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    Home»झारखंड»डेढ़ महीने से बिना कमिश्नर चल रहा उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल, सात जिलों की कमान अधर में
    झारखंड

    डेढ़ महीने से बिना कमिश्नर चल रहा उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल, सात जिलों की कमान अधर में

    Team JoharBy Team JoharFebruary 10, 2026Updated:February 10, 2026No Comments3 Mins Read8
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    कमिश्नर
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    Hazaribagh : झारखंड के उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल मुख्यालय हजारीबाग में कमिश्नर का पद पिछले डेढ़ महीने से खाली पड़ा हुआ है। 31 दिसंबर 2025 को तत्कालीन आयुक्त पवन कुमार के सेवानिवृत्त होने के बाद अब तक नए आयुक्त की पोस्टिंग नहीं हो सकी है। इस वजह से प्रमंडल स्तर पर प्रशासनिक कामकाज लगभग ठप जैसी स्थिति में पहुंच गया है।

    सात जिलों का प्रशासनिक संतुलन बिगड़ा

    उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के अंतर्गत हजारीबाग, चतरा, कोडरमा, गिरिडीह, बोकारो, धनबाद और रामगढ़ जिले आते हैं। इन सभी जिलों में विकास योजनाओं की निगरानी, विभागीय समीक्षा और आपसी प्रशासनिक समन्वय की जिम्मेदारी आयुक्त कार्यालय पर होती है। आयुक्त के नहीं रहने से इन सातों जिलों का प्रशासनिक संतुलन बिगड़ता नजर आ रहा है।

    विकास योजनाओं की समीक्षा और मॉनिटरिंग पर असर

    आयुक्त स्तर पर होने वाली विकास योजनाओं की नियमित समीक्षा बीते डेढ़ महीने से नहीं हो पाई है। अलग-अलग विभागों की योजनाओं, खर्च और प्रगति रिपोर्ट पर आयुक्त की निगरानी बेहद जरूरी मानी जाती है। लेकिन पद खाली रहने के कारण योजनाओं की मॉनिटरिंग कमजोर पड़ गई है। इससे कई योजनाओं के तय समय पर पूरे होने को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

    विधि व्यवस्था को लेकर नहीं हुई कोई बैठक

    आयुक्त के नहीं रहने का सीधा असर विधि व्यवस्था पर भी पड़ा है। बीते डेढ़ महीने में सातों जिलों के उपायुक्त और पुलिस अधीक्षकों के साथ कोई भी प्रमंडलीय स्तर की बैठक नहीं हो सकी है। जानकारी के अनुसार अंतिम समीक्षा बैठक 26 दिसंबर 2025 से पहले हुई थी। इसके बाद कानून व्यवस्था को लेकर आयुक्त स्तर से कोई ठोस दिशा निर्देश नहीं मिल पाया है।

    आयुक्त न्यायालय में दर्जनों मामले लंबित

    आयुक्त कार्यालय से जुड़े न्यायालयीन मामलों पर भी संकट गहराता जा रहा है। भूमि विवाद, अपील और अन्य प्रशासनिक मामलों से जुड़े दर्जनों केस आयुक्त के कोर्ट में लंबित हैं। आवेदक समय पर न्याय मिलने की उम्मीद लगाए बैठे हैं, लेकिन कोर्ट का कामकाज प्रभावित होने से मामलों का निपटारा नहीं हो पा रहा है।

    त्योहारों को लेकर बढ़ी प्रशासन की चिंता

    फरवरी और मार्च महीने में कई प्रमुख त्योहार प्रस्तावित हैं। आमतौर पर इन त्योहारों को लेकर विधि व्यवस्था बनाए रखने के लिए आयुक्त स्तर पर प्रमंडलीय समीक्षा बैठक होती है। लेकिन आयुक्त के नहीं रहने से ऐसी बैठकें होंगी या नहीं, इसको लेकर प्रशासनिक हलकों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

    आचार संहिता को बताया जा रहा वजह

    सूत्रों के मुताबिक नगर निकाय चुनाव को लेकर घोषित आचार संहिता को नए आयुक्त की पोस्टिंग में देरी की बड़ी वजह बताया जा रहा है। हालांकि प्रशासनिक जरूरतों को देखते हुए इतने लंबे समय तक पद का खाली रहना कई सवाल खड़े कर रहा है। स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज है कि सरकार को जल्द से जल्द नए आयुक्त की नियुक्ति करनी चाहिए, ताकि प्रमंडल का प्रशासनिक ढांचा फिर से रफ्तार पकड़ सके।

    Also Read : 7 साल तक शादी का झांसा देकर BSF जवान करता रहा यौन शोषण, SSP से न्याय की गुहार

    Commisioner office Hazaribagh news hindi news Jharkhand news
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