New Delhi : केंद्र और राज्यों के बीच फंड शेयरिंग के लिए प्रस्तावित VB-G RAM G मॉडल से राज्यों को बड़ा वित्तीय लाभ मिलने की उम्मीद है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, यह मॉडल लागू होने पर राज्यों को पिछले सात वर्षों के औसत आवंटन की तुलना में लगभग 17,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त लाभ हो सकता है।
नॉर्मेटिव असेसमेंट के आधार पर फंड वितरण
रिपोर्ट में कहा गया है कि नए मॉडल में फंड वितरण नॉर्मेटिव असेसमेंट यानी वस्तुनिष्ठ मानकों के आधार पर होगा। इसमें इक्विटी (समानता) और एफिशिएंसी (दक्षता) को मुख्य आधार बनाया गया है। SBI के ग्रुप चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर डॉ. सौम्य कांति घोष का कहना है कि इस मॉडल के तहत ज्यादातर राज्य शुद्ध लाभार्थी बनेंगे।
इक्विटी और एफिशिएंसी का संतुलन
रिपोर्ट के अनुसार, इक्विटी का उद्देश्य है अधिक जरूरत वाले राज्यों को पर्याप्त वित्तीय सहायता देना, जबकि एफिशिएंसी का उद्देश्य है उन राज्यों को प्रोत्साहित करना जो फंड का इस्तेमाल स्थायी रोजगार सृजन, टिकाऊ परिसंपत्तियों के निर्माण और समय पर मजदूरी भुगतान में बेहतर तरीके से करते हैं। इसके लिए कुल सात मापदंड तय किए गए हैं।
MGNREGA आवंटन से तुलना
रिपोर्ट में FY19-25 (COVID वर्ष FY21 को छोड़कर) के दौरान MGNREGA के औसत आवंटन की तुलना इस नए मॉडल से की गई है। इस तुलना में राज्यों को कुल मिलाकर लगभग 17,000 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ होने का अनुमान है।
किसे होगा सबसे ज्यादा फायदा
SBI की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र सबसे बड़े लाभार्थी होंगे। इसके बाद बिहार, छत्तीसगढ़ और गुजरात को भी अच्छा लाभ मिलने की संभावना है। लगभग सभी राज्यों को फायदा होगा, जबकि केवल दो राज्यों में मामूली नुकसान का अनुमान है।
राज्यों की भूमिका भी अहम
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यदि राज्य अपनी 40 प्रतिशत हिस्सेदारी को प्रभावी ढंग से जोड़ते हैं, तो इस मॉडल से रोजगार और विकास के परिणाम और बेहतर होंगे। SBI का मानना है कि यह मॉडल विकसित और पिछड़े राज्यों दोनों के लिए संतुलित और न्यायसंगत साबित हो सकता है।
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