कोलकाता के सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (SRFTI) का विवाद अब बंगाली अभिनेत्री रोशनी भट्टाचार्य तक पहुंच गया है. SRFTI के छात्रों के समर्थन में पोस्ट करने के बाद रोशनी को सोशल मीडिया पर कथित तौर पर ‘जिहादी’ और ‘एंटी-नेशनल कम्युनिस्ट’ कहकर निशाना बनाया गया. इसके जवाब में रोशनी ने अपनी धार्मिक पहचान का जिक्र करते हुए कहा, “मैं हिंदू हूं, मैं ब्राह्मण हूं. लेकिन उसके साथ-साथ मैं एक इंसान भी हूं.”
दरअसल, SRFTI में 27 सितंबर को एक कार्यक्रम को लेकर छात्रों और अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत (ABGP) से जुड़े लोगों के बीच विवाद हो गया था. रिपोर्टों के मुताबिक ABGP ने संस्थान का ऑडिटोरियम बुक कर कार्यक्रम आयोजित किया था. छात्रों ने इस बात पर आपत्ति जताई कि कैंपस में बाहरी संगठन का कार्यक्रम क्यों कराया गया और छात्रों को इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई.
विवाद बढ़ने के बाद दोनों पक्षों के बीच मारपीट की स्थिति बन गई. दोनों तरफ से एक-दूसरे पर हमला करने के आरोप लगाए गए. इसी घटनाक्रम के बाद SRFTI छात्र संघ ने अपना पक्ष सोशल मीडिया पर रखा.
अभिनेत्री रोशनी भट्टाचार्य ने भी छात्रों के बयान/पोस्ट को अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर शेयर किया. इसके बाद कथित तौर पर उन्हें सोशल मीडिया पर निजी संदेश भेजकर निशाना बनाया गया.
‘जिहादी’, ‘एंटी-नेशनल कम्युनिस्ट’ कहकर किया गया हमला
हिंदुस्तान टाइम्स बांग्ला की रिपोर्ट के मुताबिक, एक सोशल मीडिया यूजर ने रोशनी को ‘जिहादी’ और ‘एंटी-नेशनल कम्युनिस्ट’ जैसे शब्दों से संबोधित किया. रोशनी ने इस संदेश का स्क्रीनशॉट सार्वजनिक किया और उसी के जरिए जवाब दिया.
उन्होंने लिखा, “मैं हिंदू, मैं ब्राह्मण. लेकिन उसके साथ-साथ मैं एक इंसान भी हूं.”
रोशनी का यह जवाब अब SRFTI विवाद के सोशल मीडिया एंगल में चर्चा का विषय बना हुआ है.
रोशनी ने अपनी पहचान का जिक्र क्यों किया?
रोशनी के जवाब का मूल संदेश यही था कि किसी मुद्दे पर अपनी बात रखने के लिए उनकी धार्मिक या जातिगत पहचान को आधार बनाकर उन्हें निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए. उन्होंने खुद को हिंदू और ब्राह्मण बताते हुए यह भी स्पष्ट किया कि उनकी पहचान सिर्फ इतनी तक सीमित नहीं है.
हालांकि, यहां एक जरूरी फर्क है. रोशनी को ‘जिहादी’ और ‘एंटी-नेशनल कम्युनिस्ट’ कहने वाला कथित संदेश एक सोशल मीडिया यूजर की तरफ से आया था.
आखिर SRFTI में हुआ क्या था?
बीते 27 सितंबर को SRFTI परिसर में अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत (ABGP) का कार्यक्रम आयोजित किया गया था. ABGP को RSS से जुड़ा संगठन बताया जाता है. संगठन का कहना है कि उसने संस्थान का ऑडिटोरियम करीब 15 हजार रुपये में बुक किया था और इसके लिए अनुमति ली थी.
वहीं छात्रों का कहना है कि उन्हें इस कार्यक्रम की जानकारी नहीं दी गई थी. छात्रों ने कार्यक्रम का विरोध किया और इसके बाद दोनों पक्षों में बहस शुरू हुई, जो बाद में हिंसा में बदल गई.
छात्रों का आरोप है कि कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने छात्रों के साथ मारपीट की और उन्हें ‘एंटी-नेशनल’, ‘अर्बन नक्सल’, ‘आतंकवादी’ जैसे शब्दों से संबोधित किया. कुछ छात्रों ने महिला छात्रों के साथ बदसलूकी और मारपीट का भी आरोप लगाया है.
दूसरी ओर ABGP का कहना है कि छात्रों ने कार्यक्रम में बाधा डाली, पोस्टर-बैनर फाड़े और उसके सदस्यों पर हमला किया. संगठन ने अपने लोगों के घायल होने का भी दावा किया है. यानी हिंसा की शुरुआत किस तरफ से हुई, इस पर दोनों पक्षों का दावा अलग है. मामले की जांच पुलिस कर रही है.
घटना के बाद पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायतों पर कार्रवाई की. रिपोर्टों के मुताबिक छात्रों, ABGP और पुलिस की ओर से अलग-अलग FIR दर्ज की गई हैं. पुलिस मामले की जांच कर रही है और फिलहाल यह तय होना बाकी है कि झड़प की शुरुआत किसने की थी.
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