रांची: जेपीएससी-जेएसएससी की भर्ती परीक्षाओं में हुई अनियमितताओं और भर्ती व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने आंदोलन के दूसरे चरण की शुरुआत कर दी है. देवेंद्र ने सोमवार, 24 अगस्त को रामगढ़ के नेमरा से ‘भर्ती व्यवस्था सुधार यात्रा’ शुरूआत की.
बता दें, नेमरा पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन और वर्तमान में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पैतृक गांव है. महतो ने यात्रा के जरिए राज्यभर के अभ्यर्थियों और युवाओं को भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता, निष्पक्षता और सुधार के मुद्दे पर एकजुट करने का आह्वान किया है.
देवेंद्र नाथ महतो ने यात्रा के लिए जिलों का क्रम भी जारी किया है. उनके आह्वान के मुताबिक यात्रा रामगढ़ से शुरू होकर हजारीबाग, चतरा, कोडरमा और गिरिडीह पहुंचेगी. इसके बाद इसी क्रम में आगे के जिलों में अभियान चलाया जाएगा. उन्होंने अभ्यर्थियों से अपने-अपने जिले में यात्रा को सफल बनाने के लिए तैयारी में जुटने की अपील की है.
भूख हड़ताल के बाद आंदोलन का नया चरण
भर्ती सुधार यात्रा को देवेंद्र महतो के हालिया आंदोलन के अगले चरण के तौर पर देखा जा रहा है. जेपीएससी और जेएसएससी- सीजीएल समेत कई भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के खिलाफ छात्रों ने 25 जुलाई से रांची में आंदोलन शुरू किया था. इसके बाद देवेंद्र महतो ने भूख हड़ताल शुरू की. करीब 16 दिन तक चले अनशन के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ी और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. बाद में सरकार के भर्ती परीक्षाओं को लेकर लिए गए फैसलों के बाद उन्होंने अस्पताल में जूस पीकर अनशन खत्म किया था.
अनशन खत्म करने के बाद भी महतो ने आंदोलन समाप्त करने के बजाय भर्ती व्यवस्था को पारदर्शी और लीक-प्रूफ बनाने की मांग जारी रखने की बात कही थी. अब इसी मांग को लेकर आंदोलन को राज्य के जिलों तक ले जाने की रणनीति बनाई गई है.
युवाओं को जोड़ने की कोशिश
महतो का कहना है कि भर्ती व्यवस्था में सुधार केवल किसी एक परीक्षा या नियुक्ति का मामला नहीं है. उनका अभियान युवाओं को जागरूक और एकजुट करने तथा भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग को मजबूती देने पर केंद्रित है. यात्रा को संवैधानिक और शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ाने की बात भी कही गई है.
हेमंत सोरेन के गांव नेमरा से शुरू हुआ यह अभियान अब अलग-अलग जिलों में अभ्यर्थियों के साथ संवाद और जनसमर्थन जुटाने की दिशा में आगे बढ़ेगा. इससे पहले रांची में चले आंदोलन और भूख हड़ताल के जरिए भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मुद्दे सरकार के सामने उठाए गए थे. अब महतो ने आंदोलन को जिला स्तर तक ले जाने की रणनीति अपनाई है.
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