Johar Live Desk : केंद्र सरकार के Budget 2026 को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने कड़ा हमला बोला है। पार्टी का आरोप है कि यह बजट आम जनता को राहत देने के बजाय उन्हें और बोझ देने वाला है। RJD ने सवाल उठाया है कि जब देश के स्कूल, अस्पताल और किसान उपेक्षित रहेंगे, तो ‘विकसित भारत’ का सपना कैसे साकार होगा।
मध्यम वर्ग को मिली सिर्फ झुनझुना
RJD प्रवक्ता शक्ति यादव ने बुधवार, 4 फरवरी 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि इनकम टैक्स स्लैब में एक रुपये की भी राहत नहीं दी गई, जबकि शेयर बाजार में निवेश करने वालों पर STT बढ़ाकर अतिरिक्त बोझ डाला गया। उनका कहना है कि बजट के तुरंत बाद सेंसेक्स में लगभग 2800 अंकों की गिरावट इसी असंतोष का संकेत है।
किसान विरोधी रवैया
RJD ने बजट में किसानों के लिए ठोस योजनाओं की कमी को सबसे बड़ा मुद्दा बताया। शक्ति यादव ने कहा कि यह देश के इतिहास का पहला ऐसा बजट है, जिसमें जानवरों के लिए योजनाएं तो हैं, लेकिन अन्नदाता किसान के लिए कोई रोडमैप नहीं। एमएसपी, खाद की कीमतों और खेतिहर मजदूरों के सवालों पर सरकार की चुप्पी को उन्होंने किसान विरोधी रवैया बताया।
जनता से वसूली, पूंजीपतियों को छूट
RJD प्रवक्ता ने कहा कि आज सरकारी खजाने में आम जनता का योगदान 36% है, जबकि कॉरपोरेट जगत का योगदान सिर्फ 18%। पहले दोनों लगभग बराबर थे। उनका आरोप है कि सरकार ने आम जनता को निचोड़कर अपने ‘सूट-बूट वाले दोस्तों’ को राहत दी है।
शिक्षा और स्वास्थ्य पर खर्च बेहद कम
RJD ने कोठारी आयोग का जिक्र करते हुए कहा कि आयोग ने 60 साल पहले शिक्षा पर GDP का 6% खर्च करने की सिफारिश की थी, लेकिन आज शिक्षा बजट 3% से कम है और स्वास्थ्य पर खर्च 2% के आसपास अटका हुआ है। पार्टी का सवाल है कि जब स्कूल और अस्पताल बदहाल हैं, तो देश का भविष्य कैसे सुरक्षित होगा।
शहरी विकास और रोजगार पर भी सवाल
RJD ने शहरी विकास बजट में 11.6% की कटौती और प्रदूषण नियंत्रण के लिए आवंटित राशि के इस्तेमाल न होने पर भी सवाल उठाए। साथ ही, उन्होंने कहा कि बेरोजगारी देश की सबसे बड़ी समस्या है, लेकिन बजट में रोजगार सृजन का कोई ठोस प्लान नहीं दिखता।
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