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    Home»जोहार ब्रेकिंग»झारखंड : MMDR बिल पर रघुवर दास ने सरकार को घेरा, कहा- ओडिशा 7,000 करोड़ कमा रहा, झारखंड क्यों पीछे?
    जोहार ब्रेकिंग

    झारखंड : MMDR बिल पर रघुवर दास ने सरकार को घेरा, कहा- ओडिशा 7,000 करोड़ कमा रहा, झारखंड क्यों पीछे?

    Muskan ChoudharyBy Muskan ChoudharyAugust 26, 2026No Comments5 Mins Read1
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    raghuwar das
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    रांची : झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर हेमंत सोरेन सरकार और जेएमएम-कांग्रेस-राजद गठबंधन पर जमकर हमला बोला. उन्होंने कोयला, बालू और पत्थर के कथित अवैध कारोबार को लेकर सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए. रघुवर दास ने कहा कि झारखंड में अवैध खनन की वजह से सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है. इसका असर खनन वाले इलाकों के विकास पर भी पड़ रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में कोयला, बालू और पत्थर का सिंडिकेट चल रहा है.

    उन्होंने कहा कि जिस झारखंड में कभी जल, जंगल और जमीन की लड़ाई की बात होती थी, आज उसे लूट का अड्डा बना दिया गया है. रघुवर दास ने दावा किया कि जेएमएम और कांग्रेस से जुड़े कई नेता बालू और कोयले की दलाली के मामलों में जेल जा चुके हैं.

     MMDR कानून को बताया झारखंड के लिए फायदेमंद

    रघुवर दास ने केंद्र सरकार के MMDR संशोधन कानून को झारखंड के हित में बताया. उन्होंने कहा कि इस कानून से राज्य में वैध खनन को बढ़ावा मिलेगा और अवैध खनन पर रोक लगाने में मदद मिलेगी. उन्होंने आरोप लगाया कि अवैध खनन से जुड़े लोगों को इस कानून से परेशानी हो रही है, इसलिए इसका विरोध किया जा रहा है. उनके मुताबिक, कानून लागू होने से अवैध खनन के कथित सिंडिकेट पर लगाम लग सकती है.

    11 हजार करोड़ के सेस पर सरकार से सवाल

    रघुवर दास ने झारखंड सरकार के 11 हजार करोड़ रुपये के सेस को लेकर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि सरकार केंद्र पर सवाल उठा रही है, लेकिन खनन से मिलने वाले दूसरे राजस्व और फंड का इस्तेमाल कैसे हो रहा है, इसका जवाब भी सरकार को देना चाहिए. उन्होंने कहा कि खनन से मिलने वाले टैक्स और वैधानिक भुगतान का बड़ा हिस्सा राज्यों को मिलता है और यह राजस्व झारखंड को आगे भी मिलता रहेगा. इसके अलावा डीएमएफटी फंड के जरिए भी खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए पैसा मिलता है.

    ओडिशा का उदाहरण देकर पूछा- झारखंड पीछे क्यों?

    रघुवर दास ने पड़ोसी राज्य ओडिशा का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां खनन क्षेत्र से करीब 7 हजार करोड़ रुपये का राजस्व हासिल हुआ है. उन्होंने कहा कि झारखंड भी खनिज संपदा से भरपूर राज्य है. ऐसे में सवाल उठता है कि झारखंड ओडिशा से पीछे क्यों है. उन्होंने सरकार से पूछा कि अगर राज्य के पास इतने खनिज संसाधन हैं, तो उनसे ज्यादा राजस्व क्यों नहीं जुटाया जा रहा है.

    30 कोल ब्लॉक में सिर्फ 4 चालू होने का दावा

    पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि केंद्र से मंजूरी मिलने के बाद करीब 30 कोल माइनिंग ब्लॉक अब तक कंपनियों को उपलब्ध नहीं कराए गए हैं. उनके मुताबिक, इनमें से सिर्फ 4 कोल ब्लॉक ही चालू हो पाए हैं. उन्होंने कहा कि अगर सरकार को खनन से राजस्व बढ़ाना है, तो लंबित कोल ब्लॉकों को जल्द शुरू कराने की दिशा में काम करना चाहिए.

    रघुवर दास ने डीएमएफटी फंड को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए. उन्होंने दावा किया कि धनबाद, हजारीबाग, रामगढ़, पाकुड़ समेत कई जिलों में 6 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की डीएमएफटी राशि अब तक खर्च नहीं हो पाई है. उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी रकम उपलब्ध होने के बावजूद खनन प्रभावित इलाकों के लोगों को इसका पूरा फायदा नहीं मिल रहा है. उन्होंने डीएमएफटी फंड के इस्तेमाल में कथित गड़बड़ी का भी आरोप लगाया.

    कोयला उत्पादन घटने का दावा

    रघुवर दास ने झारखंड में कोयला उत्पादन के आंकड़ों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि 2024 में करीब 44 मिलियन टन कोयला उत्पादन हुआ था, जो 2025-26 में घटकर करीब 37 मिलियन टन रह गया. उन्होंने दावा किया कि सेस और अवैध खनन की वजह से कोयला कारोबार पर असर पड़ा है. उनका कहना है कि सेस के कारण झारखंड का कोयला और लोहा महंगा हुआ है, जिससे इसकी मांग भी प्रभावित हुई है.

    संथाल में साफ पानी को लेकर भी सवाल

    रघुवर दास ने संथाल परगना में पेयजल की स्थिति को लेकर भी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के क्षेत्र में भी लोगों को शुद्ध पेयजल नहीं मिल पा रहा है. उन्होंने सवाल किया कि करीब छह साल के शासन में आखिर कितने आदिवासी और मूलवासी परिवारों की स्थिति में वास्तविक सुधार हुआ है.

    रघुवर दास ने हेमंत सरकार के निवेश संबंधी दावों पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने देश-विदेश में रोड शो कर बड़े निवेश के दावे किए, लेकिन झारखंड में उसका असर जमीन पर दिखाई नहीं दे रहा है. उन्होंने जेएमएम और कांग्रेस से कहा कि सरकार को जनता को गुमराह करने के बजाय खनन, राजस्व, डीएमएफटी फंड, कोयला उत्पादन और निवेश जैसे मुद्दों पर जवाब देना चाहिए. रघुवर दास ने एक बार फिर कहा कि MMDR संशोधन कानून झारखंड के हित में है. उनके मुताबिक, इससे वैध खनन को बढ़ावा मिलेगा और अवैध खनन पर रोक लगाने में मदद मिलेगी.

    Also Read : रांची सदर अस्पताल में मीडिया की नो-एंट्री पर बाबूलाल मरांडी का हमला, कहा- लोकतंत्र में सवालों पर रोक क्यों?

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