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    Home»ट्रेंडिंग»झारखंड हाईकोर्ट: अधिकारियों ने नहीं लिया ज्यादा HRA, महालेखाकार की रिपोर्ट में सॉफ्टवेयर की चूक
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    झारखंड हाईकोर्ट: अधिकारियों ने नहीं लिया ज्यादा HRA, महालेखाकार की रिपोर्ट में सॉफ्टवेयर की चूक

    Team JoharBy Team JoharApril 29, 2026No Comments3 Mins Read1
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    Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट के अधिकारियों द्वारा निर्धारित सीमा से अधिक मकान किराया भत्ता (HRA) लेने का मामला केवल एक तकनीकी चूक साबित हुआ है। महालेखाकार (AG) द्वारा सरकार को भेजी गई जांच रिपोर्ट में जिन अधिकारियों पर निर्धारित सीमा से अधिक भत्ता लेने का आरोप लगाया गया था, वह असल में सॉफ्टवेयर की गणना में हुई गलती का परिणाम है। जांच में यह स्पष्ट हो गया है कि अधिकारियों ने नियमों का कोई उल्लंघन नहीं किया है।

    क्या है पूरा मामला

    महालेखाकार की रिपोर्ट में हाईकोर्ट की कोर्ट मैनेजर मनीषा दत्ता और असिस्टेंट रजिस्ट्रार नूतन कुमारी द्वारा निर्धारित 20% की सीमा से अधिक HRA लेने का उल्लेख किया गया था। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि मनीषा दत्ता ने 88.57% और नूतन कुमारी ने 75% HRA लिया है।

    सॉफ्टवेयर की गलती से गलत आंकड़ा सामने आया

    मामले की विस्तृत जांच में पाया गया कि यह विसंगति उस सॉफ्टवेयर के कारण उत्पन्न हुई, जिसका इस्तेमाल महालेखाकार कार्यालय ने जांच के लिए किया था। वेतन भत्ता नियमावली के अनुसार, कोई भी कर्मचारी जब चाइल्ड केयर लीव (CCL) पर होता है, तो उसे उस अवधि के लिए आनुपातिक मूल वेतन मिलता है। हालांकि, इस दौरान उन्हें आवास भत्ता (HRA) का लाभ उनके पूरे मूल वेतन के आधार पर दिया जाता है।

    गलत गणना कैसे हुई

    जांच में सामने आया कि सॉफ्टवेयर ने HRA की गणना करते समय वास्तविक बेसिक पे (जो कि नियमानुसार मान्य है) को आधार न मानकर, उस महीने के आनुपातिक बेसिक पे (जो छुट्टी के कारण कम था) को आधार मान लिया।

    उदाहरण के तौर पर: कोर्ट मैनेजर मनीषा दत्ता का वास्तविक मूल वेतन 83,600 रुपये है। मार्च 2025 में वे चाइल्ड केयर लीव पर थीं, इसलिए उस महीने उनका आनुपातिक बेसिक 18,877 रुपये था। सॉफ्टवेयर ने 18,877 रुपये के आधार पर HRA की तुलना की, जिससे प्रतिशत अधिक दिखाई देने लगा। इसी प्रकार, असिस्टेंट रजिस्ट्रार नूतन कुमारी का वास्तविक मूल वेतन 99,500 रुपये है, लेकिन सॉफ्टवेयर ने सितंबर 2025 में उनके आनुपातिक बेसिक 26,533 रुपये को आधार मानकर गणना कर दी, जिससे HRA निर्धारित सीमा से अधिक नजर आने लगा।

    यह स्पष्ट है कि अधिकारियों ने पूरी तरह से वेतन भत्ता नियमावली का पालन किया है। महालेखाकार की रिपोर्ट में जो विसंगति दिखाई गई, वह केवल सॉफ्टवेयर की तकनीकी त्रुटि थी, न कि किसी अधिकारी द्वारा वित्तीय नियमों का उल्लंघन। अधिकारियों का कहना है कि उनकी ओर से कोई भी वित्तीय अनियमितता नहीं की गई है।

    Also Read : रांची में कराटे का महासंग्राम, पहली बार भारतीय सेना के जवान दिखाएंगे दम

     

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