नेपाल में भीषण बाढ़ और भूस्खलन के कारण हालात गंभीर बने हुए हैं. राष्ट्रीय विपद् जोखिम न्यूनीकरण तथा व्यवस्थापन प्राधिकरण (NDRRMA) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, आपदा में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 1,385 हो चुकी है, जबकि 5,130 नागरिक अब भी लापता हैं. जमीन से लेकर आसमान तक चलाए जा रहे व्यापक बचाव अभियान के तहत राहत टीमों ने अब तक 13,676 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया है.
वर्तमान में विभिन्न 19 अस्पतालों में 337 घायलों का उपचार जारी है, जबकि प्राथमिक उपचार के बाद 261 लोगों को छुट्टी दी जा चुकी है.
जमीन और आसमान से महा-रेस्क्यू ऑपरेशन
राहत एवं बचाव कार्य को गति देने के लिए प्रभावित इलाकों में 21,022 सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है, जिनमें नेपाली सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल (APF) के जवान शामिल हैं. दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए बड़े पैमाने पर एयरलिफ्ट अभियान चलाया जा रहा है. अब तक नेपाली सेना 1,407 और सशस्त्र पुलिस बल 299 हवाई उड़ानें संचालित कर चुके हैं.
राहत शिविरों में हजारों विस्थापित
आपदा प्रभावित लोगों को ठहराने के लिए अस्थायी होल्डिंग सेंटर बनाए गए हैं, जहां वर्तमान में हजारों लोग शरण लिए हुए हैं:
नुवाकोट: 2,615 लोग
रसुवा: 775 लोग
धादिंग: 295 लोग
लापता लोगों के आंकड़ों का चल रहा सत्यापन
NDRRMA के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि 5,130 लापता लोगों की सूची में ऐसे अज्ञात शव भी शामिल हो सकते हैं जिनकी पहचान अभी बाकी है. साथ ही, संभावना है कि सुरक्षित निकाले गए कुछ लोगों के नाम भी शुरुआती अफरा-तफरी में इस सूची में दर्ज रह गए हों. आंकड़ों के सटीक मिलान के तहत अब तक पहचान हो चुके 104 शवों को लापता सूची से हटा दिया गया है. प्रभावित विदेशी नागरिकों, अस्पताल में भर्ती मरीजों और एयरलिफ्ट किए गए लोगों का पूरा विवरण आधिकारिक वेबसाइट व सोशल मीडिया पर लगातार साझा किया जा रहा है.
करोड़ों की वित्तीय मदद और बुनियादी ढांचे की बहाली
नेपाल सरकार ने त्वरित राहत कार्यों के लिए प्रभावित इलाकों में कुल 13.50 करोड़ रुपये की राहत राशि जारी की है. इसमें से रसुवा और नुवाकोट को 1-1 करोड़ रुपये तथा धादिंग जिले को 50 लाख रुपये की नकद सहायता तुरंत उपलब्ध कराई गई है.
बाढ़ से तबाह हुए संपर्क मार्गों को बहाल करने के लिए युद्धस्तर पर काम जारी है. इसी क्रम में नुवाकोट के देवीघाट पर ‘एक्रो ब्रिज’ (Acrow Bridge) स्थापित कर यातायात के लिए चालू कर दिया गया है, जिससे खाद्य व गैर-खाद्य सामग्री की आपूर्ति तेज हो गई है. राहत वितरण और पुनर्वास कार्यों में सरकारी तंत्र के साथ-साथ निजी क्षेत्र, विकास साझेदार और नागरिक समाज की संस्थाएं भी जुटी हुई हैं.
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