Ranchi : झारखंड राज्य आकलन प्रशिक्षित सहायक अध्यापक संघर्ष मोर्चा ने अपने आंदोलन को लेकर पूरी ताकत झोंक दी है। राज्य कमेटी के निर्देश पर सभी प्रखंडों में बैठकों का दौर चल रहा है, हालांकि कई जगह बैठक नहीं हो सकी है। अब तक करीब 20 विधायकों को ही मांग पत्र सौंपा जा सका है, बाकी विधायकों को जल्द ज्ञापन देने के निर्देश दिए गए हैं।
14 अप्रैल को जिला बैठक, 18 से अनिश्चितकालीन अनशन
संघर्ष मोर्चा ने साफ कर दिया है कि 14 अप्रैल को सभी जिलों में बैठक कर अंतिम रणनीति तय की जाएगी। इसके बाद 18 अप्रैल से मुख्यमंत्री आवास के सामने अनिश्चितकालीन धरना और आमरण अनशन शुरू होगा। शिक्षकों का कहना है कि अगर 19 अप्रैल तक सरकार के साथ कोई सम्मानजनक समझौता नहीं होता है, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
बड़े स्तर पर भागीदारी की तैयारी
आंदोलन को सफल बनाने के लिए बड़े पैमाने पर भागीदारी की योजना बनाई गई है। 18 और 19 अप्रैल को हर प्रखंड से 5 और हर जिले से कम से कम 20 नेतृत्वकारी सदस्य अनशन में बैठेंगे। इसके बाद 20 और 21 अप्रैल को सभी सहायक शिक्षक दो दिन का आकस्मिक अवकाश लेकर धरना स्थल पहुंचेंगे। जरूरत पड़ने पर आगे भी हर प्रखंड और जिला से शिक्षकों की भागीदारी जारी रहेगी।
धरना स्थल के लिए संसाधन जुटाने की अपील
संघर्ष मोर्चा ने धरना स्थल पर जरूरी सुविधाएं जुटाने के लिए भी तैयारी शुरू कर दी है। दरी, पंडाल, कूलर, साउंड सिस्टम और रोशनी की व्यवस्था के लिए फंड इकट्ठा किया जा रहा है। हर प्रखंड से 2000 रुपये और हर जिले से 5000 रुपये देने का निर्देश दिया गया है। साथ ही महिला शिक्षकों के लिए पानी, शौचालय और रुकने की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है।
मांगें पूरी नहीं होने से बढ़ा आक्रोश
शिक्षकों का कहना है कि सरकार ने पहले हुए समझौते के बावजूद अब तक उनकी मांगों पर कोई ठोस फैसला नहीं लिया है। खासकर आकलन परीक्षा को टेट के बराबर मान्यता देने और वेतनमान को लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है। करीब 40 हजार सहायक शिक्षक इस मुद्दे पर एकजुट हो गए हैं और अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं।
ये हैं प्रमुख मांगें
- आकलन परीक्षा को टेट के समकक्ष मान्यता मिले
- प्रस्तावित टेट परीक्षा में सहायक शिक्षकों के लिए अलग कटऑफ तय हो
- क्षेत्रीय भाषाओं को शामिल किया जाए
- समान काम के बदले समान वेतन लागू हो
- सेवानिवृत्ति की उम्र 62 वर्ष की जाए
सरकार से वार्ता नहीं हुई तो और तेज होगा आंदोलन
संघर्ष मोर्चा ने साफ कहा है कि अगर एक सप्ताह के अंदर सरकार बातचीत नहीं करती है, तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा।
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