Dhanbad : धनबाद के गोविंदपुर इलाके के एक छोटे से कमरे में बैठा एक छात्र आजकल सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। उसके हाथ में नोटों की गड्डियां हैं, आंखों में गुस्सा, दर्द और बेबसी झलक रही है। ये वही पैसे हैं, जिन्हें घरवालों ने उसकी बहन की शादी के लिए सालों से जोड़कर रखा था। लेकिन आज वही पैसे उसकी पढ़ाई बचाने की आखिरी उम्मीद बन गए हैं। यह युवक किसी बड़े मंच पर भाषण नहीं दे रहा है, न ही किसी आंदोलन का नेतृत्व कर रहा है। वह सिर्फ अपने मोबाइल कैमरे के सामने खड़ा होकर अपनी मजबूरी बता रहा है। उसकी आवाज में नाराजगी है, लेकिन उससे ज्यादा डर है… भविष्य खो देने का डर।
सपनों से बड़ी हो गई फीस
छोटे कस्बे और गांवों के हजारों युवाओं की तरह इस छात्र ने भी बेहतर भविष्य का सपना देखा था। परिवार की सीमित आमदनी के बावजूद उसने प्राइवेट कॉलेज (अल इकरा टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज, धनबाद) में दाखिला लिया, इस उम्मीद में कि सरकार की स्कॉलरशिप उसे सहारा देगी। लेकिन समय बीतता गया। सेमेस्टर बदलते गए। फीस बढ़ती गई। और स्कॉलरशिप का इंतजार लंबा होता चला गया। कॉलेज ने साफ कह दिया… “जब तक 1.50 लाख रुपये नहीं जमा करोगे, बोनाफाइड नहीं मिलेगा।” बोनाफाइड सर्टिफिकेट उसके लिए सिर्फ एक कागज नहीं था, बल्कि आगे की पढ़ाई, नौकरी और पहचान की चाबी था।
पढ़ाई की कीमत बहन की खुशियां
घर में सबसे ज्यादा खुशी बहन की शादी को लेकर थी। मां रोज उसकी पसंद की साड़ी के सपने देखती थी। पिता रिश्तेदारों से तारीख की बात कर रहे थे। घरवाले बेटी की शादी के लिए चुपचाप हर महीने पैसे जोड़ रहे थे। वही पैसा आज उसके हाथ में था। वह कहता है… “सच बताऊं, ये पैसे बहन की शादी के लिए थे… लेकिन अब पढ़ाई बचाने के लिए देना पड़ रहा है।”
मोबाइल कैमरे के सामने छलका दर्द
वीडियो में उसकी आवाज कई बार टूटती है। कहीं गुस्सा है, कहीं बेबसी। वह सरकार से सवाल करता है, कॉलेज से नाराज होता है और अपने हालात पर रो पड़ता है। उसका कहना है कि उसने बार-बार स्कॉलरशिप मांगी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अब मजबूरी में वह बहन की शादी के पैसे लेकर कॉलेज पहुंचा है। वीडियो के आखिर में वह चेतावनी भरे लहजे में बोलता है कि बोनाफाइड लेने के बाद भी स्कॉलरशिप नहीं मिली तो वह कॉलेज में ही कोई बड़ा कदम उठा लेगा।
“झारखंड सरकार, यह देखो। खुश हो ना! इतना चिल्लाकर स्कॉलरशिप मांगी। फिर भी आपने नहीं दिया। कॉलेजवालों ने बोल दिया कि जब तक 1.50 लाख फीस नहीं दोगे, तब तक बोनाफाइड नहीं करेंगे।…सच बताऊं यह पैसे बहन की शादी के लिए जमा किए थे।..” pic.twitter.com/Nuo4a1uOKF
— Arvind Sharma (@sarviind) February 1, 2026
सोशल मीडिया की अदालत
वीडियो वायरल होते ही सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। कुछ लोग उसके दर्द को समझ रहे हैं। उसे सिस्टम की मार झेलता एक आम छात्र बता रहे हैं। कुछ लोग उसे ड्रामा करने वाला कह रहे हैं। उनका कहना है कि प्राइवेट कॉलेज में पढ़ाई महंगी होती है, यह पहले से पता होता है।
सुमन जायसवाल नाम की यूजर ने लिखा कि छात्र को मजबूरी में बहन की शादी के पैसे पढ़ाई में लगाने पड़ रहे हैं, जो बेहद दुखद है। उन्होंने इसे सरकार की व्यवस्था पर सवाल बताया।

संत भारत नाम के यूजर ने लिखा कि प्राइवेट कॉलेज की अपनी फीस होती है और अगर कोई छात्र फीस नहीं दे सकता, तो उसे सरकारी कॉलेज में पढ़ाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि निजी कॉलेज धर्मशाला नहीं होते और उन्हें भी खर्च और वेतन देना पड़ता है।

दीपक कुमार नाम के यूजर ने भी कॉलेज का पक्ष लेते हुए कहा कि निजी कॉलेज में दाखिला तभी लेना चाहिए, जब छात्र आर्थिक रूप से सक्षम हो। उन्होंने कहा कि स्कॉलरशिप देना सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन वीडियो में छात्र नौटंकी करता नजर आ रहा है और उसके पास दो लाख रुपये से ज्यादा की राशि दिख रही है

कॉलेज प्रबंधन ने कही यह बात
इस पूरे मामले में अल इकरा टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज, धनबाद के सचिव डॉ एस खालिद का कहना है कि स्कॉलरशिप का मामला पूरी तरह से राज्य सरकार के पाले में है। बात रही फीस की तो कॉलेज में पढ़ने वाले छात्रों को फीस तो भरना ही चाहिये। अगर बच्चे फीस नहीं भरेंगे तो कॉलेज के टीचर और अन्य कर्मचारियों के वेतन पर ग्रहण लग जायेगा। वायरल वीडियो वाले छात्र को लेकर डॉ खालिद ने कहा कि अगर उसे बोनाफाइड लेने में दिक्कत हो रही थी तो, उसे हमारे पास आना चाहिये था। सलीके से अपनी समस्या बतानी चाहिये थी। यहां से जरूर कोई न कोई रास्ता निकल जाता। मगर, प्रबंधन के पास न आकर कालेज पर आरोप लगाते हुए गलत तथ्यों के साथ वीडियो बनाना और उसे वायरल करना बिल्कुल गलत है। पहले भी कॉलेज प्रबंधन कई छात्रों की मदद कर चुका है। डॉ एस खालिद ने कहा कि वीडियो बनाने वाला लड़का एक बलॉगर भी है। यह वीडियो के जरिये उसे लाखों व्यूज मिले हैं, जिससे उसे इनकम हो सकता है।
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