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    Home»जोहार ब्रेकिंग»13,681 पेड़ों की कटाई पर हाईकोर्ट सख्त, चतरा बाईपास सड़क निर्माण पर अंतरिम रोक
    जोहार ब्रेकिंग

    13,681 पेड़ों की कटाई पर हाईकोर्ट सख्त, चतरा बाईपास सड़क निर्माण पर अंतरिम रोक

    Muskan ChoudharyBy Muskan ChoudharySeptember 7, 2026No Comments4 Mins Read3
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    सड़क विकास के नाम पर हजारों पुराने पेड़ों की कटाई पर झारखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. चतरा शहर को NH-99 (न्यू NH-22) और NH-100 (न्यू NH-522) से जोड़ने वाली प्रस्तावित बाईपास सड़क के निर्माण पर कोर्ट ने फिलहाल अंतरिम रोक लगा दी है. वजह है इस सड़क के मौजूदा एलाइनमेंट में आने वाले 13,681 पूर्ण विकसित पेड़.

    जस्टिस आनंद सेन की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए अगले आदेश तक चिन्हित पेड़ों की कटाई पर रोक लगा दी है. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन हिस्सों में इन पेड़ों को काटना जरूरी होगा, वहां फिलहाल सड़क निर्माण भी नहीं किया जाएगा.

    क्या है पूरा मामला?

    दरअसल, बाईपास सड़क के मौजूदा एलाइनमेंट को बदलने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी. याचिकाकर्ता का कहना था कि अगर सड़क का मार्ग बदला जाता है, तो उसकी जमीन पर मौजूद करीब 300 पूर्ण विकसित पेड़ों को बचाया जा सकता है.

    इस पर हाईकोर्ट ने अधिकारियों को मौके का निरीक्षण कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था. कोर्ट ने पूछा था कि मौजूदा एलाइनमेंट में कितने पेड़ काटने पड़ेंगे और क्या सड़क के लिए कोई वैकल्पिक मार्ग तलाशा जा सकता है.

    अधिकारियों की रिपोर्ट में सामने आया कि मौजूदा मार्ग के निर्माण के लिए वन क्षेत्र समेत कुल 13,681 पेड़ों की कटाई करनी होगी. खास बात यह है कि अधिकारियों ने इन सभी पेड़ों को पूर्ण विकसित बताया है.

     ‘जंगल सिर्फ पेड़ों का नाम नहीं’

    इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई पर हाईकोर्ट ने गंभीर पर्यावरणीय चिंता जताई. कोर्ट ने कहा कि 13,681 पूर्ण विकसित पेड़ों की संख्या कोई छोटी संख्या नहीं है और इतनी बड़े पैमाने पर कटाई का पर्यावरण और पारिस्थितिकी पर गंभीर असर पड़ सकता है.

    कोर्ट ने कहा कि जंगल सिर्फ पेड़ों का नाम नहीं है. जंगल में जानवर, पक्षी, कीड़े-मकौड़े और दूसरे जीव-जंतु भी शामिल होते हैं.

    अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि पेड़ सिर्फ Canopy नहीं हैं, बल्कि पर्यावरण के ‘Lungs’ हैं. विकास के नाम पर इन्हें अंधाधुंध तरीके से काटने की अनुमति नहीं दी जा सकती.

    नए पौधे पुराने पेड़ों की भरपाई नहीं कर सकते

    कोर्ट ने क्षतिपूरक वनीकरण के जरिए नए पौधे लगाए जाने की दलील पर भी सवाल उठाया. अदालत ने कहा कि नए पौधे लगाने से मौजूदा जंगल और पर्यावरणीय तंत्र की तत्काल भरपाई नहीं हो सकती.

    पूर्ण विकसित पेड़ और जंगल बनने में कई दशक, बल्कि 100 साल से ज्यादा का समय लग सकता है. ऐसे में इस अवधि के दौरान होने वाला पर्यावरणीय नुकसान अपूरणीय हो सकता है.

    कोर्ट ने यह सवाल भी उठाया कि अगर सड़क की दूरी कुछ मील कम करने के लिए बड़े पैमाने पर जंगल, वनस्पति, जीव-जंतु और वन्यजीवों को नुकसान पहुंचता है, तो क्या ऐसा विकास वास्तव में उचित माना जा सकता है.

    MoEFCC और MoRTH भी होंगे मामले में पक्षकार

    2 सितंबर 2026 के पत्र में 13,681 पेड़ों की कटाई की जानकारी सामने आने के बाद हाईकोर्ट ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) को भी मामले में पक्षकार बनाने का निर्देश दिया है.

    अदालत ने संबंधित एजेंसियों को सड़क के मौजूदा एलाइनमेंट पर दोबारा विचार करने और जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक मार्ग तलाशने की छूट दी है.

    आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्यावरण बचाना जरूरी

    हाईकोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में साफ किया कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन जरूरी है. अदालत ने कहा कि मौजूदा पीढ़ी पर्यावरण की संरक्षक है और इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना उसकी जिम्मेदारी है.

    फिलहाल कोर्ट के अगले आदेश तक 13,681 चिन्हित पेड़ों की कटाई और उनसे जुड़े हिस्सों में सड़क निर्माण पर रोक रहेगी. अब निगाहें इस बात पर हैं कि संबंधित एजेंसियां चतरा बाईपास के लिए को ई वैकल्पिक एलाइनमेंट तलाशती हैं या नहीं.

     

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