New Delhi : सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को राज्य सरकारों की उस परंपरा पर सवाल उठाए, जिसमें वे नियमित पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति के लिए संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को नाम भेजने के बजाय ‘एक्टिंग’ DGP की नियुक्ति कर देती हैं। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने कहा कि इस तरह की व्यवस्था से योग्य और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को DGP के पद के लिए चयन का उचित अवसर नहीं मिल पाता।
कोर्ट ने टिप्पणी की कि ‘एक्टिंग’ नियुक्तियां करके राज्य सरकारें तय प्रक्रिया से बचने की कोशिश करती हैं, जिससे पारदर्शिता और निष्पक्षता पर असर पड़ता है। सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रथा को गलत बताते हुए इसे खत्म करने की जरूरत पर जोर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में कहा, “हम UPSC को यह अधिकार देते हैं कि वह राज्यों को संबंधित DGP की सिफारिशों के लिए समय पर प्रस्ताव भेजने के लिए लिखे। जब ऐसे प्रस्ताव नहीं भेजे जाते हैं, तो UPSC प्रकाश सिंह मामले में आवेदन दायर कर सकती है। संबंधित राज्यों को जवाबदेही सहित आवश्यक परिणाम भुगतने होंगे।”
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी राज्य में DGP या पुलिस बल के प्रमुख की नियुक्ति UPSC द्वारा शॉर्टलिस्ट किए गए तीन अधिकारियों के पैनल में से की जाती है। आज की सुनवाई तेलंगाना हाई कोर्ट के आदेश की चुनौती से संबंधित थी, जिसमें UPSC को राज्य सरकार द्वारा अनुशंसित नामों पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया था।
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UPSC ने कोर्ट को बताया कि तेलंगाना में पिछली DGP, अनुराग शर्मा, 2017 में रिटायर हो गए थे, लेकिन राज्य ने UPSC को समय पर कोई सिफारिश नहीं भेजी। राज्य ने आखिरकार अप्रैल 2025 में सिफारिश भेजी, लेकिन UPSC ने कहा कि इतनी देरी गंभीर चूक है। आयोग ने यह भी कहा कि तेलंगाना अकेली राज्य सरकार नहीं है जो इस तरह की देरी कर रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने UPSC की चिंता से सहमति जताई और कहा कि इस तरह की देरी कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के करियर की ग्रोथ को प्रभावित करती है। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि केवल UPSC का ऑब्जेक्शन स्थिति को बेहतर नहीं बनाएगा, बल्कि राज्य सरकारों को कार्रवाई करने के लिए बाध्य करना होगा।
कोर्ट ने UPSC को तेलंगाना के DGP चयन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का निर्देश देते हुए कहा कि राज्य सरकारें जल्द से जल्द DGP के लिए सिफारिशें भेजें। प्रस्तावों का चयन मेरीट और योग्य अधिकारियों की पात्रता के आधार पर होगा। UPSC को इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया गया है।
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