झारखंड में नियमित पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति का मामला बुधवार 2 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट होगी. यह मामला सुप्रीम कोर्ट के चर्चित प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ फैसले में तय डीजीपी नियुक्ति प्रक्रिया के पालन से जुड़ा है.
सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले झारखंड समेत कई राज्यों से पूछा था कि नियमित DGP की नियुक्ति के लिए संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को प्रस्ताव क्यों नहीं भेजा गया. बीते 18 अगस्त की सुनवाई में झारखंड से संबंधित पेपरबुक एमिकस क्यूरी को उपलब्ध कराई गई थी, ताकि वह इस मुद्दे पर अदालत के सामने अपना नोट रख सकें. इसके बाद मामले को 2 सितंबर के लिए सूचीबद्ध किया गया.
क्या है मामला
डीजीपी की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह फैसले में एक निर्धारित प्रक्रिया है. इसके तहत राज्य सरकार को योग्य वरिष्ठ IPS अधिकारियों के नाम यूपीएससी को भेजने होते हैं. यूपीएससी की प्रक्रिया के बाद तैयार पैनल में से राज्य सरकार डीजीपी की नियुक्ति करती है. विवाद इस बात को लेकर है कि झारखंड में डीजीपी नियुक्ति के लिए राज्य सरकार ने अलग नियमावली बनाई है और इसी के तहत नियुक्ति की गई.
इस मामले में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी की ओर से भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी. सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया कि झारखंड ने UPSC पैनल की प्रक्रिया से अलग व्यवस्था बनाकर सेवानिवृत्त हो चुके अधिकारी को डीजीपी पद पर बनाए रखने का रास्ता तैयार किया. सुप्रीम कोर्ट ने इस पर UPSC और एमिकस क्यूरी से पक्ष मांगा था.
विवाद का एक प्रमुख हिस्सा पूर्व डीजीपी अनुराग गुप्ता की नियुक्ति और सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें पद पर बनाए रखने से जुड़ा रहा है. केंद्र सरकार ने उनकी सेवानिवृत्ति के बाद कार्यकाल बढ़ाने के राज्य सरकार के फैसले पर आपत्ति जताई थी और इसे सुप्रीम कोर्ट के डीजीपी नियुक्ति संबंधी निर्देशों के विपरीत बताया था.
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