Ranchi : देशभर में चल रहे विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण के दौरान एक चौंकाने वाली बात सामने आई है। पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में बड़ी संख्या में लोगों ने झारखंड के दस्तावेज लगाकर मतदाता बनने का दावा किया है। जब इन कागजों की जांच शुरू हुई तो कई मामलों में दस्तावेज फर्जी पाए गए। चुनाव आयोग के मुताबिक अब तक सबसे ज्यादा 1640 आवेदन पश्चिम बंगाल से आए हैं। इनमें से 135 आवेदनों के साथ लगाए गए दस्तावेज अवैध साबित हो चुके हैं। बाकी आवेदनों की भी जांच जारी है। दूसरे राज्यों से आए कागजों में भी गड़बड़ियां सामने आ रही हैं।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में सख्त निर्देश
गुरुवार को मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने राज्य के सभी उप निर्वाचन पदाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक की। उन्होंने साफ कहा कि दूसरे राज्यों से जो भी झारखंड से जुड़े दस्तावेज सत्यापन के लिए भेजे जा रहे हैं, उनकी तुरंत जांच कर रिपोर्ट समय पर संबंधित राज्यों को भेजी जाए। उन्होंने यह भी बताया कि अलग-अलग राज्यों में मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण चल रहा है। ऐसे में झारखंड से जुड़े दस्तावेजों की संख्या बढ़ रही है, इसलिए राज्य में भी तैयारी पूरी और समयबद्ध होनी चाहिए।
फैमिली मैपिंग और डुप्लीकेट वोटरों पर फोकस
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने निर्देश दिया कि मतदाता सूची बनाते समय पैतृक मैपिंग यानी फैमिली मैपिंग पर खास ध्यान दिया जाए। इसके साथ ही अब्सेंट, शिफ्टेड, डिलीट और डुप्लीकेट मतदाताओं की गहन जांच की जाए, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी न रहे।
धुंधली फोटो नहीं चलेगी
बैठक में यह भी साफ किया गया कि मतदाता सूची में किसी भी मतदाता की ब्लर फोटो लंबित नहीं रहनी चाहिए। वोटर आईडी में साफ और रंगीन तस्वीर सुनिश्चित करने के लिए बीएलओ को बीएलओ ऐप से नई फोटो खींचकर अपलोड करने का निर्देश दिया गया है।
“बुक ए कॉल विद बीएलओ” सुविधा का उपयोग
के. रवि कुमार ने ECINET पोर्टल पर उपलब्ध “बुक ए कॉल विद बीएलओ” सुविधा का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करने को कहा। मतदाताओं की शिकायतों और समस्याओं का तुरंत समाधान हो, इस पर जोर दिया गया। ऐप के जरिए जो भी कॉल रिक्वेस्ट आए, उस पर समय पर संपर्क करने का निर्देश दिया गया।
बैठक में संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सुबोध कुमार, उप निर्वाचन पदाधिकारी धीरज ठाकुर, अवर निर्वाचन पदाधिकारी सुनील कुमार सहित सभी जिलों के उप निर्वाचन पदाधिकारी मौजूद रहे। चुनाव आयोग अब इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए दस्तावेजों की सख्ती से जांच कर रहा है, ताकि मतदाता सूची पूरी तरह साफ और पारदर्शी रहे।
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