Palamu : नक्सलियों के खिलाफ जंगल और पहाड़ों में मोर्चा संभालने वाले इंडियन रिजर्व बटालियन-10 (आईआरबी-10) के छह जवानों ने कड़ी मेहनत और लगन से एक नई पहचान बनाई है। 8 दिसंबर 2025 को जारी जेएसएससी सीजीएल परीक्षा के परिणाम में इन जवानों ने सफलता हासिल कर अधिकारी बनने का सपना पूरा किया है। परीक्षा में कुल 1927 अभ्यर्थी सफल हुए, जिनमें आईआरबी-10 में तैनात ये छह जवान भी शामिल हैं।
खास बात यह है कि ये सभी जवान नक्सल विरोधी अभियानों में फ्रंटलाइन पर तैनात थे और कई बार ऑपरेशन का नेतृत्व भी कर रहे थे। अभियान के बाद जो थोड़ा-बहुत समय मिलता था, उसी में वे पढ़ाई करते थे। कठिन परिस्थितियों और जोखिम भरी ड्यूटी के बीच इन जवानों ने यह साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों तो हालात रास्ता नहीं रोक सकते।
सफल होने वाले जवानों में हजारीबाग के अरविंद कुमार का चयन एसएसओ पद पर हुआ है। अरविंद ने भूगोल विषय से स्नातकोत्तर तक की पढ़ाई की है। कोडरमा के रहने वाले अनिल कुमार रजक श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी बने हैं। गिरिडीह के अनिल मुर्मू और पलामू के हरीलाल राम का चयन जेएसए पद पर हुआ है, जबकि गिरिडीह के दीपक रजक और देवघर के गौतम कुमार राव का चयन बीडब्ल्यूओ पद के लिए हुआ है।
सभी सफल जवानों को पलामू एसपी सह आईआरबी-10 की कमांडेंट रीष्मा रमेशन ने सम्मानित किया और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। कई जवान आगे जेपीएससी की तैयारी भी कर रहे हैं और लिखित परीक्षा में शामिल हो चुके हैं।
जवानों का कहना है कि ड्यूटी हमेशा पहली प्राथमिकता रही, लेकिन उसके बाद मिलने वाले समय में उन्होंने पढ़ाई जारी रखी। नक्सल विरोधी अभियान, पिकेट की सुरक्षा और मोर्चा ड्यूटी के बीच पढ़ाई आसान नहीं थी, फिर भी साथियों और अधिकारियों के सहयोग से यह संभव हो सका।
ये जवान बिहार-झारखंड सीमा के चतरा इलाके में स्थित चक और चेतमा पिकेट में तैनात थे, जहां से पलामू क्षेत्र में सबसे अधिक नक्सल विरोधी ऑपरेशन चलाए जाते हैं। सीआरपीएफ की बटालियन हटने के बाद आईआरबी-10 इस इलाके में नक्सल विरोधी अभियान की कमान संभाल रही है। इन जवानों की सफलता ने यह संदेश दिया है कि संघर्ष और संकल्प साथ-साथ चलें तो सफलता जरूर मिलती है।


