बिहार में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है. राज्य के 14 जिलों के 85 प्रखंडों की 533 ग्राम पंचायतों में करीब 44 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं. कई प्रमुख नदियां अलग-अलग स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं. प्रशासन की ओर से राहत और बचाव का काम लगातार जारी है.
केंद्रीय जल आयोग से मिली जानकारी के मुताबिक, 8 सितंबर को भागलपुर के सुल्तानगंज में गंगा का जलस्तर 36.80 मीटर दर्ज किया गया. यह 17 अगस्त 2021 को दर्ज किए गए पिछले उच्चतम बाढ़ स्तर 36.75 मीटर से 5 सेंटीमीटर ज्यादा है. हालांकि, यहां जलस्तर में गिरावट का रुझान है.
गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, गंगा, पुनपुन, बागमती और घाघरा समेत कई नदियां अलग-अलग जगहों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं. अगले दो दिनों में राज्य के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश और एक-दो स्थानों पर भारी बारिश की संभावना भी जताई गई है.
राहत के लिए 1,046 सामुदायिक रसोई
बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए राज्य में 1,046 सामुदायिक रसोई केंद्र चलाए जा रहे हैं. इन केंद्रों के जरिए अब तक करीब 38.89 लाख लोगों को भोजन कराया जा चुका है. इसके अलावा 15 राहत शिविर भी संचालित किए जा रहे हैं, जहां 11,255 बाढ़ पीड़ितों के लिए रहने, भोजन और चिकित्सा की व्यवस्था की गई है.
लोगों की आवाजाही और राहत-बचाव के लिए 1,942 नावें लगाई गई हैं. अब तक करीब 2.59 लाख पॉलिथीन शीट और 41,700 ड्राई राशन पैकेट बांटे गए हैं. पशुओं के लिए 6,692 क्विंटल पशुचारा भी वितरित किया गया है.
एक दिन में तेजी से बढ़ाई गई राहत व्यवस्था
बीते 9 सितंबर को राज्य में 793 सामुदायिक रसोई चल रही थीं, जिनकी संख्या 10 सितंबर को बढ़कर 1,046 हो गई. इसी दौरान ड्राई राशन पैकेट का वितरण 29,437 से बढ़कर 41,659 और पॉलिथीन शीट का वितरण 1,99,814 से बढ़कर 2,59,069 हो गया.
चिकित्सा शिविरों की संख्या भी एक दिन में 557 से बढ़कर 812 हो गई है. संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए SDRF की 27 और NDRF की 10 टीमें अलग-अलग जिलों में तैनात की गई हैं. प्रशासन का कहना है कि स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है.
Also Read : बिहार पर मंडराया बाढ़ का खतरा, नेपाल में तबाही के बाद सीमावर्ती जिलों में हाई अलर्ट

