Johar Live, New York : अमेरिका में सोमवार, 20 अप्रैल 2026 से व्यापार जगत के लिए एक बड़ा बदलाव शुरू हो गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए आयात शुल्क (टैरिफ) को सुप्रीम कोर्ट द्वारा असंवैधानिक घोषित किए जाने के बाद अब उनकी वापसी (रिफंड) की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके लिए अमेरिकी सीमा शुल्क विभाग ने ऑनलाइन पोर्टल भी खोल दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने बताया असंवैधानिक
मामला तब शुरू हुआ जब डोनाल्ड ट्रंप ने व्यापार घाटे को राष्ट्रीय आपातकाल बताते हुए कई देशों से आने वाले उत्पादों पर भारी आयात शुल्क लगा दिए थे। हालांकि, 20 फरवरी 2026 को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए कहा कि राष्ट्रपति ने संसद (कांग्रेस) की कर लगाने की शक्ति का उल्लंघन किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस तरह का कर लगाने का अधिकार राष्ट्रपति को एकतरफा नहीं है।
कितनी राशि लौटाई जाएगी
अमेरिकी सीमा शुल्क एवं सीमा सुरक्षा विभाग (सीबीपी) के अनुसार, लगभग 3,30,000 आयातकों ने कुल 166 अरब डॉलर का टैरिफ भुगतान किया था। वर्तमान में करीब 127 अरब डॉलर (ब्याज सहित) की राशि रिफंड के लिए तैयार की जा रही है। अब तक 56,000 से अधिक आयातकों ने रिफंड के लिए पंजीकरण कराया है।
रिफंड की प्रक्रिया
रिफंड के लिए एक विशेष ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया गया है। इसकी प्रक्रिया इस प्रकार है—
- व्यापारियों को इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम (एसीई पोर्टल) पर पंजीकरण करना होगा
- सभी दस्तावेज और प्रविष्टियां सही होना जरूरी है
- एक छोटी गलती भी आवेदन रद्द कर सकती है
- आवेदन मंजूर होने के बाद राशि मिलने में 60 से 90 दिन लग सकते हैं
किसे मिलेगा फायदा
फिलहाल यह रिफंड उन मामलों पर लागू होगा, जहां टैरिफ का अनुमान लगाया गया था लेकिन अंतिम रूप से तय नहीं हुआ था या जो हाल के 80 दिनों के भीतर के हैं। पहले कार्यकाल में लगाए गए कुछ पुराने टैरिफ (जैसे स्टील, एल्युमीनियम और चीन से जुड़े शुल्क) इस योजना में शामिल नहीं हैं।
उपभोक्ताओं को मिलेगा लाभ या नहीं
इस फैसले का असर आम लोगों पर भी पड़ सकता है, लेकिन यह पूरी तरह कंपनियों पर निर्भर करेगा।
- कुछ कंपनियां ग्राहकों को पैसा लौटाने के लिए बाध्य नहीं हैं
- कई छोटे व्यापारी इसे अपने व्यवसाय में खर्च मानकर पैसा अपने पास रख सकते हैं
- कुछ बड़ी डिलीवरी कंपनियों ने संकेत दिया है कि वे ग्राहकों को पैसा लौटा सकती हैं
कानूनी विवाद भी जारी
कुछ बड़ी कंपनियों के खिलाफ क्लास-एक्शन मुकदमे भी चल रहे हैं, जिनमें मांग की जा रही है कि रिफंड का लाभ उन ग्राहकों तक भी पहुंचे जिन्होंने महंगे दाम पर सामान खरीदा था।
छोटे कारोबारियों को राहत की उम्मीद
छोटे व्यापारियों ने इस फैसले को राहत भरा बताया है। कई उद्यमियों का कहना है कि उन्होंने हजारों डॉलर टैक्स के रूप में चुकाए थे, जिससे उनके नकदी प्रवाह पर असर पड़ा था। हालांकि, रिफंड प्रक्रिया में लगने वाला 2 से 3 महीने का समय उनके लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
अमेरिकी व्यापार व्यवस्था पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से अमेरिकी व्यापार नीति और कर व्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है। यह मामला आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों को भी प्रभावित कर सकता है।
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