जोहार लाइव ब्यूरो
भारतीय वायुसेना प्रमुख की विदाई के लिए आयोजित होने वाला गोल्फ का कार्यक्रम अप्रत्याशित रूप से अटक गया है. शनिवार 31 अक्टूबर को सेवानिवृत्त होने जा रहे एयर चीफ मार्शल एपी सिंह को एयर फोर्स स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में गोल्फ खेलकर विदाई दी जानी थी. यह गोल्फ कोर्स लोक कल्याण मार्ग पर स्थित है और प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास से कुछ ही दूरी पर है. लेकिन सोमवार से यह कोर्स बंद है और अगले आदेश तक बंद ही रहेगा.
प्रधानमंत्री आवास के आसपास के हाई-सिक्योरिटी क्षेत्र में केंद्र सरकार ने सरकारी जमीन वापस लेने की मुहिम तेज कर दी है. इसी के तहत गोल्फ कोर्स परिसर का सर्वेक्षण करने की योजना है. केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के अधीन लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस (L&DO) लुटियंस दिल्ली में सरकारी जमीन का प्रबंधन करता है. इस अभियान की अगुवाई भी यही कार्यालय कर रहा है.
परंपरा के अनुसार, वायुसेना प्रमुख इस गोल्फ कोर्स के मुख्य संरक्षक होते हैं. लेकिन अब उनकी विदाई के लिए प्रस्तावित गोल्फ कार्यक्रम अधर में लटक गया है. अभी यह स्पष्ट नहीं है कि सर्वेक्षण कौन करेगा, उसका उद्देश्य क्या होगा और गोल्फ खिलाड़ियों को दोबारा खेलने की अनुमति कब मिलेगी, या मिलेगी भी या नहीं.
कांग्रेस ने अपमानित करने का लगाया आरोप
अब पूरे मामले पर कांग्रेस ने केंद्र सरकार को आड़ो हाथे लिया है. पार्टी के प्रवक्ता और सांसद पवन खेड़ा ने एक्स पर लिखा, क्या राष्ट्रीय हित में असहज सवाल उठाने के लिए भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह को दंडित करने का यह बीजेपी सरकार का तरीका है?
उन्होंने लिखा, 30 सितंबर 2024 को पदभार संभालने के बाद से उन्होंने भारत की रक्षा तैयारियों और वायुसेना से जुड़े सरकार के रणनीतिक एवं परिचालन संबंधी कमियों पर बार-बार चिंता जताई है. उन्होंने जिन प्रमुख मुद्दों को उठाया है, उनमें चीन के मुकाबले भारत की बढ़ती क्षमता संबंधी खाई, सरकार के वादों और जमीनी हकीकत के बीच अंतर, स्वदेशी रक्षा उत्पादन में देरी, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता पर सवाल, भारतीय वायुसेना की क्षमताओं में गंभीर कमियां, रक्षा अनुसंधान एवं विकास की खामियां, रक्षा क्षेत्र में कुशल प्रतिभाओं की कमी जैसे सामरिक रूप से अहम मुद्दे शामिल हैं.
पवन खेड़ा ने सवाल उठाया कि अगर एक सम्मानित एयर चीफ मार्शल भारत की रक्षा तैयारियों को लेकर जायज चिंताएं उठाते हैं, तो क्या सच बोलने के लिए उन्हें दंडित किया जाना चाहिए, या सरकार को उन चिंताओं पर कार्रवाई करनी चाहिए? क्या कोई देश अपने नायकों का सम्मान इसी तरह करता है?
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