बिहार की राजधानी पटना में मंगलवार 8 सितंबर को आरक्षण के मुद्दे पर जमकर हंगामा हुआ. ‘आरक्षण बढ़ाओ, संविधान बचाओ’ के नारे लगाते हुए बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी गांधी मैदान से बिहार लोक भवन की ओर मार्च करने निकले थे. जेपी गोलंबर के पास पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक दिया. इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड पार करने की कोशिश की, जिस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की हुई. पुलिस ने कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया.
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, प्रदर्शनकारी बिहार में एससी, एसटी, ओबीसी और ईबीसी के लिए 65 फीसदी आरक्षण लागू करने की मांग कर रहे हैं. इसके साथ ही निजी क्षेत्र और न्यायपालिका में भी आरक्षण लागू करने, कॉलेजियम व्यवस्था खत्म करने और आरक्षण से जुड़े कानूनों को संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग उठाई गई है.
बिहार में जातीय सर्वे के बाद राज्य सरकार ने 2023 में एससी, एसटी, ओबीसी और ईबीसी के आरक्षण में बढ़ोतरी करते हुए कुल आरक्षण को 65 फीसदी कर दिया था. लेकिन इस फैसले को पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी गई. हाईकोर्ट ने जून 2024 में आरक्षण की बढ़ी हुई सीमा को रद्द कर दिया. इसके बाद 65 फीसदी आरक्षण का मुद्दा लगातार राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बना हुआ है.
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बिहार में सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों की आबादी को देखते हुए उन्हें सरकारी नौकरियों और शिक्षा में ज्यादा प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए. इसी मांग को लेकर मंगलवार को पटना की सड़कों पर प्रदर्शन हुआ.
न्यायपालिका और निजी क्षेत्र में भी आरक्षण की मांग
प्रदर्शनकारियों की मांग केवल बिहार में 65 फीसदी आरक्षण लागू करने तक सीमित नहीं है. वे न्यायपालिका और निजी क्षेत्र में भी एससी-एसटी आरक्षण की मांग कर रहे हैं. साथ ही कॉलेजियम व्यवस्था को खत्म करने और आरक्षण से जुड़े प्रावधानों को संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग भी उठाई गई.
प्रदर्शन को देखते हुए पटना पुलिस ने गांधी मैदान से लेकर जेपी गोलंबर और डाकबंगला चौराहे तक सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे. डाकबंगला चौराहे पर करीब 400 पुलिसकर्मियों के साथ 23 थानेदार और 9 एएसपी-डीएसपी स्तर के अधिकारियों की तैनाती की गई थी.
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