Patna: लोकसभा में महिला आरक्षण बिल और सीमा निर्धारण बिल पर चर्चा के दौरान पूर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव द्वारा की गई विवादित टिप्पणियों ने राजनीतिक गलियारों में एक बड़ा हंगामा खड़ा कर दिया है। सांसद ने अपने भाषण के दौरान दावा किया कि देश में 90 प्रतिशत महिलाओं का राजनीतिक करियर नेताओं के कमरों से शुरू होता है, जिसने सदन और बाहर तीखी प्रतिक्रियाओं को जन्म दिया है।
इसके अलावा, उन्होंने देश में यौन शोषण के मामलों को लेकर भी नेताओं, बाबाओं और पदाधिकारियों पर तीखे हमले किए, जहाँ उन्होंने दावा किया कि 755 सांसदों पर यौन शोषण के मामले दर्ज हैं और 155 के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। उन्होंने नेताओं की पॉर्न देखने की आदतों पर भी टिप्पणी की, जिससे विवाद और गहरा गया। हालांकि, उनका मुख्य तर्क महिला आरक्षण बिल में ओबीसी, दलित और अल्पसंख्यक महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व न मिलने और 50 प्रतिशत आरक्षण के भीतर उप-आरक्षण की मांग को लेकर था, लेकिन उनकी भाषा शैली पर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों तरफ से सवाल उठाए जा रहे हैं।
इस बयान को बिहार राज्य महिला आयोग ने अत्यंत घृणित और अपमानजनक करार दिया है। आयोग का कहना है कि सार्वजनिक जीवन में महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुँचाने वाले ऐसे बयानों से महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी हतोत्साहित होती है। इस अपमानजनक टिप्पणी पर संज्ञान लेते हुए महिला आयोग ने सांसद पप्पू यादव को नोटिस जारी कर उनसे स्पष्टीकरण मांगा है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पप्पू यादव आयोग के नोटिस का क्या जवाब देते हैं और क्या वे अपने इन बयानों को लेकर खेद व्यक्त करेंगे। इस घटना ने संसद की मर्यादा और नेताओं द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली भाषा पर एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर गंभीर बहस छेड़ दी है।
Also Read : वोट की खातिर घर लौटने की होड़: त्योहार नहीं, फिर भी पैक हैं बंगाल जाने वाली ट्रेनें


