जोहार लाइव ब्यूरो
झारखंड में जेपीएससी व जेएसएससी के आयोजित परीक्षाओं में अब तक 25 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी हैं. राज्य के हाईप्रोफाइल परीक्षा अनियमितता जांच की पूरी कार्रवाई राज्य की जांच एजेंसी सीआईडी के द्वारा की जा रही है. केस में जेएसएससी के तत्कालीन चेयरमैन एल. ख्यांग्ते की गिरफ्तारी हो चुकी है. तीनों तत्कालीन सदस्यों की भूमिका की भी जांच हो रही है.
लेकिन सीआईडी की कार्रवाईयों के बीच सवाल भी सीआईडी पर उठ रहे हैं. राज्य की मुख्य विपक्षी दल लगातार सरकार पर सीआईडी के बजाय सीबीआई की जांच की मांग पर अड़ी है, वहीं छात्रों का यकीन भी सीआईडी पर नहीं बन पा रहा. लेकिन बीते 20 जुलाई से घटनाक्रमों के पन्नों को पलटें तो कहा जा सकता है सीआईडी की इंट्री जेपीएसससी परीक्षाओं की अनियमितता के केस में नहीं होती तो जेएसएससी सीजीएल परीक्षा में पेपरलीक व अनियमितता का मामला उभर कर सामने नहीं आ पाता.
सीआईडी ने सीजीएल केस में पूर्व के अनुसंधान में भी मास्टरमाइंड अनीश, रेलवे के इंजीनियर विनय शाह, गोरखपुर के शशिभूषण दिक्षित उर्फ संदीप त्रिपाठी समेत राज्य पुलिस की आईआरबी के जवानों समेत दर्जनों की गिरफ्तारी की थी. पेपर लीक की आशंकाओं पर हो रही जांच के दौरान बड़े सिंडिकेट का खुलासा हुआ था, जिसने अभ्यर्थियों को नेपाल ले जाकर प्रश्नपत्र रटवाए थे. इस गिरोह के साथ नेपाल जाने वाले 28 अभ्यर्थियों को सीआईडी की रिपोर्ट के आधार पर डिबार कर दिया गया था. जिसे आधार मानते हुए हाईकोर्ट ने भी सीजीएल परीक्षा परिणाम निकालने का आदेश दिया था.
जेपीएससी परीक्षाओं के अनियमितता के केस की जांच सीआईडी ने शुरू की तो प्रारंभिक जांच के तथ्यों के आधार पर सबसे पहले 23 जुलाई को टीडीपीएल कंपनी के डायरेक्टर रामवीर सिंह, कंपनी के मार्केटिंग मैनेजर रहे अभय तिवारी जो बाद में सीजीएल से बहाल होकर प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी के पद पर कार्यरत था, के साथ साथ जेपीएससी के परीक्षा उपनियंत्रक श्वेता गुप्ता की गिरफ्तारी हुई.
अभय तिवारी, उसका भाई अक्षय तिवारी व पत्नी सुषमा तिवारी सीजीएल से बहाल हुए थे, ऐसे में सीआईडी ने सीजीएल परीक्षा में अनियमितता के पहलुओं पर जांच पड़ताल की. यह पहला मौका था, तब सीजीएल की जांच में जेएसएससी के रास्ते सीआईडी की इंट्री हुई. सीआईडी ने पूर्व में आए तथ्यों से इतर अभय की स्वीकारोक्ति दर्ज की. अभय ने पूछताछ में पहली बार वेबल कंपनी का नाम लिया. बताया कि वेबल के मिथिलेश सिंह व प्रमाणिक के जरिए बोकारो ले जाकर अभ्यर्थियों को प्रश्नोत्तर रटवाए गए थे.
सीआईडी ने सीजीएल के मामले में नए तथ्यों को उजागर किया. सीजीएल के केस में अक्षय तिवारी, सुषमा तिवारी की गिरफ्तारी हुई. पहले चरण में संदिग्ध 37 लोगों से पूछताछ हुई. अब सारे 1932 सफल अभ्यर्थियों की भूमिका की जांच सीआईडी कर रही है. सीआईडी ने जांच के क्रम में न सिर्फ सीजीएल बल्कि एफआरओ, सीडीपीओ, 11-13 वी जेपीएससी, पीजीटीआई जैसी परीक्षाओं में अनियमितता उजागर की. सीआईडी ने तथ्यों को स्वीकारोक्ति में दर्ज नहीं करती तो इन परीक्षाओं के आयोजन पर सवाल भी नहीं उठता, क्योंकि इन परीक्षाओं का आयोजन अलग अलग एजेंसियों ने किया था. टीडीपीएल से अलग विभिन्न एजेंसियों के द्वारा आयोजित परीक्षा भी जांच के दायरे में आयीं.
सीबीआई जांच की मांग छात्रों और राजनीतिक दलों के द्वारा की जा रही है. लेकिन सीआईडी ने अबतक जिस रफ्तार से जांच की, अगर सीबीआई जांच का इंतजार किया जाता तो काफी देरी हो चुकी होती. अभियुक्त कई तकनीकी साक्ष्यों को नष्ट कर चुके होते. अब भी कई अभियुक्त सीआईडी की रडार पर हैं, जाहिर है सीबीआई जांच की प्रक्रियाओं में देरी का फायदा अभियुक्तों को ही मिलता. सीबीआई पूर्व में भी जेपीएससी के प्रथम व द्वितीय परीक्षाओं की जांच कर रही है. इन जांच का अब तक कोई सकारात्मक प्रभाव सामने नहीं आया है.
जानिए क्या रहा, बीते एक माह तक जांच का घटनाक्रम
14वीं जेपीएससी को लेकर पहली F.I.R कब हुई थी?
जेपीएससी मामले पर सीआईडी ने पहली F.I.R 22 जुलाई 2026 को की थी, जिसकी थाना केस संख्या CID थाना, कांड संख्या 16/2026 है. यह 14वीं संयुक्त असैनिक सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितता, OMR/डेटा में छेड़छाड़ और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े आरोप को लेकर था.
जेएसएससी सीजीएल को लेकर पहली F.I.R कब हुई?
29 सितंबर 2024: शिक्षक राजेश प्रसाद ने JSSC-CGL में कथित पेपर लीक को लेकर पुलिस में ऑनलाइन शिकायत दी थी. हाईकोर्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक पुलिस ने उस शिकायत को FIR के रूप में दर्ज नहीं किया. 17 दिसंबर 2024: झारखंड हाईकोर्ट ने मामले में FIR दर्ज करने/जांच की दिशा में महत्वपूर्ण आदेश दिया. 1 जनवरी 2025: हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में CID Ranchi P.S. Case No. 01/2025 दर्ज हुआ. 3 जनवरी 2025: इसके बाद CID Ranchi P.S. Case No. 02/2025 दर्ज हुआ. हाईकोर्ट के रिकॉर्ड में दोनों केस की तारीखें स्पष्ट रूप से 01.01.2025 और 03.01.2025 दी गई हैं.

अब तक जेपीएससी और जेएसएससी सीजीएल मामले पर कितने लोग गिरफ्तार हुए?
14वीं JPSC परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही CID के मुताबिक अब तक 23 लोगों की गिरफ्तारी हुई है.
• 22 जुलाई 2026 — JPSC की तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता, TDPL के निदेशक रामवीर सिंह, तकनीकी प्रोग्रामर मोहम्मद उस्मान और मोहम्मद एबाद, तथा TDPL के मार्केटिंग मैनेजर और गोड्डा के BSO अभय कुमार तिवारी को गिरफ्तार किया गया. ये 14वीं JPSC परीक्षा में कथित अनियमितता और परीक्षा प्रक्रिया से छेड़छाड़ के मामले में पकड़े गए.
• 24 जुलाई 2026 — TDPL से जुड़े हेमंत वर्मा, प्रदीप कुमार सिंह और संजय कुमार की गिरफ्तारी हुई. इन पर परीक्षा प्रक्रिया और कथित अनियमितताओं में भूमिका का आरोप है. 24 जुलाई तक कुल पांच गिरफ्तारी के बाद आगे की कार्रवाई जारी रही.
• जुलाई के अंतिम सप्ताह — JPSC से जुड़े सोनू कुमार समेत अन्य आरोपियों को CID ने गिरफ्तार किया. जांच में JPSC और परीक्षा संचालन से जुड़े लोगों की भूमिका सामने आने के बाद गिरफ्तारी का दायरा बढ़ा.
• 4 अगस्त 2026 — उमेश कुमार, बुधेश्वर भगत और रमेश कुमार को गिरफ्तार किया गया. जांच में इन पर परीक्षा की गोपनीयता भंग करने और कथित तौर पर अभ्यर्थियों तथा परीक्षा नेटवर्क के बीच संपर्क की भूमिका होने का आरोप सामने आया.
• अगस्त के पहले सप्ताह — TDPL के अकाउंटेंट और JPSC अभ्यर्थी रक्षाक सिंह, पूर्व JPSC अध्यक्ष एल. खियांग्ते के आवासीय कार्यालय में कंप्यूटर ऑपरेटर धर्मेंद्र कुमार, कथित एजेंट उमाकांत उरांव तथा अभ्यर्थी रोशन केरकेट्टा, मनोज कुमार और सुमन सौरव समेत अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी हुई.
• 10 अगस्त 2026 — पूर्व JPSC अध्यक्ष एल. खियांग्ते को CID ने गिरफ्तार किया. उन पर TDPL को परीक्षा का काम देने की प्रक्रिया में कथित अनियमितता और अन्य गंभीर आरोपों की जांच चल रही है.
इसके अलावा अभय तिवारी के सगे भाई अक्षय कुमार तिवारी और उसकी पत्नी सुषमा कुमारी को 18 अगस्त को गिरफ्तार किया गया.
एसआईटी मे कौन-कौन लोग शामिल हैं?
जेपीएससी जांच के लिए बनी एसआईटी की कमान ADG मनोज कौशिक को मिली है, वहीं जेएसएससी-सीजीएल की जांच के लिए बनी एसआईटी की कमान अनूप बिरथरे के पास है. कुल मिलाकर 7 IPS अधिकारी, 12 DSP और कुल 50 अन्य पुलिस अधिकारी हैं. इस मामले की रिपोर्ट 60 दिनों के अंदर सौंपनी है.
सीआईडी ने अब तक क्या-क्या किया?
1. 20 जुलाई 2026 को CID ने JPSC मुख्यालय में छापेमारी की और तीन कर्मचारियों को गिरफ्तार किया. इसी दिन देर शाम तत्कालीन JPSC अध्यक्ष एल. ख्यांगते ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया.
2. 21 जुलाई 2026 को गृह विभाग के अवर सचिव दयानंद कुमार ने CID के ADG मनोज कौशिक को जांच के लिए पत्र भेजा. इसके बाद DSP वेंकटेश कुमार ने प्रारंभिक जांच की और अपनी रिपोर्ट सौंपी.
3. 22 जुलाई 2026 को CID थाना में कांड संख्या 16/2026 दर्ज की गई. FIR में TDPL से जुड़े लोगों, JPSC की तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता, JPSC कर्मचारियों और अन्य अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया.
4. 23 जुलाई 2026 को सरकार ने मामले की जांच औपचारिक रूप से CID को सौंप दी. इसके बाद CID ने JPSC मुख्यालय, TDPL के कार्यालय और पूर्व JPSC अध्यक्ष एल. ख्यांगते के सरकारी आवास समेत कई ठिकानों पर छापेमारी की.
5. 28 जुलाई से 1 अगस्त 2026 के बीच CID ने पूर्व JPSC अध्यक्ष एल. ख्यांगते से करीब 32 घंटे पूछताछ की. उनसे परीक्षा में एजेंसी के चयन, परीक्षा प्रक्रिया और कथित वित्तीय लेनदेन को लेकर सवाल किए गए.
6. 30 जुलाई 2026 को CID ने हजारीबाग पुलिस की मदद से 14वीं JPSC PT में चयनित अभ्यर्थी सुमन सौरभ को गिरफ्तार किया. CID ने उस पर परीक्षा में अनुचित साधन का इस्तेमाल कर चयन हासिल करने का आरोप लगाया.
7. अगस्त 2026 के पहले सप्ताह तक CID की कार्रवाई में गिरफ्तारियों की संख्या 19 तक पहुंच गई. गिरफ्तार लोगों में JPSC अधिकारी-कर्मचारी, TDPL के अधिकारी-कर्मचारी, कथित बिचौलिये और परीक्षा में सफल अभ्यर्थी शामिल थे.
8. 10 अगस्त 2026 को CID ने पूर्व JPSC अध्यक्ष एल. ख्यांगते को गिरफ्तार कर लिया. मेडिकल जांच के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. इसी दौरान JPSC की सदस्य अजीता भट्टाचार्य से भी पूछताछ की गई.
9. 17 अगस्त 2026 को CID की जांच का दायरा JPSC से आगे बढ़कर JSSC तक पहुंचा. CID ने JSSC कार्यालय में कार्रवाई की और JSSC सचिव सुधीर कुमार गुप्ता से पूछताछ की.
10. 17 अगस्त 2026 को ही JPSC सदस्य अजीता भट्टाचार्य के PA ब्रज कुमार राम को CID ने गिरफ्तार किया और उसे जेल भेज दिया.


