Ranchi : रांची के कांके थाना क्षेत्र में पुलिस की कार्यशैली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सुकुरहुटू में जमीन विवाद के बीच गुरुवार रात एक व्यक्ति की हत्या हो जाती है। इसके बाद शुक्रवार को ग्रामीण न्याय की मांग को लेकर शव के साथ कांके थाना पहुंच जाते हैं। लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिस समय पुलिस को हत्या की जांच तेज करनी चाहिए और इलाके में कानून व्यवस्था मजबूत करनी चाहिए, उस समय पुलिस का ध्यान विवादित जमीन को बराबर कराने और मकान खाली कराने पर ज्यादा नजर आ रहा है। इसी वजह से इलाके में गुस्सा बढ़ता जा रहा है और लोग खुलकर कहने लगे हैं कि पुलिस की भूमिका निष्पक्ष नहीं दिख रही। चर्चा यह भी है कि जमीन विवाद के पीछे प्रभावशाली लोगों की दिलचस्पी है और उसी के दबाव में पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
एसडीओ कोर्ट ने काम पर लगाई रोक
रांची के कांके इलाके में चल रहे जमीन विवाद में अब नया मोड़ आ गया है। जिस जमीन को लेकर पिछले कई दिनों से विवाद चल रहा है, उस मामले में एसडीओ कोर्ट ने साफ तौर पर जमीन पर किसी भी तरह का काम बंद रखने और यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है। लेकिन सूत्रों का कहना है कि कोर्ट के आदेश के कुछ ही घंटों बाद जमीन पर फिर से हलचल बढ़ने लगी है और मकान तोड़ने की तैयारी की जा रही है।
कोर्ट का आदेश, फिर भी बढ़ी हलचल
कोर्ट के आदेश के बाद उम्मीद थी कि विवाद फिलहाल शांत हो जाएगा। लेकिन इलाके से मिल रही जानकारी के मुताबिक जमीन पर फिर से लोगों का जमावड़ा लगने लगा है। बताया जा रहा है कि जमीन कारोबारी वहां मकान को तोड़ने की तैयारी में जुटे हुए हैं। सूत्रों का कहना है कि जमीन पर दो दर्जन से ज्यादा असामाजिक तत्वों को भी इकट्ठा किया जा रहा है ताकि किसी भी तरह से कब्जा किया जा सके। इस सूचना के बाद आसपास के लोगों में भी चिंता का माहौल है।

सुबह थाने में समझाया गया था दोनों पक्षों को
मिली जानकारी के अनुसार शुक्रवार सुबह ही कांके थाने में दोनों पक्षों को बुलाकर समझाया गया था। पुलिस अधिकारियों ने साफ कहा था कि जब तक जमीन के दस्तावेजों की जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक वहां किसी भी तरह की गतिविधि या विवाद नहीं होना चाहिए। पुलिस ने यह भी चेतावनी दी थी कि अगर जमीन पर असामाजिक तत्वों को देखा गया तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और जेल भी भेजा जा सकता है। लेकिन इसके बावजूद जमीन पर फिर से लोगों के जुटने की खबर सामने आ रही है।
बड़े नेता के भाई पर शक
स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा भी तेज है कि पूरे मामले के पीछे एक बड़े राजनेता का भाई सक्रिय है और वही पर्दे के पीछे से पूरी रणनीति बना रहा है। लोगों का कहना है कि इसी कारण स्थानीय पुलिस चाहकर भी सख्ती से कार्रवाई नहीं कर पा रही है।
पहले भी उठे थे सवाल
गौरतलब है कि बीते दिनों जमीन विवाद को लेकर कांके थानेदार प्रकाश रजक की भूमिका पर भी सवाल उठे थे। खबर प्रकाशित होने के बाद यह आरोप सामने आया था कि जमीन के मामले में कुछ जमीन कारोबारियों को पुलिस का संरक्षण मिल रहा है। यह भी सवाल उठाया गया था कि जब जमीन का मामला अदालत में विचाराधीन है, तब बिना किसी सक्षम न्यायालय के आदेश के पुलिस आखिर कैसे किसी परिवार को मकान खाली कराने का दबाव बना सकती है।
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दबाव में घर छोड़ने को मजबूर हुआ परिवार
स्थानीय लोगों के अनुसार पुलिस के दबाव और कुछ लोगों की गाली गलौज से परेशान होकर एक मध्यमवर्गीय परिवार को अपना घर छोड़कर किराए के मकान में जाना पड़ा। बताया जा रहा है कि पहले मकान में ताला लगाया गया और उसकी चाभी विरोधी पक्ष को दे दी गई। इसके बाद आरोप है कि आज कुछ लोगों ने जबरन मकान का ताला खोलकर अंदर रखा सामान बाहर फेंक दिया।
कोर्ट जाने की तैयारी
अब इस पूरे मामले को लेकर पीड़ित परिवार न्यायालय की शरण में जाने की तैयारी कर रहा है। उनका कहना है कि कानून और अदालत के आदेश की अनदेखी कर जो कुछ भी किया जा रहा है, उसकी पूरी जानकारी कोर्ट को दी जाएगी। गौरतलब है कि 9 मार्च को भी इसी मामले में ‘जमीन विवाद में मास्टर बन गए कांके थानेदार’ शीर्षक से खबर प्रकाशित हुई थी, जिसमें थानेदार और जमीन कारोबारियों के बीच कथित साठगांठ को उजागर किया गया था। लेकिन अब तक इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
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