जोहार लाइव ब्यूरो
सात साल पहले चलती पिकअप वैन में युवती से सामूहिक दुष्कर्म के मामले में रांची की न्यायिक आयुक्त अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है. न्यायिक आयुक्त अनिल कुमार मिश्रा-1 की अदालत ने पलामू निवासी दीपक कुमार महतो (ड्राइवर) और गुड्डू कुमार चौहान उर्फ छोटू (खलासी) को भारतीय दंड संहिता की धारा 376D के तहत दोषी करार देते हुए 20-20 साल के कठोर कारावास और 20-20 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है. जुर्माना नहीं देने पर दोनों को छह महीने का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा. अदालत ने यह भी आदेश दिया कि वसूली गई जुर्माने की राशि पीड़िता को मुआवजे के रूप में दी जाएगी. साथ ही जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) को भी पीड़िता को उचित क्षतिपूर्ति उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है.
क्या था पूरा मामला?
अदालत में पेश रिकॉर्ड के अनुसार, घटना 10 जनवरी 2019 की है. पीड़िता ने अपने बयान में कहा था कि सौतेली मां से विवाद होने के बाद वह घर छोड़कर डालटनगंज बस स्टैंड पहुंची थी. रांची जाने के लिए बस नहीं मिलने पर वह एक बोलेरो पिकअप में बैठ गई. रांची पहुंचने के बाद उसने वापस डालटनगंज जाने की इच्छा जताई, लेकिन ड्राइवर और खलासी ने उसे पूरे दिन वाहन में ही बैठाए रखा.
रात करीब 10 बजे दोनों आरोपी उसे सुनसान स्थान पर ले गए. आरोप है कि उसके हाथ-पैर और मुंह बांध दिए गए और फिर दोनों ने बारी-बारी से उसके साथ दुष्कर्म किया. वारदात के बाद उसे सड़क पर छोड़कर फरार हो गए. किसी अन्य वाहन चालक की मदद से पीड़िता पीसीआर वाहन तक पहुंची, जिसके बाद उसे महिला थाना ले जाया गया और मामला दर्ज हुआ.
पीड़िता की गवाही बनी सबसे मजबूत कड़ी
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि पीड़िता ने अपने फर्दबयान, मजिस्ट्रेट के समक्ष धारा 164 सीआरपीसी के तहत दिए गए बयान और अदालत में दर्ज गवाही में लगातार एक जैसी बात कही. जिरह के दौरान भी उसके बयान में ऐसा कोई विरोधाभास नहीं मिला जिससे उसकी विश्वसनीयता पर संदेह किया जा सके.
अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि यौन अपराध के मामलों में यदि पीड़िता की गवाही भरोसेमंद और सुसंगत हो तो केवल उसी के आधार पर दोष सिद्ध किया जा सकता है. इस मामले में पीड़िता की गवाही पूरी तरह विश्वसनीय पाई गई.
मेडिकल और फॉरेंसिक रिपोर्ट ने मजबूत किया केस
सदर अस्पताल की महिला चिकित्सक ने मेडिकल जांच में पीड़िता के शरीर पर हालिया यौन उत्पीड़न के संकेत मिलने की पुष्टि की. जांच में शरीर के संवेदनशील हिस्सों में सूजन और चोट के निशान पाए गए. डॉक्टर ने अपनी रिपोर्ट में इसे हालिया यौन हमले का मामला बताया.
वहीं फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) की रिपोर्ट में दोनों आरोपियों के अंडरवियर पर वीर्य मिलने की पुष्टि हुई. पीड़िता के कपड़ों पर खून के निशान भी मिले. हालांकि पीड़िता की पैंटी पर वीर्य नहीं मिला, लेकिन अदालत ने माना कि इससे पूरे मामले पर कोई असर नहीं पड़ता, क्योंकि अन्य वैज्ञानिक और मौखिक साक्ष्य अभियोजन की कहानी की पुष्टि करते हैं.
जांच अधिकारी ने घटना वाले दिन कोकर चौक और लालपुर चौक के CCTV फुटेज हासिल किए. फुटेज में वही बोलेरो पिकअप दिखाई दी, जिसका नंबर JH-03P-5989 था. जांच के दौरान यह भी पता चला कि वाहन अखबार ढुलाई में इस्तेमाल होता था और घटना के समय दीपक महतो उसका चालक तथा गुड्डू कुमार चौहान उसका खलासी था. पुलिस ने उसी रात वाहन बरामद कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। अदालत ने माना कि CCTV, वाहन की बरामदगी और गिरफ्तारी की पूरी प्रक्रिया अभियोजन के पक्ष को मजबूत करती है।
अदालत ने क्या कहा?
सजा सुनाते समय अदालत ने कहा कि सामूहिक दुष्कर्म जैसा अपराध केवल एक महिला के सम्मान पर हमला नहीं है, बल्कि पूरे समाज को प्रभावित करने वाला गंभीर अपराध है. ऐसे मामलों में कठोर सजा जरूरी है ताकि समाज में स्पष्ट संदेश जाए और भविष्य में इस तरह के अपराधों पर रोक लगे.
फैसले के समय एक आरोपी गुड्डू कुमार चौहान अदालत में उपस्थित नहीं था. उसकी जमानत पहले ही रद्द कर दी गई थी और उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया गया था. अदालत ने उसकी अनुपस्थिति के बावजूद समान सजा सुनाई. वहीं मौजूद आरोपी दीपक कुमार महतो को अदालत से सीधे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया. दोनों को अब 20 साल के कठोर कारावास की सजा भुगतनी होगी, जबकि ट्रायल के दौरान जेल में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित किया जाएगा.
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