छात्रावास में रहकर कर रही थी पढ़ाई
बताया जा रहा है कि अशरती पांकी-मेदिनीनगर मुख्य पथ स्थित बसडीहा के चांदो आवासीय छात्रावास में रहकर पढ़ाई कर रही थी। अचानक तबीयत बिगड़ने पर उसे पांकी के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
डॉक्टर नहीं थे मौजूद, स्टाफ कर रहा था इलाज
मामले में सबसे बड़ा आरोप यही है कि अस्पताल में उस समय डॉक्टर मौजूद नहीं थे और स्टाफ ही बच्ची का इलाज कर रहा था। शिक्षक का कहना है कि बच्ची को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहां डॉक्टर की अनुपस्थिति में स्टाफ ने इलाज शुरू कर दिया।
वहीं अस्पताल के चिकित्सक डॉ. वीरेंद्र का अलग पक्ष सामने आया है। उनका कहना है कि बच्ची को अस्पताल में छोड़कर शिक्षक चले गए थे, जिससे स्थिति और बिगड़ गई। दोनों पक्षों के अलग-अलग दावों के कारण मामला संदिग्ध बना हुआ है।
परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल
घटना के बाद बच्ची के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव में मातम पसरा हुआ है और हर कोई इस घटना से दुखी नजर आ रहा है। मासूम की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है।
निष्पक्ष जांच की उठी मांग
स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर काफी आक्रोश है। लोग मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों पर कार्रवाई हो।
आवासीय विद्यालयों पर भी उठे सवाल
इस घटना के बाद पांकी क्षेत्र में चल रहे आवासीय विद्यालयों की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। आरोप है कि कई जगह बच्चों को न तो सही शिक्षा मिल रही है और न ही बुनियादी सुविधाएं। इससे बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य दोनों पर खतरा बना रहता है।
सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल
यह घटना एक बार फिर स्वास्थ्य व्यवस्था और छात्रावासों की निगरानी पर बड़े सवाल खड़े कर रही है। अब देखना होगा कि जांच में क्या सामने आता है और जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है।