पेरिस में बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (BAPS) के नवनिर्मित मंदिर का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्चुअल उद्घाटन किए जाने के बाद फ्रांस की राजधानी में एक बड़ा विवाद छिड़ गया. संगठन के आध्यात्मिक प्रमुख महंत स्वामी महाराज और उनके करीब 100 अनुयायियों के प्रतिनिधिमंडल के Eiffel Tower (एफिल टावर) दौरे के बाद फ्रांस में लैंगिक समानता को लेकर हंगामा खड़ा हो गया है.
बीते 6 सितंबर 2026 को पेरिस में बने BAPS स्वामीनारायण मंदिर के उद्घाटन पर पीएम नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए इसे भारत-फ्रांस सांस्कृतिक संबंधों का “नया मील का पत्थर” बताया. उन्होंने भारतीय नक्काशी और फ्रांसीसी इंजीनियरिंग का अद्भुत मेल बताते हुए इसे “मेड इन इंडिया और बिल्ट इन फ्रांस“ कहा. पीएम ने संतों के संकल्पों और BAPS के सेवा भाव की जमकर सराहना की.
क्या है पूरा विवाद?
विवाद की शुरुआत तब हुई जब पेरिस के मशहूर स्मारकों में शामिल एफिल टावर के कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि BAPS प्रतिनिधिमंडल के दौरे के समय महिला कर्मचारियों को उनकी ड्यूटी से हटा दिया गया. ट्रेड यूनियन के प्रतिनिधियों का दावा है कि लिफ्ट ऑपरेटर समेत कई अहम जगहों पर तैनात महिला स्टाफ को पीछे हटने, कुछ रास्तों पर न जाने और प्रतिनिधिमंडल के सामने न आने के निर्देश दिए गए. कई जगहों पर महिला कर्मचारियों की जगह पुरुष कर्मचारियों को तैनात कर दिया गया, ताकि साधुओं का महिला स्टाफ से आमना-सामना न हो.
महिला कर्मचारियों ने बताया लैंगिक भेदभाव
महिला कर्मचारियों ने इस कदम को अपमानजनक और लैंगिक आधार पर भेदभावपूर्ण बताया. इसके विरोध में एफिल टावर के कर्मचारियों ने हड़ताल कर दी, जिसके चलते दुनिया भर से आने वाले पर्यटकों के लिए ऐतिहासिक स्मारक को बंद करना पड़ा.
एफिल टावर का संचालन करने वाली कंपनी SETE ने बाद में सार्वजनिक रूप से माना कि BAPS प्रतिनिधिमंडल की ओर से महिला स्टाफ के साथ बातचीत सीमित रखने का अनुरोध आया था. प्रबंधन ने स्वीकार किया कि इस प्रकार की शर्तों को मानना एक बड़ी गलती थी, क्योंकि यह फ्रांस में लैंगिक समानता के स्थापित सिद्धांतों के पूरी तरह खिलाफ है.
मामला गरमाने पर फ्रांस के राजनीतिक गलियारों में भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं. फ्रांसीसी नेताओं और पेरिस प्रशासन ने स्पष्ट किया कि फ्रांस के गणतंत्र में किसी भी धर्म या आस्था के नाम पर महिलाओं को अदृश्य करने या उनके अधिकारों को सीमित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती. पेरिस प्रशासन ने इस मामले की आधिकारिक जांच के आदेश दे दिए हैं.
BAPS ने मांगी माफी
चौतरफा विवाद और फ्रांस में बढ़े जनआक्रोश के बाद BAPS संगठन ने आधिकारिक बयान जारी कर माफी मांगी. संगठन ने सफाई दी कि दौरा बड़े समूह के प्रबंधन के तहत एफिल टावर की टीम से समन्वय करके आयोजित किया गया था और उनका इरादा किसी भी कर्मचारी को उसकी जेंडर की वजह से हटाने या आहत करने का नहीं था. वहीं भारत के विदेश मंत्रालय ने इस विवाद से खुद को अलग रखते हुए इसे एफिल टावर प्रबंधन और संबंधित संस्था के बीच का स्थानीय मामला करार दिया है.
Also Read : प्रधानमंत्री मोदी की सुरक्षा में चूक, फर्जी PMO ID के साथ युवक गिरफ्तार

