जोहार लाइव ब्यूरो
झारखंड के पूर्व डीजीपी अनुराग गुप्ता अपने पूरे सर्विस के दौरान लगातार चर्चा में रहे. कभी राज्यसभा चुनाव में कथित तौर पर सरकार के पक्ष में काम करने के लिए, तो कभी सीआईडी से हटाने जाने के कारण, तो कभी रातों रात जबरिया रिटायर किए जाने के कारण. वो एक बार फिर चर्चा में हैं.
इस बार वो अपने पेंशन की वजह से चर्चा में हैं. बीते 6 नवंबर 2025 से सरकार ने उन्हें रिटायर माना. हालांकि उन्होंने इससे पहले अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. रिटायर हुए 9 माह बीत चुके हैं, लेकिन अब तक उनका पेंशन चालू नहीं हो सका है.
मिली जानकारी के मुताबिक पेंशन के लिए जरूरी कागजी कार्रवाई जो कि उनके तरफ सो होनी थी, उसे उन्होंने पूरा कर लिया है. लेकिन इस बीच उनके पेंशन शुरू होने से पहले एजी ने पुलिस मुख्यालय से कुछ आपत्तियों पर जानकारी मांगी है. पुलिस मुख्यालय इससे संबंधित जवाब तैयार कर रहा है.
विवादों से पुराना है नाता
इससे पहले बीते 4 नवंबर 2025 की शाम को राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) रहे अनुराग गुप्ता ने अचानक इस्तीफा दे दिया था. हालांकि 6 नवंबर शाम तक इसे स्वीकार नहीं किया गया था. फिर 6 नवंबर की देर शाम घोषणा हुई कि 1994 बैच की आईपीएस तदाशा मिश्रा को नया DGP नियुक्त किया गया है.
यह कोई पहली बार नहीं है जब अनुराग गुप्ता चर्चा या विवादों में आए हों. वे सबसे अधिक चर्चा में तब आए जब साल 2016 में झारखंड में राज्यसभा के चुनाव हुए. गुप्ता उस वक्त तत्कालीन सीएम रघुबर दास के खास माने जाते थे और सीआईडी के एडीजी की भूमिका में थे.
उस चुनाव के ठीक एक साल बाद पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी ने गुप्ता पर बड़ा गंभीर आरोप लगाया. तब मरांडी झारखंड विकास मोर्चा के अध्यक्ष थे. उन्होंने 2017 में एक सीडी जारी कर आरोप लगाया था कि गुप्ता ने बीजेपी प्रत्याशी के पक्ष में समर्थन जुटाने के लिए कांग्रेस विधायक निर्मला देवी को वोट देने से रोकने के लिए उनके पति और पूर्व मंत्री योगेंद्र साव को दो दिन में 26 बार फोन कर लालच और धमकियां दीं.
कथित तौर पर सीडी में एक जगह योगेंद्र साव से गुप्ता ने कहा था कि अभी तीन-चार साल रघुवर सरकार रहेगी, आपको बहुत ऊंचाई तक ले जाएंगे, बात न मानने पर दिक्कत होगी.
मरांडी की शिकायत पर उनके खिलाफ मामला दर्ज हुआ. इसी बीच साल 2019 में हेमंत सोरेन की सरकार बनते ही उन्हें सस्पेंड कर दिया गया और उनके खिलाफ विभागीय कार्यवाई करने का भी निर्देश दिया गया. गुप्ता कुल 2 साल 4 महीना सस्पेंड रहे. इस दौरान वे केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने के लिए भी कोशिश करते रहे, लेकिन सफलता नहीं मिली.
वापसी के बाद भी विवाद
अनुराग गुप्ता खराब समय बीता और केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) के आदेश के बाद साल 2022 में उन्हें बहाल किया गया. फिर हेमंत सरकार में उनकी वापसी का रास्ता खुला. पहले उन्हें पुलिस प्रशिक्षण एडीजी का प्रभार सौंपा गया. फिर सीआईडी और उसके बाद एसीबी के एडीजी बनाया गया. इस बीच राज्यसभा वाले मामले में भी क्लीन चिट मिल गई.
1990 बैच के आईपीएस अधिकारी रहे अनुराग गुप्ता को साल 2022 में डीजी रैंक में पदोन्नति दी गई. इसके बाद उन्हें पहली बार 26 जुलाई 2024 को झारखंड का प्रभारी DGP बनाया गया. चीजें पटरी पर आई ही थीं, कि वे एक बार फिर विवादों में आए. चुनाव आयोग की अनुशंसा पर बीते विधानसभा चुनाव के दौरान उन्हें पद से हटा दिया गया.
हालांकि वनवास जल्दी खत्म हुआ और हेमंत सोरेन ने 28 नवंबर 2024 को अपने शपथ ग्रहण समारोह के तुरंत बाद उन्हें दोबारा प्रभारी DGP नियुक्त किया. बाद में तीन फरवरी 2025 को उन्हें नियमित DGP के रूप में कार्यभार सौंपा गया था.
बीते 30 अप्रैल 2025 को वे रिटायर हो गए. लेकिन फिर उन्हें एक्सटेंशन दिया गया. इसके बाद उनका कार्यकाल फरवरी 2027 तक के लिए निर्धारित था.
हालांकि, 22 अप्रैल 2025 को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य के मुख्य सचिव को पत्र भेजकर अनुराग गुप्ता की DGP पद पर नियुक्ति को “नियम सम्मत” न मानते हुए इस पर सवाल उठाया. इसके जवाब में राज्य सरकार की ओर से भी गृह मंत्रालय को पत्राचार किया गया था, जिसमें DGP पद पर अनुराग गुप्ता की नियुक्ति को सही बताया गया था. इस प्रकरण के बाद से ही लगातार DGP का पद विवादों में चल रहा था.
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