अभिनेता दिलजीत दोसांझ अभिनीत फिल्म सतलज को भारत में ZEE5 से हटाए जाने के बाद विवाद और गहरा गया है. केंद्र सरकार ने अब फिल्म की सामग्री की जांच के लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के तहत एक हाई-लेवल इंटर-डिपार्टमेंटल कमेटी (IDC) का गठन किया है. समिति फिल्म की सामग्री और उस पर लागू कानूनी प्रावधानों की समीक्षा करेगी. फिल्म 3 जुलाई को ZEE5 पर बिना किसी बड़े प्रचार के रिलीज की गई थी, लेकिन लगभग दो दिन बाद इसे भारत में प्लेटफॉर्म से हटा लिया गया.
ZEE5 ने अपने बयान में कहा कि “वर्तमान परिस्थितियों” को देखते हुए फिल्म को फिलहाल भारत में उपलब्ध नहीं कराया जाएगा और वह कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से इसे दोबारा उपलब्ध कराने की संभावनाओं पर काम कर रहा है. फिल्म को सुरक्षा संबंधी चिंताओं और Information Technology (Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code) Rules, 2021 के तहत उत्पन्न मुद्दों के कारण हटाने का निर्देश दिया गया. अधिकारियों का कहना है कि फिल्म का मूल संस्करण पंजाब 95 (Punjab 95) वर्ष 2022 में प्रमाणन के लिए भेजा गया था, लेकिन प्रमाणन प्रक्रिया पूरी नहीं हुई. इसके बावजूद बदले हुए नाम “सतलज” से इसे OTT पर जारी कर दिया गया.
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा गठित IDC फिल्म की सामग्री का परीक्षण करेगी. कमेटी यह देखेगी कि क्या इसमें ऐसा कंटेंट है, जो लागू कानूनों या सार्वजनिक व्यवस्था एवं सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों के संदर्भ में समीक्षा योग्य है. समिति अपनी रिपोर्ट और सिफारिशें केंद्र सरकार को सौंपेगी, जिसके बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी.
दिलजीत दोसांझ ने क्या कहा –
फिल्म को लेकर दिलजीत दोसांझ ने इंस्टाग्राम पर अपनी पहली सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने कहा कि उन्हें पहले से अंदाजा था कि फिल्म हटाई जा सकती है. इसलिए फिल्म को गुपचुप तरीके से रिलीज किया गया. उन्होंने आगे कहा कि फिल्म दर्शकों तक पहुंच चुकी है और कहानी लोगों के बीच है. एक बार कोई चीज इंटरनेट पर आ जाए, तो उसे पूरी तरह से मिटाया नहीं जो सकता. उन्होंने समर्थन करने के लिए दर्शकों को धन्यवाद दिया और कहा कि सतलज सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि महत्वपूर्ण कहानी है, जिसे दर्शकों तक पहुंचाने के लिए संघर्ष कर रहे थे. वहीं फिल्म हटाए जाने के बाद पंजाब के कई राजनीतिक दलों, फिल्मकारों और कलाकारों ने इस फैसले पर सवाल उठाए हैं. वहीं केंद्र सरकार ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का नहीं, बल्कि लागू नियमों और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के अनुपालन का मामला बताया है.
फिल्म क्यों रही विवादों में?
यह फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता “जसवंत सिंह कालरा” के जीवन से प्रेरित बताई जाती है. पहले इसका नाम पंजाब 95 था और यह लंबे समय तक प्रमाणन संबंधी विवादों में फंसी रही. निर्माताओं का दावा था कि फिल्म में बड़ी संख्या में कट लगाने के सुझाव दिए गए थे, जिसके कारण इसकी रिलीज वर्षों तक टलती रही. बाद में इसे नए नाम सतलज से OTT पर रिलीज किया गया.
फिलहाल सरकार द्वारा गठित इंटर-डिपार्टमेंटल कमेटी की जांच जारी है. इस जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि फिल्म को भारत में दोबारा रिलीज़ करने की अनुमति मिलेगी या नहीं.
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