विजय उरांव
असम की छह समुदायों को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा देने की मांग लंबे समय से चल रही है. मामला अब एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन तस्वीर अभी भी पूरी तरह साफ नहीं है. केंद्र सरकार ने राज्यसभा में बताया है कि ताई अहोम, मोरान, मटक, चुटिया, कोच-राजबोंगशी और टी ट्राइब्स को ST सूची में शामिल करने का प्रस्ताव उसे मिल चुका है. लेकिन साथ ही सरकार ने यह भी कहा कि उसे हाल में असम सरकार की ओर से Group of Ministers (GoM) की रिपोर्ट नहीं मिली है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर इन छह समुदायों को ST दर्जा देने की प्रक्रिया अभी कहां तक पहुंची है?
राज्यसभा में केंद्र ने क्या कहा?
जनजातीय कार्य राज्य मंत्री दुर्गादास उइके ने 29 जुलाई 2026 को राज्यसभा में सांसद बीरेंद्र प्रसाद बैश्य के सवाल के जवाब में यह जानकारी दी.
सरकार ने माना कि असम सरकार की ओर से इन छह समुदायों को ST सूची में शामिल करने का प्रस्ताव प्राप्त हुआ है. लेकिन जब हाल में असम कैबिनेट से मंजूर बताई जा रही GoM रिपोर्ट के बारे में सवाल पूछा गया, तो केंद्र ने कहा कि ऐसी कोई हालिया रिपोर्ट उसके मंत्रालय को प्राप्त नहीं हुई है.
यानी एक तरफ प्रस्ताव केंद्र के पास है, लेकिन दूसरी तरफ GoM रिपोर्ट को लेकर केंद्र और राज्य के बीच स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है.
GoM आखिर है क्या?
GoM यानी Group of Ministers, यानी मंत्रियों का समूह. सरकार जब किसी बड़े, जटिल या संवेदनशील मुद्दे पर विस्तार से विचार करना चाहती है, तो अलग-अलग मंत्रालयों के मंत्रियों का एक समूह बनाया जा सकता है. यह समूह मामले के अलग-अलग पहलुओं पर विचार करके अपनी रिपोर्ट या सिफारिश देता है.
असम में छह समुदायों को ST दर्जा देने के मामले में भी GoM की रिपोर्ट को महत्वपूर्ण माना जा रहा है. असम कैबिनेट द्वारा इस रिपोर्ट को मंजूरी दिए जाने की बात सामने आई थी. लेकिन केंद्र सरकार का कहना है कि हाल में ऐसी रिपोर्ट उसके पास नहीं पहुंची है.
अब सवाल यह है कि राज्य सरकार द्वारा मंजूर रिपोर्ट केंद्र को कब और किस रूप में भेजी गई या भेजी जानी है.
ST दर्जा देने का फैसला इतना आसान क्यों नहीं?
किसी समुदाय को ST सूची में शामिल करना सिर्फ सरकार की घोषणा से संभव नहीं है. इसके लिए केंद्र सरकार ने एक तय प्रक्रिया बनाई है. इस प्रक्रिया में Registrar General of India (RGI) और National Commission for Scheduled Tribes (NCST) की भूमिका बेहद अहम है. जिसमें RGI यानी Registrar General of India प्रस्ताव की जांच करता है. आसान भाषा में समझें तो यहां यह देखा जाता है कि संबंधित समुदाय के ST दर्जे के दावे और उससे जुड़े तथ्य निर्धारित मानकों के आधार पर सही बैठते हैं या नहीं.
NCST यानी National Commission for Scheduled Tribes एक संवैधानिक आयोग है. यह अनुसूचित जनजातियों के अधिकारों और हितों से जुड़े मामलों को देखता है. ST सूची में किसी समुदाय को शामिल करने के प्रस्ताव पर इसकी सहमति भी जरूरी प्रक्रिया का हिस्सा है.
केंद्र सरकार के मुताबिक, पहले संबंधित राज्य सरकार प्रस्ताव भेजती है. इसके बाद प्रस्ताव की जांच तय प्रक्रिया के तहत RGI और फिर NCST के स्तर पर होती है. आवश्यक सहमति मिलने के बाद ही ST सूची में बदलाव के लिए आगे की कानूनी और विधायी प्रक्रिया शुरू हो सकती है.
यानी राज्य सरकार की सिफारिश पहला कदम है, आखिरी फैसला नहीं.
छह समुदायों की मांग कितनी पुरानी है?
असम के ताई अहोम, मोरान, मटक, चुटिया, कोच-राजबोंगशी और टी ट्राइब्स समुदाय लंबे समय से ST दर्जे की मांग करते रहे हैं. इन समुदायों का कहना है कि ST दर्जा मिलने से उन्हें अनुसूचित जनजातियों के लिए उपलब्ध संवैधानिक अधिकारों, आरक्षण और सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सकेगा.
वहीं, इस मांग को लेकर असम में पहले से ST सूची में शामिल समुदायों के बीच भी अपनी हिस्सेदारी और अधिकारों को लेकर चिंताएं सामने आती रही हैं. इसलिए यह मामला सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील है.
अभी मामला कहां पहुंचा?
केंद्र सरकार के ताजा जवाब से इतना साफ है कि असम सरकार का प्रस्ताव केंद्र के पास है, लेकिन छह समुदायों को ST सूची में शामिल करने की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है.
केंद्र ने यह भी स्पष्ट नहीं किया है कि इस प्रस्ताव पर RGI और NCST की अंतिम सहमति मिल चुकी है या नहीं. वहीं, GoM की हालिया रिपोर्ट केंद्र को नहीं मिलने की बात भी सामने आई है.
अब नजर इस बात पर है कि GoM की रिपोर्ट केंद्र तक कब पहुंचती है, RGI और NCST प्रस्ताव पर क्या फैसला लेते हैं और सरकार इस लंबे समय से चले आ रहे मुद्दे को लेकर आगे क्या कदम उठाती है.
फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि असम की इन छह समुदायों की ST दर्जे की मांग पर एक और कदम आगे बढ़ा है, लेकिन मंजिल अभी बाकी है.
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