मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने शुक्रवार को झारखंड मंत्रालय में उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के कामकाज की समीक्षा की. बैठक में उन्होंने अधिकारियों को अवैध शराब के निर्माण, बिक्री, परिवहन, भंडारण और तस्करी पर सख्ती से रोक लगाने का निर्देश दिया. मुख्यमंत्री ने कहा कि अवैध शराब का कारोबार सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने के साथ लोगों की जान और स्वास्थ्य के लिए भी बड़ा खतरा है. ऐसे कारोबार से जुड़े लोगों पर जल्द और प्रभावी कार्रवाई होनी चाहिए.
2025-26 में ₹4,013 करोड़ से ज्यादा राजस्व, 2026-27 का लक्ष्य ₹4,500 करोड़
समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में विभाग ने ₹3,885.11 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले ₹4,013.53 करोड़ का राजस्व जुटाया है. वहीं, चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में ₹4,500 करोड़ राजस्व संग्रह का लक्ष्य रखा गया है. जुलाई के मध्य तक विभाग ₹1,376 करोड़ राजस्व जुटा चुका है, जो सालाना लक्ष्य का 30.57 प्रतिशत है.
मुख्यमंत्री ने विभाग में खाली पड़े पदों को जल्द भरने का भी निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि JSSC के जरिए नियुक्ति प्रक्रिया में तेजी लाई जाए. बैठक में बताया गया कि चयनित 583 उत्पाद सिपाहियों को नियुक्ति पत्र देने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है. मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्याप्त कर्मचारियों के रहने से विभाग की निगरानी व्यवस्था मजबूत होगी और कामकाज में भी तेजी आएगी.
शराब ढोने वाले वाहनों पर GPS और डिजिटल लॉक
मुख्यमंत्री ने मदिरा परिवहन वाहनों में GPS ट्रैकिंग और डिजिटल लॉक लगाने का निर्देश दिया. इससे वाहनों की रियल टाइम निगरानी हो सकेगी और उनके रास्ते, ठहराव और गंतव्य की जानकारी आसानी से मिल सकेगी. उन्होंने कहा कि तकनीक के इस्तेमाल से पारदर्शिता बढ़ेगी और अवैध गतिविधियों पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी.
बैठक में राज्य में स्पिरिट की खपत और भविष्य की मांग का अध्ययन करने को भी कहा गया. इसके साथ ही विभिन्न तरह की मदिरा के विनिर्माण और औद्योगिक अल्कोहल के नियमन के लिए नीति बनाने का निर्देश दिया गया. लेवल रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को आसान बनाने पर भी जोर दिया गया.
मुख्यमंत्री ने विभिन्न जिलों में उत्पाद विभाग के गोदाम निर्माण में स्थानीय आदिवासी समुदाय को प्राथमिकता और सहयोग देने को कहा. उनका कहना है कि इससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी. बैठक में उत्पाद एवं मद्य निषेध मंत्री योगेंद्र प्रसाद समेत मुख्य सचिव अविनाश कुमार और विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे.

