संसद मार्च के दौरान हुए हंगामे और पुलिस कार्रवाई के बीच CJP और केंद्र सरकार के बीच पहली औपचारिक बातचीत हुई. CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका ने केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा से मुलाकात की. और संगठन की मांगों से जुड़ा ज्ञापन सौंपा. करीब 10 मिनट चली इस बैठक में सरकार ने सभी मांगों को सुना और उन पर विचार के लिए कुछ समय मांगा.
बैठक के बाद CJP नेताओं ने बताया कि जे.पी. नड्डा ने कहा है कि वह संगठन की मांगों पर सरकार और पार्टी नेतृत्व के साथ आंतरिक चर्चा करेंगे. हालांकि, किसी भी मांग पर तत्काल फैसला या लिखित आश्वासन नहीं दिया गया. सरकार की ओर से भी बैठक के बाद कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया.
CJP ने सरकार के सामने रखीं ये प्रमुख मांगें
- केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तत्काल पद से हटाया जाए.
- सोनम वांगचुक को तुरंत रिहा किया जाए.
- परीक्षा विवाद के बाद जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए.
- परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए.
CJP नेताओं ने कहा कि वे इन मांगों पर पीछे हटने वाले नहीं हैं और सरकार से जल्द ठोस कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं.
बैठक ऐसे समय हुई जब संसद के मानसून सत्र के पहले दिन CJP ने ‘चलो संसद’ मार्च निकाला था. प्रदर्शनकारियों को संसद की ओर बढ़ने से रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने कई जगह बैरिकेड लगाए और बल प्रयोग किया.
इस दौरान कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया. CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके को भी पुलिस ने हिरासत में लिया, जिसके बाद प्रदर्शन और तेज हो गया.
साकारात्मक कदम न उठाने पर रहेगी आंदोलन जारी
बैठक के बाद सौरव दास ने कहा कि सरकार ने बातचीत की पहल की है और अब फैसला सरकार को करना है. उन्होंने कहा कि यदि मांगों पर जल्द सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया तो आंदोलन आगे भी जारी रहेगा. वहीं आशुतोष रांका ने कहा कि छात्रों और युवाओं के मुद्दों पर संगठन अपना संघर्ष जारी रखेगा.
फिलहाल सरकार ने केवल मांगों पर विचार करने का भरोसा दिया है. अब नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में सरकार इन मांगों पर क्या फैसला लेती है और क्या यह बातचीत किसी ठोस समाधान तक पहुंच पाती है.
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