कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने शनिवार को देश की मौजूदा चुनावी प्रक्रिया पर बड़ा सवाल उठाते हुए लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं को भंग कर नए सिरे से चुनाव कराने की मांग की. उन्होंने कहा कि देश में हुए चुनाव “अवैध” हैं और इसी आधार पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तथा सभी राज्यों के मुख्यमंत्री भी “अवैध” हैं. खड़गे ने नए चुनाव बैलेट पेपर से कराने की मांग की.
कर्नाटक के कलबुर्गी में पत्रकारों से बातचीत में खड़गे ने कहा कि देश में मौजूदा सरकारें जिन चुनावों के जरिए सत्ता में आई हैं, उनकी चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं. उन्होंने कहा कि सरकारों को भंग किया जाना चाहिए और नए चुनाव कराए जाने चाहिए. खड़गे ने EVM के कथित दुरुपयोग और मतदाता सूची में चल रहे SIR में अनियमितताओं का भी आरोप लगाया.
SIR को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल
खड़गे का यह बयान ऐसे समय आया है जब कांग्रेस समेत विपक्षी दल चुनाव आयोग की ओर से चलाए जा रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR का विरोध कर रहे हैं. खड़गे ने आरोप लगाया कि SIR के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने और जोड़ने की प्रक्रिया में गड़बड़ियां हो रही हैं. उनका कहना था कि अगर किसी मतदान केंद्र से बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटा दिए जाएं तो ऐसे चुनाव को स्वतंत्र और निष्पक्ष कैसे माना जा सकता है.
चुनाव आयोग के मुताबिक SIR का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई पात्र भारतीय नागरिक मतदाता सूची से बाहर न रहे और कोई अपात्र व्यक्ति सूची में शामिल न हो. आयोग ने SIR को संविधान के अनुच्छेद 324 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की संबंधित धाराओं के तहत संचालित प्रक्रिया बताया है.
SIR को लेकर विवाद केवल राजनीतिक आरोपों तक सीमित नहीं है. चुनाव आयोग के कामकाज और SIR से जुड़े मामलों को लेकर न्यायिक चुनौती भी सामने आई है. बिहार में SIR के अधिकार और प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मामला पहुंचा था. 27 मई 2026 के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने SIR से जुड़े अधिकार, उद्देश्य, प्रक्रिया और मतदाता सूची में शामिल होने की पात्रता से संबंधित सवालों पर विचार किया था.
चुनाव आयोग के दो आयुक्तों की आपत्तियों का भी जिक्र
खड़गे ने चुनाव आयोग के भीतर SIR और आयोग के फैसलों को लेकर कथित मतभेदों का भी उल्लेख किया. उन्होंने द इंडियन एक्सप्रेस की उस रिपोर्ट का हवाला दिया जिसमें कहा गया था कि चुनाव आयोग के दो सदस्यों ने पिछले महीनों में मुख्य चुनाव आयुक्त के समक्ष कई बार लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं.

रिपोर्ट के मुताबिक, इन आपत्तियों में मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और बहाल करने की प्रक्रिया तथा चुनाव आयोग के IT सिस्टम समेत कई मुद्दे शामिल थे. खड़गे ने कहा कि आयोग के भीतर उठाई गई इन आपत्तियों पर भी ध्यान नहीं दिया गया.
2023 के कानून पर भी खड़गे का निशाना
खड़गे ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति और उन्हें मिली कानूनी सुरक्षा से जुड़े 2023 के कानून को भी अपने आरोपों का आधार बनाया. मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव कमीशनर एक्ट, 2023 में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए सेलेक्शन कमिटी का प्रावधान है. कानून में प्रधानमंत्री, केंद्रीय कैबिनेट मंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता को इस समिति का सदस्य बनाया गया है. पहले की व्यवस्था को लेकर सुप्रीम कोर्ट के मार्च 2023 के फैसले में मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और भारत के मुख्य न्यायाधीश वाली समिति का निर्देश दिया गया था. बाद में संसद ने 2023 का कानून बनाया.
खड़गे ने इसी बदलाव पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार ने नियुक्ति प्रक्रिया में मुख्य न्यायाधीश को हटाकर एक केंद्रीय मंत्री को शामिल किया. उनके मुताबिक इससे चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर सवाल खड़ा होता है.
उन्होंने 2023 के कानून में चुनाव आयुक्तों को दी गई कानूनी सुरक्षा का भी विरोध किया. इस कानून की धारा 16 में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों को उनके आधिकारिक कार्यों के संबंध में संरक्षण का प्रावधान है.
खड़गे ने आरोप लगाया कि इसी कानूनी व्यवस्था के कारण चुनाव आयोग के अधिकारियों के खिलाफ उनके आधिकारिक कामकाज को लेकर कार्रवाई करना मुश्किल हो गया है.
बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग
खड़गे ने EVM को लेकर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों का दुरुपयोग किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे पर देशभर में आंदोलन जारी रखेगा.
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि अगर मौजूदा चुनावी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं तो लोकसभा और विधानसभाओं को भंग कर नए चुनाव कराए जाने चाहिए. उन्होंने इन चुनावों को EVM के बजाय बैलेट पेपर से कराने की मांग की.
खड़गे के मुताबिक विपक्षी दलों ने 30 सितंबर को हुई बैठक में SIR और चुनावी प्रक्रिया को लेकर आगे आंदोलन करने पर चर्चा की थी. उन्होंने कहा कि युवाओं, मजदूरों, गरीबों और अन्य मतदाताओं के मतदान अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर कांग्रेस और उसके सहयोगी दल देशभर में लोगों को जागरूक करेंगे.
खड़गे ने कहा कि INDIA ब्लॉक की ओर से चुनावी प्रक्रिया और SIR को लेकर आंदोलन आगे भी जारी रहेगा. उन्होंने बताया कि दिल्ली में 6 अक्टूबर को प्रदर्शन प्रस्तावित है. राज्यों में भी इसी तरह के कार्यक्रम किए जाएंगे. विपक्षी दल SIR से जुड़े मामलों की सुप्रीम कोर्ट में जल्द सुनवाई की मांग भी कर रहे हैं.
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