने औचक जांच (Joint Surprise Check) की थी. जांच के दौरान अधिकारियों और कर्मचारियों के मोबाइल फोन की जांच में कई संदिग्ध डिजिटल लेनदेन सामने आए.
CBI का आरोप है कि गिद्दी-ए कोलियरी के तत्कालीन अधिकारी अयोध्या करमाली के खाते में PhonePe के माध्यम से 3.05 लाख रुपये से अधिक के संदिग्ध लेनदेन मिले. वहीं CCL के क्लर्क मुकेश कुमार उर्फ रुपेश कुमार के खाते में भी निजी कोयला लिफ्टरों से दो लाख रुपये से अधिक के लेनदेन पाए गए. इसके अलावा CCL के कर्मचारी प्रकाश महली के मोबाइल की जांच में करीब 4.98 लाख रुपये के संदिग्ध ट्रांजैक्शन विभिन्न निजी कोयला कारोबारियों और लिफ्टरों से जुड़े मिले. CBI का आरोप है कि ये रकम अवैध तरीके से कोयला उठाव और परिवहन में कथित मदद के बदले ली गई थी.
संतोष करमाली ने क्या दलील दी?
संतोष करमाली की ओर से अदालत को बताया गया कि वह एक भूमिहीन मजदूर है और उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है. उसने जांच के दौरान CBI का पूरा सहयोग किया और जांच अधिकारी के बुलाने पर हर बार उपस्थित हुआ. बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि CBI ने अपनी चार्जशीट में उसे सरकारी गवाह (Approver) बनाने की अनुशंसा की है और वह मुकदमे में सहयोग करने के लिए तैयार है.
बचाव पक्ष का कहना था कि संतोष करमाली सरकारी कर्मचारी नहीं है और उसके खिलाफ किसी साजिश में शामिल होने का कोई ठोस साक्ष्य नहीं है. वह केवल मजदूरी के एवज में ट्रकों पर कोयला लोड कराने का काम करता था. उसे किसी सरकारी अधिकारी को प्रभावित करने या अवैध लाभ पहुंचाने के लिए धन लेने का कोई आरोप नहीं है. साथ ही इसी मामले के सह-आरोपी आशीष करमाली को पहले ही इसी अदालत से अग्रिम जमानत मिल चुकी है.
अदालत ने किन आधारों पर दी राहत?
सुनवाई के दौरान CBI की ओर से भी अदालत को बताया गया कि आरोपी के खिलाफ जांच पूरी हो चुकी है, चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है और अब उसकी हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता नहीं है. अदालत ने माना कि जांच के दौरान CBI ने आरोपी को गिरफ्तार करना जरूरी नहीं समझा था. साथ ही उसे सरकारी गवाह बनाने की अनुशंसा भी की गई है.
इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने सर्वोच्च न्यायालय के सत्येंद्र कुमार अंतिर बनाम सीबीआई, सिद्धार्थ बनाम उत्तर प्रदेश राज्य, अमनप्रीत सिंह बनाम सीबीआई तथा मौसहर आलम बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामलों में दिए गए निर्णयों का हवाला देते हुए अग्रिम जमानत मंजूर कर ली. अब संतोष करमाली को चार सप्ताह के भीतर संबंधित अदालत में आत्मसमर्पण करना होगा, जिसके बाद निर्धारित शर्तों का पालन करने पर उसे जमानत का लाभ मिलेगा.
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