पूर्व मानव संसाधन विकास मंत्री मुरली मनोहर जोशी ने गुरुवार को बल प्रयोग की आलोचना करते हुए कहा कि छात्रों की मांगों को सहानुभूति के साथ सुना जाना चाहिए.
21वें फिक्की उच्च शिक्षा शिखर सम्मेलन में पत्रकारों से बात करते हुए जोशी ने कहा कि “छात्र हमारे बच्चे हैं.”
भाजपा नेता ने दिल्ली में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच कहा, “छात्रों की उचित या जायज मांगों को हमेशा सुना जाना चाहिए और उन्हें बहुत अधिक सहानुभूति के साथ सुना जाना चाहिए. लाठियों का इस्तेमाल करने का यह तरीका उचित नहीं है. आप इस तरह कभी कोई समाधान नहीं निकाल सकते. अगर कोई समस्या है, तो उनकी बात सुनिए. वे हमारे बच्चे हैं.”
उन्होंने कहा, “जब कोई बच्चा अपने पिता से शिकायत करता है कि आपने मुझसे वादा किया था कि आप मुझे फलां चीज दिलाएंगे, तो पिता उसे यह बताते हैं कि वह अपना वादा क्यों पूरा नहीं कर पाए और आश्वासन देते हैं कि वह जल्द ही ऐसा करेंगे… या फिर क्या वह बच्चे को भगा देते हैं? इसी तरह छात्रों को भी हमारे बच्चों की तरह समझा जाना चाहिए और उनके साथ उसी तरह व्यवहार किया जाना चाहिए.”
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) पर पद्म विभूषण से सम्मानित जोशी ने कहा कि इसके प्रभाव का आकलन करना अभी जल्दबाजी होगी.
उन्होंने आगे कहा कि NEP को लागू हुए ज्यादा समय नहीं हुआ है और इसका क्रियान्वयन अभी भी जारी है.
दो महीने पहले भी NEET प्रश्नपत्र लीक होने के बाद व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बीच जोशी ने इसी तरह की चिंता व्यक्त की थी. बाद में तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी उठी थी.
उस समय जोशी ने कहा था, “यह देखकर दुख होता है कि देश के विभिन्न हिस्सों से आए युवा छात्र कई दिनों से नई दिल्ली की सड़कों पर बैठे हुए हैं. परीक्षा प्रणाली को लेकर उनकी चिंताएं और आशंकाएं वास्तविक हैं और उन्हें सहानुभूति तथा स्थायी समाधान खोजने की इच्छा के साथ संभाला जाना चाहिए.”
जोशी ने यह भी आग्रह किया था कि इन विरोध प्रदर्शनों को केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा मानकर बल प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए. उन्होंने युवा छात्राओं के साथ किए गए कथित बर्बर व्यवहार पर भी चिंता व्यक्त की थी.
उन्होंने कहा था, “बल का इस तरह इस्तेमाल भारतीय समाज के बड़े वर्ग को विकसित भारत के राष्ट्रीय लक्ष्य से दूर कर देगा.”
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