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    Home»Uncategorized»भूमि अधिग्रहण के खिलाफ CPIM ने फूंका बिगुल, विशाल प्रदर्शन का किया ऐलान
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    भूमि अधिग्रहण के खिलाफ CPIM ने फूंका बिगुल, विशाल प्रदर्शन का किया ऐलान

    Team JoharBy Team JoharApril 29, 2026Updated:April 29, 2026No Comments3 Mins Read4
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    Dumkla : संताल परगना के जनजातीय क्षेत्रों में कॉरपोरेट और राज्य के गठजोड़ द्वारा किए जा रहे भूमि अधिग्रहण और संवैधानिक अधिकारों के दमन के खिलाफ सीपीआईएम ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। पार्टी के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने प्रभावित गांवों का दौरा करने के बाद प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं और मई के तीसरे सप्ताह में दुमका आयुक्त कार्यालय के घेराव की घोषणा की है।

    सीपीआईएम राज्य सचिव प्रकाश विप्लव के नेतृत्व में दौरे पर गई टीम में राज्य सचिव मंडल सदस्य सुरजीत सिन्हा, राज्य कमेटी सदस्य सुभाष हेम्ब्रम, अमल आज़ाद और जिला सचिव देवी सिंह पहाड़िया शामिल थे। टीम ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि संथाल परगना के गांवों में संवैधानिक ढांचों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

    संवैधानिक कानूनों का उल्लंघन

    प्रतिनिधिमंडल ने पाया कि जिला प्रशासन और एमडीओ (MDO) स्थानीय दलालों के साथ मिलकर वनाधिकार अधिनियम (FRA), पेसा (PESA) और संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम (SPT Act) का खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन कर रहे हैं। बिना ग्राम सभा की अनुमति के जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जो पूरी तरह से असंवैधानिक और अवैध है। इसके अलावा, पीवीटीजी (PVTG) समूहों के लंबित वनाधिकार दावों का निपटारा किए बिना उन्हें जबरन विस्थापित करने की तैयारी की जा रही है।

    ग्राम सभाओं की अनदेखी और जनता में आक्रोश

    सीपीआईएम का आरोप है कि प्रशासन ने पेसा कानून के तहत ग्राम सभाओं की सर्वोच्चता को पूरी तरह दरकिनार कर दिया है। ग्रामीणों को डराने और धमकाने के लिए दबाव की राजनीति की जा रही है। इस दमन के खिलाफ ग्रामीणों ने भी कमर कस ली है।
    आगामी रणनीति और आंदोलन की रूपरेखा

    सीपीआईएम ने स्थानीय ग्रामीणों के साथ मिलकर आंदोलन की नई रणनीति तैयार की है:

    प्रभावित गांवों के ग्रामीणों ने स्थानीय प्रधानों को 10 दिनों के भीतर औपचारिक ग्राम सभा बुलाने का अल्टीमेटम दिया है, ताकि वन अधिकार समिति का गठन और नए दावों का पंजीकरण हो सके। ग्राम सभा में लिए गए सभी निर्णयों और प्रस्तावों के दस्तावेजों को राज्यपाल, भारत के राष्ट्रपति और उच्च न्यायालय को साक्ष्य के रूप में भेजा जाएगा। एक विशेष उपसमिति का गठन किया गया है, जो ग्राम सभाओं को सशक्त बनाने और कानूनी लड़ाई पर नजर रखेगी। मई 2026 के तीसरे सप्ताह में दुमका आयुक्त कार्यालय के समक्ष एक विशाल प्रदर्शन किया जाएगा। इस प्रदर्शन की अंतिम रणनीति 10 मई को होने वाली जिला कमेटी की बैठक में तय की जाएगी।

    अस्तित्व की रक्षा का जन-आंदोलन

    पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि आदिवासियों को उनकी पैतृक जमीन से बेदखल करने की साजिश को किसी भी सूरत में सफल नहीं होने दिया जाएगा। प्रकाश विप्लव ने कहा कि यह सिर्फ एक कानूनी लड़ाई नहीं है, बल्कि आदिवासियों के अस्तित्व को बचाने का जन-आंदोलन है। उन्होंने दो टूक कहा कि जब तक अंतिम व्यक्ति का वनाधिकार सुरक्षित नहीं होता, एमडीओ का एक भी पहिया आगे नहीं बढ़ने दिया जाएगा।

    Also Read : गैंगस्टर प्रिंस खान पर शिकंजा, करीबी गुर्गा मेजर 3 दिन की पुलिस रिमांड पर

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