रांची. झारखंड हाईकोर्ट ने रेप की कोशिश के मामले में अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि महिला पर हमला या उसे जमीन पर गिरा देना अपने आप में रेप की कोशिश का अपराध नहीं बनता. रेप की कोशिश साबित करने के लिए आरोपी की ओर से ऐसा कोई स्पष्ट और ठोस कृत्य होना जरूरी है, जो रेप करने की दिशा में उठाया गया कदम हो. कोर्ट ने इसी आधार पर एक व्यक्ति को IPC की धारा 376/511 के तहत मिली सजा को बदलकर धारा 354 के तहत कर दिया.
यह फैसला जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की सिंगल बेंच ने Shankar Ram v. State of Jharkhand मामले में सुनाया. मामला डाल्टनगंज (पलामू) के एडिशनल सेशन जज के वर्ष 2005 के फैसले से जुड़ा था. निचली अदालत ने आरोपी को रेप के प्रयास का दोषी मानते हुए सात साल की सश्रम सजा और 1,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी.
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क्या था पूरा मामला
अभियोजन के मुताबिक, महिला अपने खेत में चारा काट रही थी. इसी दौरान आरोपी उसके पास पहुंचा और कथित तौर पर उसे जमीन पर गिरा दिया. महिला वहां से भागने लगी तो आरोपी ने उसे दोबारा पकड़ लिया और धान के खेत में धकेल दिया. महिला के शोर मचाने पर आरोपी मौके से भाग गया.
महिला घर पहुंची और पहले अपनी भाभी तथा बाद में पति और ससुर को घटना की जानकारी दी. अगले दिन पंचायत हुई, जिसके बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई. आरोपी के खिलाफ IPC की धारा 376/511 के तहत मामला दर्ज किया गया.
हाईकोर्ट ने साक्ष्यों की जांच के बाद बदली सजा
आरोपी ने हाईकोर्ट में अपील करते हुए कहा कि ट्रायल कोर्ट ने महिला के बयान को जरूरत से ज्यादा महत्व दिया है. उसने FIR और अदालत में दर्ज गवाही के बीच विरोधाभास का भी दावा किया.
हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों की समीक्षा की. कोर्ट ने पाया कि महिला के बयान में मुख्य आरोप आरोपी द्वारा उसे पकड़ने और दो बार जमीन पर गिराने का था. हालांकि, ऐसा कोई स्पष्ट आरोप या साक्ष्य सामने नहीं आया, जिससे यह साबित हो कि आरोपी ने रेप करने की कोशिश में कोई ठोस कदम उठाया था.
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कोर्ट ने स्पष्ट किया कि रेप की कोशिश और महिला की मर्यादा भंग करने के लिए हमला, दोनों अलग-अलग अपराध हैं. केवल शारीरिक हमला होने से उसे स्वतः रेप की कोशिश नहीं माना जा सकता.
धारा 376/511 के लिए स्पष्ट कृत्य जरूरी
हाईकोर्ट ने कहा कि पीड़िता के बयान का समग्र रूप से आकलन करने पर आरोपी की ओर से ऐसा कोई स्पष्ट कार्य सामने नहीं आता, जिसे रेप करने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा सके. आरोपी का आचरण इतना जरूर साबित करता है कि उसने महिला पर हमला किया और ऐसा व्यवहार किया जिससे उसकी मर्यादा को ठेस पहुंच सकती थी, लेकिन रेप की कोशिश के स्तर तक पहुंचने वाला कोई स्पष्ट कृत्य साबित नहीं हुआ.

कोर्ट ने यह भी माना कि महिला का लगातार यह कहना कि आरोपी ने उसे पकड़ा और जमीन पर गिराया, IPC की धारा 354 के तहत अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त है. इससे यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि आरोपी ने महिला की मर्यादा भंग करने के इरादे से या यह जानते हुए हमला किया कि उसके कृत्य से उसकी मर्यादा को ठेस पहुंच सकती है.
इसी आधार पर हाईकोर्ट ने IPC की धारा 376/511 के तहत दी गई सजा को हटाते हुए आरोपी को IPC की धारा 354 के तहत दोषी माना.


