जोहार लाइव ब्यूरो
BJP सांसद निशिकांत दुबे और पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग के बीच विवाद अब अदालत तक पहुंच गया है. दुबे ने गर्ग के खिलाफ मानहानि के दो मामले दर्ज कराए हैं. इनमें एक आपराधिक मानहानि का मामला दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में और दूसरा सिविल मानहानि का मुकदमा दिल्ली हाई कोर्ट में दायर किया गया है. हाई कोर्ट में दायर मामले में दुबे ने गर्ग से ₹2 करोड़ के हर्जाने की मांग की है.
मामले की जड़ गर्ग की उन कथित टिप्पणियों को बताया जा रहा है, जिनमें उन्होंने निशिकांत दुबे को “ब्लैकमेल करने वाले किस्म का व्यक्ति” बताया था. गर्ग ने कथित तौर पर यह भी आरोप लगाया था कि दुबे अपने काम करवाने के लिए भारतीय जीवन बीमा निगम यानी LIC के चेयरमैन पर दबाव बनाने के उद्देश्य से उनके कार्यालय पहुंचे थे.
दुबे ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि गर्ग के बयान झूठे, दुर्भावनापूर्ण और मानहानिकारक हैं. उनका कहना है कि ऐसे आरोपों से उनकी सार्वजनिक छवि और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है.
क्या है पूरा विवाद?
विवाद मुख्य रूप से 2018 में हुई कथित मुलाकात और उसमें हुई बातचीत के आरोप-प्रत्यारोप के साथ-साथ आर्थिक नीतियों और GDP के आंकड़ों को लेकर दोनों के सार्वजनिक बयानों के इर्द-गिर्द है. अदालत में दायर मामलों में दुबे ने गर्ग के बयानों को मानहानिकारक बताते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग की है. दूसरी ओर, गर्ग की ओर से लगाए गए आरोपों और उनके जवाब का अंतिम कानूनी आकलन अदालत की कार्यवाही में होना बाकी है.
GDP ग्रोथ के आंकड़ों से फिर गरमाया विवाद
दुबे और गर्ग के बीच विवाद इस महीने उस समय फिर सुर्खियों में आया, जब पूर्व वित्त सचिव ने पहली तिमाही के लिए केंद्र सरकार की ओर से जारी 7.8% GDP ग्रोथ के आंकड़ों पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए.
इसके बाद निशिकांत दुबे ने वित्त मंत्रालय में वरिष्ठ नौकरशाह के तौर पर गर्ग के कार्यकाल और उनकी आर्थिक नीतियों की आलोचना को फिर सामने रखा. दुबे ने मार्च 2018 का एक पत्र भी साझा किया था. इसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गर्ग के मैक्रो-इकोनॉमिक पॉलिसी फ्रेमवर्क की समीक्षा करने का आग्रह किया था.
पॉडकास्ट में गर्ग के आरोप से बढ़ा विवाद
विवाद इसके बाद और बढ़ गया, जब सुभाष चंद्र गर्ग ने एक पॉडकास्ट में कथित तौर पर कहा कि निशिकांत दुबे वर्ष 2018 में उनके कार्यालय आए थे. गर्ग के अनुसार, उस दौरान दुबे ने LIC, ट्रांसफर और कॉन्ट्रैक्ट से जुड़े मामलों में हस्तक्षेप करने को कहा था. गर्ग ने इस कथित बातचीत को अपने ऊपर दबाव बनाने की कोशिश के तौर पर पेश किया.
निशिकांत दुबे ने गर्ग के इस दावे से इनकार किया है कि वह 2018 में उनके कार्यालय गए थे. उन्होंने पूर्व नौकरशाह पर झूठे और मानहानिकारक आरोप लगाने का आरोप लगाया. इसके बाद दुबे की ओर से गर्ग को कानूनी नोटिस भेजा गया, जिसमें कथित बयानों को लेकर बिना शर्त माफी की मांग की गई थी. गर्ग की ओर से इस कानूनी नोटिस का जवाब दिया गया. इसके बाद दुबे ने अदालत का रुख किया. दोनों मानहानि के मामले अधिवक्ता अमित वी. अवस्थी के माध्यम से दाखिल किए गए हैं.
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