भारत की सभ्यता को सदियों से आदिवासी समुदायों ने अपने जंगलों, नदियों और जैव विविधता की रक्षा करके संजोए रखा है. यह बात केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने कही. वे तेलंगाना के रंगारेड्डी जिले के कन्हा शांति वनम में फ्रेंड्स ऑफ ट्राइबल्स सोसाइटी की वार्षिक बैठक को संबोधित कर थे.
जी. किशन रेड्डी ने कहा कि आदिवासियों की जीवनशैली सतत विकास का उदाहरण है और आज पूरी दुनिया जिस जलवायु परिवर्तन की चुनौती से जूझ रही है, उसके समाधान में आदिवासी ज्ञान और परंपराओं की महत्वपूर्ण भूमिका है. उन्होने कहा कि आदिवासी समाज की पहचान, गरिमा और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना आवश्यक है. उन्होंने कहा कि आदिवासी विकास के बिना विकसित भारत का लक्ष्य पूरा नहीं हो सकता.
मंत्री ने गिनवाये सरकार की उपलब्धियां
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने आदिवासी कल्याण के लिए कई कदम उठाए हैं. इनमें वर्ष 2021 से 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाना, देशभर में 11 जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालयों का निर्माण, हैदराबाद में 25 करोड़ रुपये की लागत से रामजी गोंड जनजातीय संग्रहालय और लगभग 900 करोड़ रुपये की लागत से सम्मक्का-सरक्का केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय की स्थापना शामिल है.
उन्होंने बताया कि देशभर के एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों में करीब 1.5 लाख आदिवासी बच्चे निःशुल्क शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं. साथ ही, जनजातीय कार्य मंत्रालय का बजट वर्ष 2013-14 के लगभग 4,000 करोड़ रुपये से बढ़ाकर करीब 15,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है.
अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे लाभ
किशन रेड्डी ने तेलंगाना में वनाधिकार कानून के तहत दिए गए अधिकारों, छात्रवृत्ति योजनाओं और अन्य कल्याणकारी कार्यक्रमों का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि विकास का लाभ समाज के अंतिम आदिवासी व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए. साथ ही उन्होंने आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को याद करते हुए फ्रेंड्स ऑफ ट्राइबल्स सोसाइटी के कार्यकर्ताओं की भी सराहना की.

