जोहार लाइव ब्यूरो
महाराष्ट्र की राजनीति में हर दिन नए मोड़ आ रहे हैं. मगर इस बार कारक बना है झारखंड. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक एनसीपी शरद गुट और अजीत पवार गुट का विलय होने जा रहा है. इसकी रूपरेखा तय की जा रही है. फिलहाल जो संभावना बन रही है, उसके मुताबिक पार्टी के नेतृत्व की कमान स्व. अजीत पवार की पत्नी और वर्तमान में महाराष्ट्र की डिप्टी सीएम सुनेत्रा पवार के हाथ में होगी. सुनेत्रा पवार फिलहाल अजीत गुट का नेतृत्व कर रही है और पार्टी घड़ी छाप सिंबल के लिए कोर्ट में है.
बता दें, हाल ही में सुनेत्रा पवार के अध्यक्ष निर्वाचित होने को चुनौती दी गई थी. चुनौती देनेवाले कोई और नहीं, एनसीपी के झारखंड के प्रदेश अध्यक्ष और राष्ट्रीय समिति के सचिव सच्चिदानंद सिंह हैं. सूत्रों के मुताबिक अजीत गुट के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल इस वक्त देश से बाहर हैं. आगामी 21 जुलाई को नई दिल्ली पहुंच रहे हैं. इस दौरान एनसीपी दोनों गुट के नेता व सभी कार्यकारिणी सदस्य भी नई दिल्ली पहुंच रहे हैं. जिसके बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा.
बता दें, सच्चिदानंद सिंह भी अजीत गुट के हैं, बावजूद इसके उन्होंने अपने अध्यक्ष सुनेत्रा पवार के चयन को कानूनी चुनौती दी है. उनका कहना है कि बिना कार्यकारिणी के बैठक और मतदान के अध्यक्ष पद का चुनाव हो गया है. पार्टी संविधान के मुताबिक इसे कानूनी रूप देना आवश्यक है. वो ये भी कहते हैं कि अगर विलय होता भी है, तो अध्यक्ष का पद सुनेत्रा पवार के पास ही रहना चाहिए. मैंने तो बस चीजें संवैधानिक रूप से सही हो, इसके लिए पहल की है. ताकि कल को कोई दूसरा व्यक्ति, उनके चुनाव को चुनौती दे और ऐन वक्त पर हमें किसी बड़ी राजनीतिक घटनाक्रम का शिकार न होना पड़े. सूत्रों का ये भी दावा है कि यह मर्जर 26 जुलाई तक हो जाएगी.
ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर एनसीपी में पावर गेम की लड़ाई में झारखंड के एक नेता को हथियार क्यों बनाया गया है. मिली जानकारी के मुताबिक सच्चिदानंद सिंह पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं. वो झारखंड के प्रदेश अध्यक्ष और राष्ट्रीय सचिव हैं, ऐसे में पार्टी के अपने संविधान के मुताबिक राष्ट्रीय सचिव की ओर से चुनौती को सीधे तौर पर खारिज नहीं किया जा सकता. फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम के रचयिता प्रफुल्ल पटेल को माना जा रहा है.
सुनेत्रा पवार की तीन शर्तें
विलय की संभावनाओं के बीच सुनेत्रा पवार अध्यक्ष पद के साथ-साथ महाराष्ट्र में वित्त मंत्रालय, बेटे को केंद्र में जगह भी मांग रही है. ऐसे में झारखंड से अध्यक्ष पद को ही चुनौती दिलवा कर, उनसे मोल-तोल का मंच तैयार किया गया है. क्योंकि शरद गुट का कहना है कि जब सांसदों की संख्या हमारे पास अधिक है, शरद पवार ने ही पार्टी की स्थापना की है, तो ऐसे में अध्यक्ष पद उनके पास रहे.
अगर सुनेत्रा पवार अपनी तीन शर्तों में से किसी एक से पीछे हटती हैं, तभी उन्हें दुबारा अध्यक्ष बनाया जा सकता है. अगर वो तीनों पर अड़ी रहीं, वैसी स्थिति में फिलहाल पार्टी के संविधान के मुताबिक जो चूक हुई है, उससे उनके अध्यक्ष पद का जाना तय है.
बता दें, बीते 9 जुलाई को जारी नोटिस में सच्चिदानंद सिंह ने आरोप लगाया गया है कि सुनेत्रा पवार के चुनाव के दौरान पार्टी संविधान का उल्लंघन किया गया. सिंह का कहना है कि अजित पवार के निधन के बाद 17 फरवरी को हुई बैठक में यह तय हुआ था कि प्रफुल्ल पटेल अंतरिम राष्ट्रीय अध्यक्ष रहेंगे. लेकिन अगले ही दिन बिना संवैधानिक प्रक्रिया अपनाए नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया शुरू कर दी गई.
नोटिस में कहा गया है कि राष्ट्रीय अधिवेशन बुलाने और अध्यक्षीय चुनाव कराने का अधिकार केवल अधिकृत कार्यकारी अध्यक्ष को था, न कि महासचिव को.
सच्चिदानंद सिंह ने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान कई अनिवार्य संवैधानिक प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया, जिनमें स्वतंत्र केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण की नियुक्ति, चुनाव कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा, नामांकन आमंत्रित करना और मतदान की प्रक्रिया अपनाना शामिल है.
उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय सचिव होने के बावजूद उन्हें न तो अधिवेशन की औपचारिक सूचना दी गई और न ही चुनाव लड़ने या प्रक्रिया में भाग लेने का अवसर मिला. उनका दावा है कि उन्होंने अधिवेशन में उपस्थित होकर आपत्ति भी दर्ज कराई थी, लेकिन उसे नजरअंदाज कर दिया गया.
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