जोहार लाइव ब्यूरो
रांची रेलवे स्टेशन के बाहर से अपहृत चार वर्षीय नाबालिग मामले में रांची पुलिस का एक्शन ने बच्चे को बिकने से बचा लिया है. रांची पुलिस की टीम ने साहिबगंज पुलिस की मदद से नाबालिग को तीन पहाड़ के इलाके से सुरक्षित रेस्क्यू किया है. बच्चे को सकुशल बरामद करने के बाद रांची पुलिस की टीम को यह भी पता चला कि यह गिरोह बच्चे को अपहृत करने के बाद पैसों के लिए बेच देते है. इसके बाद बच्चे खरीदने वाला गिरोह उस बच्चे को मोबाइल चोरी समेत अन्य जुर्म की दुनिया मे धकेल देते है. यह गिरोह हमेशा अपहृत हुए बच्चे को उसके राज्य से हटाकर किसी दूर अन्य राज्य में बच्चे से जुर्म करवाते है, ताकि उसका पहचान भी गुम हो जाता है.
पुलिस के अनुसार, अपहरण के पीछे महज बच्चे को अगवा करना नहीं, बल्कि उसे मोटी रकम में बेचने और आगे चलकर मोबाइल चोरी जैसे अपराधों की ट्रेनिंग देने की कथित साजिश थी. इस खुलासे ने मामले को सामान्य अपहरण से आगे एक सुनियोजित आपराधिक नेटवर्क की ओर संकेत करने वाला बना दिया है. इसकी पुष्टि रांची के एसएसपी राकेश रंजन ने की. उन्होंने कहा कि नाबालिग अपनी मां के साथ स्टेशन के बाहर मौजूद था. इसी दौरान मां के कुछ देर के लिए हटते ही आरोपियों ने कथित रूप से बच्चे को वहां से अपहृत कर लिया था.
जीआरपी और आरपीएफ एक दूसरे पर फेंकने लगे मामला
पुलिस के अनुसार बच्चे के अचानक गायब होने के बाद परिजनों में अफरा-तफरी मच गई. मामले की गंभीरता को देखते हुए नाबालिग की माँ जीआरपी और आरपीएफ के पास भागती रही. लेकिन फिर जब पीड़िता चुटिया थाना पहुंची तो मामले की गंभीरता देखते हुए तत्काल रांची पुलिस ने जांच शुरू की और तकनीकी तथा अन्य सुरागों के आधार पर संदिग्धों तक पहुंचने का प्रयास किया.
जांच के दौरान पुलिस को बच्चे को साहिबगंज के तीनपहाड़ इलाके में ले जाए जाने की जानकारी मिली. इसके बाद टीम ने कार्रवाई करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस का दावा है कि पूछताछ में बच्चे को बेचने तथा उसे मोबाइल चोरी के लिए प्रशिक्षित करने की योजना सामने आई है. हालांकि, इस साजिश में और कौन-कौन लोग शामिल थे और बच्चे को किसे सौंपने की तैयारी थी, इसकी जांच अभी जारी है.
पुलिस ने इन अपराधियों को पकड़ा कार्रवाई करते
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान छोटू नोनिया (25), पिता राजू नोनिया, निवासी बाबूपुर, थाना तीनपहाड़; कयूम अंसारी (18), पिता इशराफिल अंसारी, निवासी नया टोला पाकुड़, थाना हाटपाड़ा; बिट्टू कुमार सिंह (20), पिता स्व. राम प्रताप सिंह, निवासी बाबूपाड़ा, थाना तीनपहाड़; तस्वीर शेख (45), पिता स्व. अजीम शेख, निवासी तीनपहाड़ नीचे टोला, थाना तीनपहाड़; और जमेदार शेख (41), पिता सातार शेख, निवासी नया बाजार राजमहल, थाना राजमहल, जिला साहिबगंज के रूप में हुई है।
अपहरण के पीछे बच्चों को अपराध में धकेलने का आरोप
मामले का सबसे गंभीर पहलू पुलिस द्वारा सामने लाई गई कथित योजना है. पुलिस के अनुसार, बच्चे को आर्थिक लाभ के लिए बेचने के साथ-साथ उसे मोबाइल चोरी जैसे अपराधों में इस्तेमाल करने की योजना बनाई गई थी. यदि जांच में यह बात पुष्ट होती है, तो मामला केवल फिरौती या अवैध रूप से बच्चे को बेचने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि नाबालिग को अपराध की दुनिया में धकेलने की कोशिश का भी गंभीर मामला बनेगा. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों ने बच्चे को कहां रखने की योजना बनाई थी, उसके खरीदार कौन थे और इस पूरे नेटवर्क में अन्य लोगों की क्या भूमिका थी. साथ ही, आरोपियों के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड और उनके बीच संपर्कों की भी जांच की जा रही है.
परिवार ने ली राहत की सांस और पुलिस को किया धन्यवाद
4 वर्षीय नाबालिग की बरामदगी के बाद परिवार ने राहत की सांस ली है. परिवार के लोगों ने रांची पुलिस को धन्यवाद दिया है. वहीं, इस घटना ने रेलवे स्टेशन और उसके आसपास छोटे बच्चों की सुरक्षा तथा संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं. पुलिस की आगे की जांच से ही यह स्पष्ट होगा कि अपहरण की साजिश की जड़ें कितनी गहरी थीं और इसके पीछे किसी बड़े गिरोह की भूमिका थी या नहीं.
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