मुस्कान चौधरी
रांची : क्रिकेट के मैदान पर बड़े खिलाड़ियों के सामने अपनी प्रतिभा साबित करने का मौका हर युवा खिलाड़ी को नहीं मिलता. लेकिन रांची के 24 वर्षीय तेज गेंदबाज राजनदीप सिंह ने इस मौके को अपने लिए यादगार बना दिया. भारत और वेस्टइंडीज के बीच दूसरे टी-20 मुकाबले से पहले जेएससीए इंटरनेशनल स्टेडियम में भारतीय टीम के प्रैक्टिस सेशन के दौरान राजनदीप ने नेट्स में अपनी गेंदबाजी से टीम इंडिया के बल्लेबाजों को प्रभावित किया. संजू सैमसन से लेकर ईशान किशन तक ने उनकी गेंदबाजी की तारीफ की. कभी आर्थिक तंगी के कारण क्रिकेट छोड़ने की नौबत झेल चुके राजनदीप अब आईपीएल फ्रेंचाइजियों के रडार पर हैं.
नेट्स में गेंदबाजी, टीम इंडिया के बल्लेबाजों को किया प्रभावित
भारतीय टीम के अभ्यास सत्र में राजनदीप को ईशान किशन, संजू सैमसन, तिलक वर्मा, शिवम दुबे, नमन ओझा और युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी जैसे खिलाड़ियों के सामने गेंदबाजी करने का मौका मिला. राजनदीप ने करीब 7-8 ओवर गेंदबाजी की. इस दौरान उन्होंने लाइन और लेंथ पर नियंत्रण रखते हुए बल्लेबाजों को चुनौती दी. कई मौकों पर उनकी गेंदों ने बल्लेबाजों को चकमा दिया और बाहरी किनारा लेने पर मजबूर किया.
राजनदीप के प्रदर्शन से प्रभावित होकर संजू सैमसन ने कहा,
“बहुत अच्छा एरिया पकड़ा है तुमने.”
वहीं, ईशान किशन ने भी उनकी गेंदबाजी की तारीफ करते हुए कहा
“मुश्ताक अली ट्रॉफी के समय तुम्हें देखा था. इम्प्रूव कर रहे हो, काफी अच्छा कर रहे हो.”
इन तारीफों ने राजनदीप के लिए इस अभ्यास सत्र को और खास बना दिया. उनके लिए यह सिर्फ बड़े खिलाड़ियों के सामने गेंदबाजी करने का मौका नहीं था, बल्कि अपने खेल में सुधार की दिशा समझने का भी अनुभव था.
राजनदीप ने पीटीआई से बातचीत में बताया कि सीनियर खिलाड़ियों के सामने गेंदबाजी करके उन्हें अपनी कमियों और सुधार के पहलुओं को समझने का मौका मिला. उन्होंने कहा कि इस स्तर पर बल्लेबाजों के सामने जरा भी ढीली गेंद डालने की गुंजाइश नहीं होती. सीनियर खिलाड़ियों से मिली प्रतिक्रिया उनके लिए काफी अहम रही.
चुटिया के रहने वाले है राजनदीप
रांची के चुटिया में रहने वाले राजनदीप सिंह के पिता का नाम कुलवंत सिंह और मां का नाम सुरेंद्र कौर है. वह परिवार के बड़े बेटे हैं. उनके पिता पंजाब के जालंधर में स्कूल बस चलाते हैं. परिवार की आर्थिक स्थिति हमेशा मजबूत नहीं रही, लेकिन राजनदीप ने क्रिकेटर बनने का सपना नहीं छोड़ा.
राजनदीप के मामा जमशेदपुर में रहते थे. उन्हीं के बुलावे पर उनके पिता रोजगार की तलाश में रांची आए थे. यहीं राजनदीप ने क्रिकेट में अपना भविष्य तलाशना शुरू किया. क्रिकेट पर पूरा ध्यान देने के लिए उन्होंने 12वीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी.
साल 2016 में परिवार आर्थिक तंगी से गुजर रहा था. हालात ऐसे बन गए थे कि राजनदीप को क्रिकेट छोड़ने तक का विचार करना पड़ा. लेकिन उन्होंने एक साल का समय मांगा और झारखंड की अंडर-16 टीम में जगह बनाकर अपनी प्रतिभा साबित की.
इसके बाद परिवार में दादी के निधन और आर्थिक परेशानियों के कारण घरवालों को वापस जालंधर लौटना पड़ा. हालांकि, राजनदीप ने अपने क्रिकेट के सपने को पूरा करने के लिए झारखंड में ही रुकने का फैसला किया. मुश्किलों के बीच जारी उनकी मेहनत अब रंग लाती दिख रही है. जानकारी के मुताबिक, दो से तीन आईपीएल फ्रेंचाइजियों ने उन्हें ट्रायल के लिए बुलाया है.
सीके नायडू ट्रॉफी में 400 रन की ऐतिहासिक पारी
राजनदीप की पहचान सिर्फ तेज गेंदबाज के तौर पर नहीं है. वह बल्ले से भी बड़े स्कोर बनाने की क्षमता रखते हैं. सीके नायडू ट्रॉफी में मेघालय के खिलाफ उन्होंने 387 गेंदों पर नाबाद 400 रन की शानदार पारी खेली थी. इस पारी ने क्रिकेट स्काउट्स का ध्यान उनकी ओर खींचा.
वह झारखंड की अंडर-16, अंडर-19 और अंडर-23 टीमों के लिए भी खेल चुके हैं. अंडर-23 स्तर पर उन्होंने कप्तानी की जिम्मेदारी भी संभाली. इसके अलावा सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में भी झारखंड का प्रतिनिधित्व किया. ईशान किशन की कप्तानी में खिताब जीतने वाली झारखंड टीम का हिस्सा रहते हुए उन्होंने गेंद और बल्ले, दोनों से योगदान दिया.
पंजाब के खिलाफ 235 रन के लक्ष्य वाले मुकाबले में राजनदीप ने चार ओवर में 30 रन देकर एक विकेट लिया था. सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के उस अभियान में उन्होंने आठ मैचों में पांच विकेट लिए. बल्लेबाजी में सात पारियों में 40 की औसत और 186 से अधिक के स्ट्राइक रेट से 200 रन बनाए. झारखंड प्रीमियर लीग में भी उन्होंने आठ मैचों में आठ विकेट हासिल किए.
धोनी को मानते हैं आदर्श, ईशान किशन से मिलता है मार्गदर्शन
राजनदीप सिंह भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को अपना सबसे बड़ा आदर्श मानते हैं. उनका मानना है कि दबाव में मैच की स्थिति को समझना और उसके मुताबिक फैसला लेना धोनी से सीखने वाली अहम बातों में शामिल है.
वहीं, झारखंड के कप्तान ईशान किशन को वह अपना मार्गदर्शक मानते हैं. नेट्स में ईशान की ओर से मिली तारीफ उनके लिए इसलिए भी खास रही, क्योंकि ईशान उन्हें सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के दौरान खेलते हुए देख चुके हैं और अब उनके खेल में सुधार को भी महसूस कर रहे हैं.
रांची के मैदान पर टीम इंडिया के सितारों के सामने गेंदबाजी करने का यह मौका राजनदीप के करियर में एक अहम अनुभव बन गया है. कभी आर्थिक तंगी के कारण क्रिकेट छोड़ने की नौबत झेलने वाले इस युवा खिलाड़ी की नजर अब बड़े मंच पर अपनी पहचान बनाने पर है. आईपीएल ट्रायल का मौका और भारतीय टीम के खिलाड़ियों से मिली सराहना उनके सफर का अगला कदम साबित हो सकती है.

