नेपाल के रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी में आई अचानक बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है. नेपाल में गांव, सड़कें, पुल और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट बाढ़ की चपेट में आए हैं. इस घटना के बाद अब बिहार में भी बाढ़ का खतरा बढ़ गया है. नेपाल से आने वाले पानी को देखते हुए बिहार के कई सीमावर्ती जिलों में प्रशासन को अलर्ट कर दिया गया है.
बिहार के आठ जिलों में हाई अलर्ट
नेपाल में भारी जलप्रवाह के बाद बिहार के पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर, वैशाली, सीतामढ़ी और शिवहर को हाई अलर्ट पर रखा गया है. प्रशासन को नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखने और संवेदनशील इलाकों में जरूरी तैयारी करने के निर्देश दिए गए हैं.
खास चिंता गंडक नदी को लेकर है. आशंका है कि नेपाल से अचानक बड़ी मात्रा में पानी आने पर गंडक में करीब तीन मीटर तक ऊंची फ्लैश फ्लड वेव आ सकती है. इसके अलावा कोसी और बागमती नदी के कैचमेंट एरिया में भी लगातार निगरानी की जा रही है.
नेपाल में भोटेकोशी नदी ने मचाई तबाही
नेपाल के तिब्बत सीमा से सटे रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने के बाद हालात बिगड़ गए. टिमुरे और स्याफ्रुबेसी समेत कई इलाकों में बाढ़ का पानी और मलबा घुस गया. सड़कें और पुल बह जाने से कई इलाकों का संपर्क टूट गया है. नेपाल-चीन सीमा के पास रासुवागढ़ी इलाके में भी भारी नुकसान हुआ है. कई वाहन और बुनियादी ढांचे बाढ़ की चपेट में आए हैं. अब तक कम से कम आठ लोगों के शव बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है, जबकि कई लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं.
लापता लोगों में सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं. रिपोर्टों के मुताबिक नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के 33 जवानों के लापता होने की जानकारी सामने आई है. बाढ़ प्रभावित इलाकों में नेपाल सेना और सुरक्षा बलों की टीमें राहत और बचाव अभियान में जुटी हैं. लापता लोगों की तलाश की जा रही है. हालांकि खराब मौसम, लगातार बारिश और जगह-जगह जमा मलबे के कारण राहत अभियान में मुश्किलें आ रही हैं. कई स्थानों तक सड़क संपर्क टूट जाने के कारण हेलीकॉप्टर के जरिए भी रेस्क्यू की कोशिश की जा रही है.
पिछले साल भी हुई थी ऐसी तबाही
रसुवा में इस तरह की घटना पहली बार नहीं है. जुलाई 2025 में भी इसी इलाके में तिब्बत ग्लेशियल झील फटने के बाद भीषण बाढ़ आई थी. अब लगातार दूसरे साल ऐसी घटना सामने आने से हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर और ग्लेशियल झीलों से जुड़े बढ़ते खतरे को लेकर चिंता बढ़ गई है.
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