New Delhi: नई दिल्ली में आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने हैदराबाद हाउस में द्विपक्षीय शिखर वार्ता के दौरान एक नई रणनीतिक रूपरेखा तैयार की है, जो दोनों देशों के संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाने वाली है।
मालूम हो कि, जून 2025 में कार्यभार संभालने के बाद राष्ट्रपति ली की यह पहली भारत यात्रा है और आठ वर्षों में दक्षिण कोरिया के किसी राष्ट्राध्यक्ष द्वारा की गई पहली ‘राज्य स्तरीय’ यात्रा होने के कारण इसका विशेष महत्व है। वार्ता के दौरान दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश, जहाज निर्माण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सेमीकंडक्टर और रक्षा उत्पादन जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा की, ताकि 2010 से लागू व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) को आधुनिक जरूरतों के अनुसार और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
इस महत्वपूर्ण मुलाकात में दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है, जो ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे कार्यक्रमों के लिए एक बड़ा बूस्टर साबित होगा। चर्चा के केंद्र में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करने का विषय भी प्रमुखता से रहा, और उम्मीद जताई जा रही है कि वार्ता के बाद होने वाले समझौते भारत-दक्षिण कोरिया की विशेष रणनीतिक साझेदारी को भविष्य के लिए और अधिक मजबूत बनाएंगे।
अपनी पत्नी किम हे-क्युंग के साथ भारत दौरे पर आए राष्ट्रपति ली का यह प्रवास दोनों देशों के बीच न केवल आर्थिक बल्कि गहरे सांस्कृतिक और मानवीय संबंधों को भी नई गति प्रदान कर रहा है।
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